किसी व्यंजन को 'व्रत-अनुकूल' क्या बनाता है
व्यंजनों से पहले नियम समझ लें - 'व्रत भोजन' एक निश्चित मेन्यू नहीं, बल्कि स्वीकृत-अस्वीकृत सामग्रियों का समूह है।
स्वीकृत -
- कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा व सामा के आटे
- साबूदाना
- दूध, दही, पनीर, घी, खोया
- फल, आलू, शकरकंद, अरबी, कद्दू
- मूंगफली, मखाना, मेवे
- सेंधा नमक
- हरी/काली इलायची, जीरा, काली मिर्च, अदरक
अस्वीकृत -
- गेहूं, चावल, दालें
- साधारण नमक
- प्याज-लहसुन
- हरी पत्तेदार सब्जियाँ
सेंधा नमक ही क्यों - यह खनन से प्राप्त होता है, औद्योगिक शोधन से नहीं गुजरता, इसलिए सात्विक माना जाता है।
नीचे दिए सभी व्यंजन इसी सूची का पालन करते हैं - इसलिए 2026 के चारों सावन सोमवार (3, 10, 17, 24 अगस्त) हेतु बिना किसी बदलाव के उपयुक्त हैं।
1-3: साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू पूरी और सिंघाड़े का हलवा
1. साबूदाना खिचड़ी - पश्चिम-मध्य भारत का सर्वाधिक लोकप्रिय व्रत व्यंजन। भीगे साबूदाना को घी में भुनी मूंगफली, जीरा, हरी मिर्च व उबले आलू संग भूनें, नींबू-धनिया से सजाएं। साबूदाना सही समय (3-4 घंटे) भिगोना ही सफलता की कुंजी है।
2. कुट्टू की पूरी - कुट्टू आटे को उबले आलू व सेंधा नमक संग गूंधकर पूरी बेलें, तलें। आलू ही आटे को बांधे रखता है क्योंकि कुट्टू में ग्लूटेन नहीं होता।
3. सिंघाड़े का हलवा - सिंघाड़े के आटे को घी में सुनहरा भूनकर दूध/पानी व शक्कर संग मीठा करें, बादाम-इलायची से सजाएं। निर्जला व्रत तोड़ने हेतु विशेष लोकप्रिय।
तीनों 30 मिनट से कम में बनते हैं और हर रसोई में उपलब्ध सामग्री प्रयोग करते हैं। मात्रा घटाना-बढ़ाना भी आसान है, विधि वही रहती है।
4-6: सामा चावल खिचड़ी, राजगिरा पराठा और व्रत आलू जीरा
4. सामा चावल खिचड़ी - सामा (वरत के चावल) को घी, जीरा, आलू व धनिया संग सामान्य खिचड़ी जैसा पकाएं - दाल रहित, फिर भी संतोषजनक।
5. राजगिरा पराठा - राजगिरा आटे को उबले आलू, सेंधा नमक व घी संग गूंधें, प्लास्टिक शीट के बीच बेलें (आटा नाजुक होता है), तवे पर सेंकें।
6. व्रत आलू जीरा - उबले आलू को घी, जीरा, हरी मिर्च, अदरक व काली मिर्च संग तड़का दें, धनिया-नींबू से सजाएं। बिना प्याज-लहसुन-हल्दी के, यह लगभग हर सावन सोमवार थाली का हिस्सा है - 15 मिनट से कम में तैयार।
तीनों मिलकर एक पूर्ण थाली बनाते हैं - अनाज विकल्प, रोटी व सब्ज़ी - व्रत भोजन बचे-खुचे जैसा नहीं होना चाहिए।
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7-8: मखाना खीर और कद्दू की सब्ज़ी

7. मखाना खीर - मखाने को घी में कुरकुरा भूनकर फुल-फैट दूध, शक्कर, इलायची व मेवों संग पकाएं जब तक दूध गाढ़ा न हो जाए। संध्या व्रत खोलने हेतु लोकप्रिय - मखाना प्रोटीन का अच्छा स्रोत है।
8. कद्दू की सब्ज़ी - कद्दू को घी, जीरा, थोड़ी शक्कर व सेंधा नमक संग नरम होने तक पकाएं, अदरक-हरी मिर्च डालें। तली चीज़ों से हल्का व सुपाच्य - गर्म-उमस भरे सोमवार हेतु उपयुक्त।
