संकट मोचन मंदिर के बारे में
संकट मोचन हनुमान मंदिर भारत के सबसे पवित्र हनुमान धामों में से एक है, जो उत्तर प्रदेश के पवित्र नगर वाराणसी (काशी) में स्थित है। संकट मोचन नाम का अर्थ है संकटों का हर्ता, हनुमान जी की एक प्रिय उपाधि। अस्सी क्षेत्र और गंगा तट के पास वृक्षों के बीच बसा यह मंदिर प्रतिदिन हजारों भक्तों को आकर्षित करता है जो जीवन के संकट, भय व बाधाओं से राहत हेतु आते हैं।
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा स्थापित
माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना रामचरितमानस के रचयिता संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास ने सोलहवीं शताब्दी में की। परंपरा कहती है कि तुलसीदास को इसी स्थान पर हनुमान जी के दर्शन हुए, जहाँ उन्हें भगवान राम का दर्शन प्राप्त हुआ। कृतज्ञता में उन्होंने इस धाम की स्थापना की। वर्तमान मंदिर संरचना बीसवीं शताब्दी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा पुनर्निर्मित की गई।
आध्यात्मिक महत्व
भक्त मानते हैं कि संकट मोचन में प्रार्थना जीवन के सभी संकट - कष्ट, भय, रोग व बाधाएँ - दूर करती है। यहाँ के देव विशेष रूप से दयालु और सच्ची प्रार्थना पर शीघ्र उत्तर देने वाले माने जाते हैं। इस मंदिर के दर्शन काशी यात्रा का अनिवार्य अंग माने जाते हैं, जो अक्सर काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के साथ किए जाते हैं। अनेक मानते हैं कि हनुमान जी यहाँ सूक्ष्म रूप में विराजमान रहकर शिव की नगरी की रक्षा करते हैं।
मंगलवार और शनिवार की भीड़

चूँकि मंगलवार और शनिवार हनुमान के विशेष दिन हैं, मंदिर में तब सबसे अधिक भीड़ होती है, जहाँ भक्त सिंदूर, बूँदी लड्डू और लाल पुष्प अर्पित करते लंबी कतारों में लगते हैं। इन दिनों वातावरण हनुमान चालीसा के पाठ और भजनों के गायन से भर जाता है। जो भक्त अन्य दिन नहीं आ पाते वे अक्सर मंगलवार या शनिवार का दर्शन तय करते हैं, यह मानकर कि तब की प्रार्थना विशेष फलदायी होती है।
अनुष्ठान और भोग
मंदिर में सामान्य भोग व अर्पण में शामिल हैं: 1. हनुमान जी को सिंदूर लगाना और माथे पर प्रसाद रूप में लेना। 2. भोग रूप में बूँदी लड्डू और बेसन की मिठाइयाँ। 3. लाल पुष्प व मालाएँ, विशेषकर गेंदा। 4. हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ। 5. विशेष अवसरों पर दीप जलाना और चोला चढ़ाना। मंदिर हर वर्ष हनुमान के सम्मान में प्रसिद्ध संकट मोचन संगीत समारोह, एक शास्त्रीय संगीत महोत्सव, भी आयोजित करता है।
दर्शन से पूर्व जानने योग्य बातें
मंदिर प्रातः से देर संध्या तक खुला रहता है, जहाँ मंगलवार और शनिवार सबसे व्यस्त समय होते हैं। यह वाराणसी के दक्षिणी भाग में, अस्सी घाट और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पास स्थित है, जहाँ ऑटो या टैक्सी से सरलता से पहुँचा जा सकता है। शालीन वस्त्र पहनें, प्रवेश से पूर्व जूते उतारें, और सुरक्षा जाँच का पालन करें क्योंकि मंदिर भली प्रकार सुरक्षित है। पास के अस्सी घाट के साथ अपना दर्शन जोड़ें, प्रातः गंगा आरती और काशी यात्रा के शांत आरंभ हेतु।
दर्शन शिष्टाचार

कतार में मौन व भक्ति बनाए रखें, और धक्का-मुक्की या जल्दबाज़ी से बचें। गर्भगृह के भीतर फोटोग्राफी अक्सर वर्जित होती है, इसलिए देव के पास फोन दूर रखें। न्यूनतम सामान साथ रखें, क्योंकि बैग व कुछ वस्तुएँ भीतर अनुमत नहीं हो सकतीं। शांत, विनम्र हृदय से प्रार्थना करें - संकट मोचन की भावना श्रद्धा है, दिखावा नहीं, और यहाँ हनुमान चालीसा का मौन पाठ भी गहराई से सम्मानित है।
पाठकों के प्रश्न
संकट मोचन मंदिर की स्थापना किसने की?+
माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने सोलहवीं शताब्दी में, उस स्थान पर की जहाँ उन्हें हनुमान जी के दर्शन हुए।
संकट मोचन का अर्थ क्या है?+
संकट मोचन का अर्थ है 'संकटों का हर्ता', हनुमान जी की एक प्रिय उपाधि। भक्त यहाँ अपने जीवन के संकट, भय, रोग व बाधाओं से मुक्ति हेतु प्रार्थना करते हैं।
संकट मोचन मंदिर कहाँ स्थित है?+
यह वाराणसी के दक्षिणी भाग में, अस्सी घाट और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पास है। यहाँ ऑटो या टैक्सी से सरलता से पहुँचा जा सकता है और यह काशी यात्रा का प्रमुख पड़ाव है।
मंदिर में सबसे व्यस्त दिन कौन से हैं?+
मंगलवार और शनिवार सबसे व्यस्त हैं, क्योंकि ये हनुमान के विशेष दिन हैं। भक्त सिंदूर, लड्डू व लाल पुष्प अर्पित करने और हनुमान चालीसा पढ़ने हेतु लंबी कतारों में लगते हैं।
संकट मोचन मंदिर में क्या अर्पित किया जाता है?+
सामान्य भोग सिंदूर, बूँदी लड्डू, बेसन की मिठाई और गेंदा जैसे लाल पुष्प हैं। भक्त हनुमान चालीसा, बजरंग बाण व सुंदरकांड भी पढ़ते हैं और विशेष दिनों पर चोला चढ़ाते हैं।
संकट मोचन संगीत समारोह क्या है?+
यह हर वर्ष मंदिर में हनुमान के सम्मान में आयोजित एक प्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय संगीत महोत्सव है, जो विख्यात संगीतकारों व भक्तों को भक्तिमय प्रस्तुतियों की रातों हेतु आकर्षित करता है।
About the author
Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years
Pandit Ravindra is the Vandnaa editorial team's resident specialist on aarti, chalisa, and daily devotion. He has performed home and temple pujas across Varanasi and Delhi for over two decades and contributes the bhakti-focused articles on this site.
Meet the Vandnaa editorial team →Explore on Vandnaa
संबंधित लेख

हनुमान चालीसा लिरिक्स हिंदी और अंग्रेजी में
12 मिनट पढ़ें

हनुमान आरती के बोल हिंदी और अंग्रेजी में - आरती कीजै हनुमान लला की
9 मिनट पढ़ें

हनुमान जी पूजा नियम - मंगलवार और शनिवार के नियम
9 मिनट पढ़ें

हनुमान जी सिंदूर और चोला - महत्व और विधि
8 मिनट पढ़ें

राम नाम जाप - महिमा, लाभ और विधि
9 मिनट पढ़ें

राम सेतु - महत्व, कथा और तथ्य
8 मिनट पढ़ें