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अनंत चतुर्दशी 2026 - अनंत व्रत विधि और गणेश विसर्जन
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अनंत चतुर्दशी 2026 - अनंत व्रत विधि और गणेश विसर्जन

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 2, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

अनंत चतुर्दशी क्या है

अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत रूप को समर्पित है - अनंत, शाश्वत, जिसका न आदि है न अंत। इस दिन भक्त अनंत व्रत रखते हैं और दिव्य रक्षा व अनंत समृद्धि हेतु चौदह गाँठों वाला अनंत सूत्र नामक पवित्र धागा भुजा पर बाँधते हैं। यही दिन गणेश विसर्जन का है, गणपति प्रतिमाओं का अंतिम विसर्जन जो दस दिवसीय गणेश उत्सव को 'गणपति बप्पा मोरया' के भव्य जुलूसों के साथ समाप्त करता है।

अनंत चतुर्दशी 2026 की तिथि और समय

अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को पड़ती है - भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष का चौदहवाँ दिन। ग्रेगोरियन पंचांग में यह वर्षा के अंत में, सितंबर के आसपास आती है। यह गणेश चतुर्थी उत्सव का दसवाँ व अंतिम दिन है, जो भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से आरंभ होता है। चूँकि तिथि और शुभ पूजा व विसर्जन मुहूर्त हर वर्ष चंद्र के साथ बदलते हैं, कृपया अपने शहर की सही तिथि व समय वंदना पंचांग पर सुनिश्चित करें।

अनंत व्रत का महत्व

अनंत व्रत भगवान विष्णु की अनंत कृपा पाने हेतु रखा जाता है - दुर्भाग्य से रक्षा, खोए धन व मान की पुनर्प्राप्ति, और परिवार की पीढ़ियों तक निरंतरता व समृद्धि। अनंत सूत्र की चौदह गाँठें चौदह लोकों और दिव्यता की अनंत प्रकृति की प्रतीक मानी जाती हैं। जो भक्त चौदह वर्ष तक श्रद्धा से, या आजीवन व्रत रखते हैं, उन्हें स्थिरता, समृद्धि और दुःख से मुक्ति का आशीर्वाद माना जाता है।

अनंत चतुर्दशी व्रत और पूजा विधि

अनंत चतुर्दशी व्रत और पूजा विधि

व्रत रखें और प्रातः भगवान विष्णु की उपासना करें: 1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और अनंत व्रत का संकल्प लें। 2. कलश तैयार करें और विष्णु की प्रतिमा रखें, अक्सर शेषनाग (अनंत) पर विराजमान। 3. अनंत सूत्र तैयार करें - हल्दी से रंगा सूती या रेशमी धागा जिसमें चौदह गाँठें बँधी हों। 4. धागे की रोली, कुमकुम, पुष्प, दूर्वा व धूप से पूजा करें, प्रत्येक वस्तु चौदह अर्पित करते हुए। 5. ॐ अनंताय नमः का जप करें और अनंत व्रत कथा सुनें। 6. पुरुष दाएँ और स्त्रियाँ बाएँ हाथ पर अभिमंत्रित धागा बाँधें, फिर आरती करें। अनेक चौदह पूरियाँ या मिठाई अर्पित करते और ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन देते हैं।

अनंत व्रत कथा

कथा एक निर्धन पर श्रद्धालु स्त्री सुशीला की है, ऋषि कौंडिन्य की पत्नी, जिसने अनंत व्रत रखा और पवित्र धागा बाँधा, जिसके बाद परिवार महान धनी हो गया। अभिमान में कौंडिन्य ने बाद में अनंत सूत्र का अनादर कर उसे त्याग दिया, और शीघ्र ही उनका सौभाग्य नष्ट हो गया। अपनी भूल समझकर उन्होंने भगवान अनंत को बहुत खोजा, जो अंततः प्रकट हुए और सिखाया कि समृद्धि केवल विनम्रता और श्रद्धा से आती है। जब कौंडिन्य ने पुनः सच्चे मन से व्रत रखा, तो खोया सब लौट आया। यह कथा भक्ति, कृतज्ञता और दिव्यता के सम्मान की सीख देती है।

अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन

अनंत चतुर्दशी गणेश विसर्जन का दिन है, जब गणेश चतुर्थी पर स्थापित गणपति प्रतिमाएँ आनंदमय जुलूसों में ले जाकर जल में विसर्जित की जाती हैं। विसर्जन से पहले परिवार भगवान गणेश का आभार जताने हेतु उत्तर पूजा करते, मोदक व आरती अर्पित करते, और 'गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लौकर या' के जयघोष से अगले वर्ष लौटने की प्रार्थना करते हैं। विसर्जन गणेश के कैलाश लौटने का प्रतीक है और भक्तों को सृष्टि व नवीनीकरण के चक्र की याद दिलाता है। परंपरा को जिम्मेदारी से निभाने हेतु पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी की प्रतिमाएँ और निर्धारित विसर्जन स्थल चुनें।

अनंत व्रत के लाभ

अनंत व्रत के लाभ

भक्त मानते हैं कि अनंत व्रत भगवान विष्णु की असीम कृपा देता है - संकटों से रक्षा, खोए धन व मान की पुनर्प्राप्ति, स्थायी समृद्धि और घर में सामंजस्य। अनंत सूत्र बाँधना वर्षभर दिव्य रक्षा का कवच माना जाता है। सबसे बढ़कर, व्रत और कथा सिखाते हैं कि सच्ची समृद्धि अभिमान नहीं बल्कि विनम्रता, कृतज्ञता और अटूट श्रद्धा पर टिकी होती है।

भक्तों के सामान्य प्रश्न

अनंत चतुर्दशी 2026 में कब है?+

अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को पड़ती है, भाद्रपद के शुक्ल पक्ष का चौदहवाँ दिन, जो सितंबर के आसपास आता है। अपने शहर की सही तिथि व मुहूर्त वंदना पंचांग पर सुनिश्चित करें।

अनंत सूत्र में चौदह गाँठें क्यों होती हैं?+

चौदह गाँठें चौदह लोकों और भगवान विष्णु के अनंत, असीम स्वरूप की प्रतीक मानी जाती हैं। यह धागा दिव्य रक्षा और स्थायी समृद्धि हेतु बाँधा जाता है।

अनंत चतुर्दशी पर किस देवता की पूजा होती है?+

भगवान विष्णु की अनंत (असीम) रूप में पूजा होती है, अक्सर शेषनाग पर विराजमान दर्शाए जाते हैं। पवित्र अनंत सूत्र की पूजा करते हुए ॐ अनंताय नमः मंत्र का जप किया जाता है।

इस दिन गणेश विसर्जन क्यों किया जाता है?+

अनंत चतुर्दशी गणेश उत्सव का दसवाँ व अंतिम दिन है, इसलिए गणेश चतुर्थी पर स्थापित गणपति प्रतिमाएँ आरती व जुलूसों के साथ विसर्जित की जाती हैं, जो गणेश के कैलाश लौटने का प्रतीक है।

अनंत धागा किस हाथ पर बाँधा जाता है?+

पुरुष परंपरागत रूप से अनंत सूत्र दाएँ हाथ पर और स्त्रियाँ बाएँ हाथ पर बाँधती हैं, धागे की पूजा कर व व्रत कथा सुनने के बाद।

अनंत व्रत कथा क्या सिखाती है?+

कौंडिन्य और सुशीला की कथा द्वारा यह सिखाती है कि समृद्धि विनम्रता, कृतज्ञता और श्रद्धा से आती है। दिव्यता का अनादर हानि लाता है, जबकि सच्ची भक्ति खोया सब लौटा देती है।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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