ऋषि पंचमी क्या है
ऋषि पंचमी सप्त ऋषि को समर्पित व्रत है - सात महान ऋषि कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ - जिन्होंने वेदों और मानवता के धर्म की रक्षा की। यह मुख्यतः स्त्रियों द्वारा इन ऋषियों के प्रति कृतज्ञता और आंतरिक शुद्धि के दिन रूप में मनाया जाता है, जाने-अनजाने किए दोषों के लिए क्षमा माँगते हुए। यह दिन कोमल, भक्तिमय और स्वच्छता, सादे भोजन व सच्ची प्रार्थना पर केंद्रित है।
ऋषि पंचमी 2026 की तिथि और समय
ऋषि पंचमी भाद्रपद शुक्ल पंचमी को पड़ती है - भाद्रपद के शुक्ल पक्ष का पाँचवाँ दिन। ग्रेगोरियन पंचांग में यह वर्षा के अंत में, अगस्त के अंत या सितंबर के आसपास आती है। यह हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन आती है, भाद्रपद के भक्तिमय दिनों के समूह का हिस्सा बनते हुए। चूँकि तिथि और पूजा मुहूर्त हर वर्ष व क्षेत्र अनुसार भिन्न होते हैं, कृपया अपने शहर की सही तिथि व समय वंदना पंचांग पर सुनिश्चित करें।
ऋषि पंचमी का महत्व
ऋषि पंचमी सप्त ऋषि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु मनाई जाती है, उस ज्ञान, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत के लिए जो उन्होंने मानवता हेतु संरक्षित की। यह व्रत परंपरागत रूप से अशुद्धियों और अनजाने दोषों के प्रायश्चित का मार्ग माना जाता है, बाह्य व आंतरिक स्वच्छता पुनः स्थापित करते हुए। यह भक्तों को अनुशासन, विनम्रता और पवित्र ज्ञान व प्राकृतिक व्यवस्था के सम्मान के साथ जीने, और नदियों, धरती व मार्गदर्शक गुरुओं का आदर करने की याद दिलाता है।
ऋषि पंचमी के व्रत नियम

ऋषि पंचमी व्रत शुद्धता और सादे, स्वतः उगे भोजन पर बल देता है: 1. प्रातः स्नान करें, आदर्श रूप से नदी या स्वच्छ जल का सम्मान करते हुए, और स्वच्छ वस्त्र पहनें। 2. भक्ति और शुद्ध हृदय से व्रत रखने का संकल्प लें। 3. केवल एक बार भोजन करें, सामान्य अन्न त्यागते हुए; अनेक परंपरागत रूप से सामक (मोरधन) और हल से न उगाए भोजन जैसे जंगली साग व कंद का उपयोग करते हैं। 4. रीति अनुसार नमक, साथ ही प्याज, लहसुन व तामसिक भोजन त्यागें। 5. दिन स्वच्छता, प्रार्थना और शांत चिंतन में बिताएँ। जो कठोर व्रत नहीं रख सकते वे सच्ची भक्ति से सादा फलाहार व्रत रख सकते हैं।
सप्त ऋषि पूजा विधि
सात ऋषियों की सरलता और भक्ति से उपासना करें: 1. स्नान के बाद पूजा स्थल स्वच्छ करें और सप्त ऋषि हेतु छोटी वेदी तैयार करें, कभी सात ऋषियों और अरुंधती के चित्र के साथ। 2. स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और आम के पत्तों व नारियल सहित जल का कलश रखें। 3. सात ऋषियों का नाम लेकर आह्वान करें और पुष्प, दूर्वा, चंदन, धूप, फल व नैवेद्य अर्पित करें। 4. घी का दीपक जलाएँ और सप्त ऋषि की प्रार्थनाओं का जप करें, क्षमा व शुद्धि माँगते हुए। 5. ऋषि पंचमी व्रत कथा पढ़ें या सुनें। 6. आरती करें, फिर ब्राह्मण या जरूरतमंद को दक्षिणा या भोजन अर्पित करें। विस्तृत अनुष्ठान से अधिक कृतज्ञता, स्वच्छता और विनम्र हृदय महत्वपूर्ण हैं।
