हनुमान जी को सिंदूर क्यों अर्पित होता है
सभी देवों में, हनुमान जी की उपासना अनोखे रूप से उनके पूरे शरीर पर लगाए सिंदूर और मोटे चोले के रूप में होती है। यह उनकी सबसे विशिष्ट और प्रिय उपासना-शैलियों में से एक है। यह प्रथा रामायण की एक मार्मिक कथा से उपजी है जो भगवान राम और माता सीता के प्रति उनके शुद्ध प्रेम के बारे में है। हनुमान को सिंदूर अर्पित करना उन्हें अत्यंत प्रसन्न करने और उनकी शीघ्र रक्षा व कृपा लाने वाला माना जाता है।
सीता के सिंदूर की कथा
एक दिन हनुमान ने माता सीता को अपनी माँग में सिंदूर लगाते देखा। पूछने पर सीता ने उत्तर दिया कि वे यह भगवान राम के दीर्घायु व कल्याण हेतु करती हैं। यह सुनकर हनुमान ने सोचा: यदि थोड़ा सिंदूर राम को इतना आशीष देता है, तो अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाकर वे भगवान राम को असीम आयु व आनंद दे सकते हैं। शुद्ध प्रेम में उन्होंने स्वयं पर सर्वत्र सिंदूर पोत लिया। इस भक्ति से द्रवित होकर भगवान राम ने उन्हें आशीर्वाद दिया - और इसीलिए भक्त आज तक हनुमान को सिंदूर अर्पित करते हैं।
चोले का महत्व
चोला तेल में मिले सिंदूर की मोटी परत है, जो हनुमान जी की मूर्ति पर एक पवित्र वस्त्र की भाँति लगाई जाती है। यह राम के प्रति हनुमान के पूर्ण समर्पण और प्रेम, और भक्ति में अपना सर्वस्व अर्पित करने की तत्परता को दर्शाता है। चोला अर्पण भक्ति का शक्तिशाली कर्म माना जाता है, जो गंभीर संकट हरने, सच्ची मनोकामना पूर्ण करने और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा देने वाला कहा जाता है। गहरा लाल रंग बल, त्याग और ब्रह्मचर्य (पवित्रता) का भी प्रतीक है।
विधि - सिंदूर और चोला कैसे लगाएँ

मंगलवार या शनिवार को इस विधि से सिंदूर अर्पित करें: 1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें; नवीनीकरण कर रहे हों तो मूर्ति से पुराना चोला साफ करें। 2. शुद्ध सिंदूर में चमेली के तेल की कुछ बूँदें मिलाकर चिकना लेप बनाएँ। 3. अनामिका या स्वच्छ पत्ते से लेप हनुमान जी के चरणों से ऊपर की ओर लगाते हुए शरीर ढकें। 4. उसी सिंदूर का तिलक प्रसाद रूप में अपने माथे पर लगाएँ। 5. पान का पत्ता, बूँदी लड्डू और लाल पुष्प अर्पित करें। 6. दीप जलाएँ, हनुमान चालीसा पढ़ें, और आरती करें। 7. बल, साहस व रक्षा हेतु हाथ जोड़कर प्रार्थना करें।
चमेली तेल और पान क्यों
चमेली के तेल को परंपरागत रूप से सिंदूर में मिलाया जाता है क्योंकि यह सिंदूर को चिकना बाँधता है, सुगंधित व टिकाऊ चोला देता है, और हनुमान जी को विशेष प्रिय माना जाता है। चोले के बाद पान सम्मान और स्नेह के प्रतीक रूप में अर्पित किया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे किसी आदरणीय अतिथि को पान भेंट किया जाए। साथ में, सिंदूर, चमेली तेल और पान वह उत्कृष्ट, पुरातन अर्पण बनाते हैं जो बजरंगबली को आनंदित करता है।
सिंदूर और चोला अर्पण के लाभ
हनुमान जी को भक्ति से सिंदूर और चोला अर्पित करना बाधाओं व गंभीर कठिनाइयों को हरने, साहस तथा भय व नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा देने और हार्दिक मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाला माना जाता है। यह शनि-संबंधी कष्टों से राहत और परिवार की सुरक्षा हेतु विशेष शक्तिशाली माना जाता है। सबसे महत्वपूर्ण, यह कर्म भक्ति को गहरा करता है, भक्त को हनुमान व भगवान राम की स्नेहमयी कृपा के निकट लाता है।
ध्यान रखने योग्य बातें

शुद्ध, उत्तम सिंदूर और ताज़ा चमेली तेल प्रयोग करें, और पूरे समय अपने हाथ व पूजा स्थान स्वच्छ रखें। चोला शांत भक्ति से लगाएँ, जल्दबाज़ी में नहीं, और इसे कभी भव्यता के दिखावे रूप में न करें। नवीनीकरण के समय पुराना चोला सम्मानपूर्वक हटाकर स्वच्छ जल में प्रवाहित या भूमि में दबाएँ, कभी लापरवाही से न फेंकें। चोले की मोटाई से कहीं अधिक निष्ठा और प्रेम मायने रखते हैं।
त्वरित उत्तर
हनुमान जी को सिंदूर क्यों अर्पित होता है?+
यह रामायण की उस कथा से आता है जहाँ हनुमान ने राम के कल्याण हेतु सीता को सिंदूर लगाते देख, भगवान राम के प्रेम में अपने शरीर पर सिंदूर पोत लिया। राम ने आशीर्वाद दिया, इसीलिए भक्त आज तक सिंदूर अर्पित करते हैं।
हनुमान चोला क्या है?+
चोला चमेली तेल में मिले सिंदूर की मोटी परत है, जो हनुमान जी की मूर्ति पर पवित्र वस्त्र की भाँति लगाई जाती है। यह भगवान राम के प्रति उनके पूर्ण प्रेम व समर्पण का प्रतीक है।
चोले के लिए सिंदूर में कौन सा तेल मिलाया जाता है?+
परंपरागत रूप से चमेली का तेल सिंदूर में मिलाया जाता है। यह सिंदूर को चिकना बाँधता है, सुगंधित व टिकाऊ चोला देता है और हनुमान जी को विशेष प्रिय माना जाता है।
हनुमान को चोला किस दिन अर्पित करना चाहिए?+
मंगलवार और शनिवार सर्वोत्तम दिन हैं, क्योंकि ये हनुमान जी को पवित्र हैं। स्नान के बाद, स्वच्छ पूजा स्थान और शांत भक्ति के साथ चोला अर्पित करें।
सिंदूर और चोला अर्पण के क्या लाभ हैं?+
यह बाधाओं व गंभीर कष्टों को हरने, साहस व रक्षा देने, शनि-संबंधी समस्याओं से राहत और हार्दिक मनोकामनाएँ पूर्ण करने वाला माना जाता है, साथ ही भक्त की भक्ति को गहरा करता है।
चोले के बाद पान क्यों अर्पित किया जाता है?+
पान सम्मान और स्नेह के प्रतीक रूप में अर्पित किया जाता है, जैसे किसी आदरणीय अतिथि को पान भेंट किया जाए। सिंदूर व चमेली तेल के साथ यह हनुमान जी को प्रिय उत्कृष्ट अर्पण बनाता है।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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