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हरियाली तीज 2026 - व्रत, कथा, पूजा विधि और महत्व
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हरियाली तीज 2026 - व्रत, कथा, पूजा विधि और महत्व

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 2, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

हरियाली तीज क्या है

हरियाली तीज विवाहित स्त्रियों का पर्व है जो भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का उत्सव मनाता है। हरियाली का अर्थ है हरियाली, और यह पर्व सावन के मध्य में आता है जब धरती हरी-भरी हो जाती है। स्त्रियाँ व्रत रखती हैं, हरे वस्त्र व चूड़ियाँ पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं, और फूलों से सजे झूलों पर झूलते हुए लोकगीत गाती हैं। यह वैवाहिक प्रेम, भक्ति और वर्षा ऋतु की नवजीवन ऊर्जा का उत्सव है।

हरियाली तीज 2026 की तिथि और समय

हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है - सावन मास के शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि। ग्रेगोरियन पंचांग में यह जुलाई या अगस्त के वर्षा मास में पड़ती है। यह हरियाली अमावस्या के दो दिन बाद और रक्षा बंधन से लगभग एक पखवाड़े पहले आती है। चूँकि सटीक तिथि और शुभ पूजा मुहूर्त हर वर्ष चंद्र पंचांग के साथ बदलते हैं, कृपया व्रत रखने से पहले अपने शहर की सही तिथि और समय वंदना पंचांग पर सुनिश्चित करें।

महत्व - स्त्रियाँ यह व्रत क्यों रखती हैं

विवाहित स्त्रियाँ हरियाली तीज का व्रत अपने पतियों की दीर्घायु, स्वास्थ्य व समृद्धि और स्थायी वैवाहिक सुख के लिए रखती हैं। अविवाहित कन्याएँ भी अच्छे जीवनसाथी की प्रार्थना करते हुए इसे मनाती हैं। यह पर्व देवी पार्वती का सम्मान करता है, जिन्होंने अनेक जन्मों की कठोर तपस्या से भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। व्रत और दिव्य युगल की उपासना से स्त्रियाँ वही अटूट भक्ति और अखंड सौभाग्य चाहती हैं जो पार्वती ने अर्जित किया।

हरियाली तीज के व्रत नियम

हरियाली तीज के व्रत नियम

हरियाली तीज का व्रत परंपरागत रूप से निर्जला होता है - सूर्योदय से अगली सुबह पूजा पूर्ण होने तक बिना अन्न और जल के, यद्यपि अनेक स्त्रियाँ स्वास्थ्य व पारिवारिक रीति अनुसार फलाहारी व्रत रखती हैं। 1. प्रातः स्नान के बाद संकल्प से आरंभ करें, भक्ति से व्रत रखने का निश्चय करते हुए। 2. दिनभर अन्न, नमक और पका भोजन त्यागें। 3. मेहंदी लगाएँ, हरे वस्त्र, चूड़ियाँ और पूर्ण सोलह श्रृंगार धारण करें। 4. संध्या को शिव-पार्वती की उपासना करें और व्रत कथा सुनें। 5. अगली सुबह पूजा के बाद व्रत खोलें, आदर्श रूप से पूजा में अर्पित भोजन से। गर्भवती स्त्रियाँ, अस्वस्थ और वृद्ध फलाहार व्रत रखें और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।

हरियाली तीज पूजा विधि

संध्या को शुभ मुहूर्त में पूजा करें: 1. पूजा स्थल स्वच्छ करें और शिव-पार्वती की मूर्ति या चित्र तैयार करें, अक्सर काली मिट्टी या रेत से बनी पार्वती की छोटी प्रतिमा के साथ। 2. देवताओं को लकड़ी के आसन पर स्थापित करें और देवी को हरे वस्त्र व चूड़ियाँ अर्पित करें। 3. घी का दीपक और धूप जलाएँ, और पुष्प, दूर्वा, बेल पत्र, फल व मिठाई अर्पित करें। 4. रोली, कुमकुम और चंदन लगाएँ, और पार्वती को सोलह श्रृंगार की वस्तुएँ अर्पित करें। 5. ॐ नमः शिवाय और पार्वती की प्रार्थनाओं का जप करें, फिर हरियाली तीज व्रत कथा पढ़ें या सुनें। 6. आरती से समापन करें, दीपक को दक्षिणावर्त घुमाएँ, और वैवाहिक सुख का आशीर्वाद माँगें। अनेक स्त्रियाँ मिलकर झूला झूलती, तीज गीत गाती और पर्व का आनंद साझा करती हैं।