ऋषि पंचमी व्रत कथा
कथा एक श्रद्धालु ब्राह्मण उत्तंक और उसकी पत्नी सुशीला की है, जिनकी पुत्री विधवा हो गई और उसके शरीर पर चींटियों से पीड़ित रही। एक ऋषि ने बताया कि पूर्वजन्म में उसने अशुद्धि के समय घरेलू वस्तुओं को छुआ था और ऋषि पंचमी व्रत नहीं रखा था, जिससे उसका कष्ट हुआ। ऋषि की सलाह पर उसने पूर्ण श्रद्धा से ऋषि पंचमी व्रत रखा, सप्त ऋषि का सम्मान करते और क्षमा माँगते हुए। इस शुद्धिकारी व्रत से उसके दोष धुल गए और दुःख समाप्त हुआ, जो सच्चे प्रायश्चित और पवित्र अनुशासन के सम्मान की शक्ति सिखाता है।
ऋषि पंचमी व्रत के लाभ

भक्त मानते हैं कि ऋषि पंचमी व्रत अनजाने दोषों व अशुद्धियों को धोता, आंतरिक शांति व नवीनीकरण का भाव लाता, और बुद्धि व कल्याण हेतु सप्त ऋषि का आशीर्वाद दिलाता है। व्रत का स्वच्छता, सादे भोजन व कृतज्ञता पर बल अनुशासित, सचेत जीवनशैली को भी प्रोत्साहित करता है। सबसे बढ़कर, यह ज्ञान, गुरुओं और प्रकृति के प्रति विनम्रता व सम्मान पोषित करता है।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
ऋषि पंचमी 2026 में कब है?+
ऋषि पंचमी भाद्रपद शुक्ल पंचमी को पड़ती है, भाद्रपद के शुक्ल पक्ष का पाँचवाँ दिन, गणेश चतुर्थी के अगले दिन, अगस्त के अंत या सितंबर के आसपास। सही तिथि वंदना पंचांग पर सुनिश्चित करें।
सप्त ऋषि कौन हैं?+
सप्त ऋषि सात महान ऋषि हैं - कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ - जिन्होंने वेदों और धर्म की रक्षा की। ऋषि पंचमी कृतज्ञता से उनका सम्मान करती है।
ऋषि पंचमी व्रत कौन रखता है?+
यह मुख्यतः स्त्रियों द्वारा सप्त ऋषि के प्रति शुद्धि व कृतज्ञता के व्रत रूप में मनाया जाता है, यद्यपि आंतरिक शुद्धि और ऋषियों का आशीर्वाद चाहने वाला कोई भी इसे भक्ति से रख सकता है।
ऋषि पंचमी में कौन सा भोजन खाया जाता है?+
भक्त एक सादा भोजन करते हैं, परंपरागत रूप से सामान्य अन्न व नमक त्यागते हुए, हल से न उगाए भोजन जैसे सामक, जंगली साग व कंद का उपयोग करते, और प्याज, लहसुन व तामसिक भोजन से बचते हैं।
ऋषि पंचमी पर स्नान का क्या महत्व है?+
स्नान, आदर्श रूप से नदी या स्वच्छ जल का सम्मान करते हुए, बाह्य व आंतरिक शुद्धि का प्रतीक है। यह भक्त को स्वच्छता से सप्त ऋषि की उपासना करने और अनजाने दोषों की क्षमा माँगने हेतु तैयार करता है।
ऋषि पंचमी कथा क्या सिखाती है?+
कथा सच्चे प्रायश्चित और पवित्र अनुशासन के सम्मान की शक्ति सिखाती है। व्रत रखकर अपने पूर्व दोषों से शुद्ध हुई स्त्री की कथा द्वारा यह दिखाती है कि भक्ति कैसे शुद्धि व शांति लाती है।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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