हरियाली तीज व्रत कथा

कथा बताती है कि देवी पार्वती ने पूर्वजन्म में भगवान शिव से विवाह की कामना की और अनगिनत वर्षों तक उनके लिए कठोर तपस्या की, पत्तों पर और फिर बिना कुछ खाए जीवित रहीं। उनकी भक्ति से द्रवित होकर शिव ने अंततः उन्हें अपनी शाश्वत अर्धांगिनी स्वीकार किया। कहा जाता है कि सावन की तृतीया को शिव ने पार्वती को वरदान दिया कि जो स्त्री इस व्रत को सच्ची भक्ति से रखेगी उसे विवाह में वही सौभाग्य मिलेगा। इसीलिए यह दिन पुनर्मिलन और अखंड वैवाहिक प्रेम के पर्व रूप में स्मरण किया जाता है।

तीज व्रत रखने के लाभ

तीज व्रत रखने के लाभ

भक्त मानते हैं कि हरियाली तीज व्रत अखंड सौभाग्य, पति-पत्नी के बीच सामंजस्य व प्रेम, और पूरे परिवार के लिए शिव-पार्वती का आशीर्वाद लाता है। अविवाहित कन्याओं के लिए यह उपयुक्त व समर्पित जीवनसाथी हेतु रखा जाता है। आध्यात्मिक फलों के अतिरिक्त यह पर्व स्त्रियों में एकजुटता, वर्षा की समृद्धि के प्रति कृतज्ञता, और गीत, रंग व साझा भक्ति से भरा आनंदमय विराम पोषित करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाली तीज 2026 में कब है?+

हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया को पड़ती है, सावन के शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि, जो जुलाई या अगस्त के वर्षा मास में आती है। अपने शहर की सही तिथि व मुहूर्त वंदना पंचांग पर सुनिश्चित करें।

हरियाली तीज व्रत कौन रखता है?+

विवाहित स्त्रियाँ इसे अपने पतियों की दीर्घायु व कल्याण और वैवाहिक सुख के लिए रखती हैं। अविवाहित कन्याएँ भी अच्छे व समर्पित जीवनसाथी की प्रार्थना करते हुए इसे मनाती हैं।

क्या हरियाली तीज व्रत निर्जला होता है?+

परंपरागत रूप से हाँ, यह अगली सुबह पूजा पूर्ण होने तक बिना अन्न-जल के रखा जाता है। हालाँकि अनेक केवल फलाहार व्रत रखती हैं, और गर्भवती, अस्वस्थ या वृद्ध स्त्रियाँ स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।

तीज पर स्त्रियाँ हरा रंग क्यों पहनती हैं?+

हरा रंग वर्षा ऋतु की हरियाली, उर्वरता, नवजीवन और समृद्धि का प्रतीक है। हरे वस्त्र व चूड़ियाँ पहनना स्त्रियों को सावन की नवजीवन ऊर्जा और पर्व के आनंद से जोड़ता है।

हरियाली तीज पर किन देवताओं की पूजा होती है?+

भगवान शिव और देवी पार्वती की एक साथ पूजा होती है, क्योंकि यह पर्व उनके दिव्य मिलन का उत्सव है। स्त्रियाँ पार्वती को हरे वस्त्र व सोलह श्रृंगार अर्पित करती और ॐ नमः शिवाय का जप करती हैं।

हरियाली तीज हरतालिका तीज से कैसे भिन्न है?+

हरियाली तीज सावन में पड़ती है और झूलों व गीतों से अधिक उत्सवमय है, जबकि हरतालिका तीज बाद में भाद्रपद में पड़ती है और कठोर निर्जला व्रत है। दोनों शिव-पार्वती और विवाह बंधन का सम्मान करती हैं।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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