छोटे बदलाव - उत्सव वाले सोमवार हेतु खीर में केसर मिलाएं, या कद्दू की सब्ज़ी में शक्कर की जगह गुड़ प्रयोग करें - चार सप्ताह एक जैसा न लगे।
दोनों व्यंजन विशेष 'व्रत-खरीदारी' की आवश्यकता नहीं रखते - दूध व कद्दू सामान्यतः घर में उपलब्ध रहते हैं।
9-10: शकरकंदी चाट और साबूदाना वड़ा
9. शकरकंदी चाट - उबले शकरकंद को सेंधा नमक, भुना जीरा पाउडर, काली मिर्च, नींबू व धनिया संग मिलाएं - बिना लहसुन/हींग वाली चटनी के। ठंडा खाया जाता है, नाश्ते हेतु उपयुक्त।
10. साबूदाना वड़ा - भीगे साबूदाना को मसले आलू, भुनी मूंगफली, हरी मिर्च, अदरक व धनिया संग मिलाकर टिक्की बनाएं, तलें - बाहर कुरकुरा, अंदर नरम। खिचड़ी का ही कुरकुरा, नाश्ते-योग्य रूप।
पहले से तैयारी - वड़ा मिश्रण फ्रिज में कुछ घंटे टिकता है, पूजा से ठीक पहले तल सकते हैं। चाट खाने से ठीक पहले ही मिलाएं ताकि शकरकंद पानी न छोड़े।
दोनों थाली में बनावट की विविधता जोड़ते हैं - एक खट्टा-ताज़ा, दूसरा कुरकुरा - जो थाली को दूसरे-तीसरे सोमवार तक भी दिलचस्प बनाए रखता है।
चारों सोमवार हेतु पूर्ण सावन सोमवार थाली की योजना
दस व्यंजनों के साथ, सबसे सरल तरीका है चारों 2026 सोमवारों हेतु घूमती थाली बनाना, हर सप्ताह वही दो-तीन व्यंजन दोहराने के बजाय।
सरल चार-सप्ताह योजना -
- 3 अगस्त: साबूदाना खिचड़ी + व्रत आलू जीरा + मखाना खीर
- 10 अगस्त: कुट्टू पूरी + कद्दू सब्ज़ी + शकरकंदी चाट (नाश्ता)
- 17 अगस्त: सामा खिचड़ी + दही संग राजगिरा पराठा + सिंघाड़े का हलवा
- 24 अगस्त: साबूदाना वड़ा + व्रत आलू जीरा + मखाना खीर
व्यावहारिक सुझाव -
- सुबह जल्दी भोजन हो तो साबूदाना रात पहले भिगोएं
- सेंधा नमक, कुट्टू-सिंघाड़ा-राजगिरा आटा व साबूदाना सावन से पहले ही स्टॉक करें
- अधिकांश व्यंजन एक बार के भोजन हेतु हैं - आवश्यक मात्रा में ही बनाएं
- भिन्न कठोरता के व्रत रखने वालों संग भी ये दसों व्यंजन उपयुक्त रहते हैं
भक्तों के सामान्य प्रश्न
क्या सावन सोमवार व्रत में चावल या गेहूं खा सकते हैं?+
नहीं - दोनों अनाज माने जाते हैं और पारंपरिक सावन सोमवार व्रत में वर्जित हैं। इनके स्थान पर सामा, कुट्टू, सिंघाड़ा व राजगिरा आटे प्रयोग होते हैं।
क्या सेंधा नमक अनिवार्य है, या थोड़ी मात्रा में साधारण नमक चल सकता है?+
सेंधा नमक ही परंपरागत रूप से स्वीकृत है, क्योंकि इसे कम संसाधित व सात्विक माना जाता है। साधारण नमक व्रत दिवस पूरी तरह वर्जित है, केवल कम नहीं।
सावन सोमवार व्रत में कितनी बार भोजन करना चाहिए?+
अधिकांश परिवार संध्या पूजा के बाद एक मुख्य भोजन लेते हैं, दिनभर फल-दूध-मेवे लेने की छूट उनके लिए जो निर्जला व्रत नहीं रख रहे।
क्या इन व्यंजनों को कम घी या बिना तेल के बनाया जा सकता है?+
हाँ - अधिकांश व्यंजनों में घी कम या हल्के तेल से बदला जा सकता है, बिना किसी व्रत नियम को तोड़े, क्योंकि प्रतिबंध सामग्री के प्रकार पर है, मात्रा पर नहीं।
मधुमेह रोगी सावन सोमवार व्रत में क्या खा सकते हैं?+
नमकीन विकल्पों को प्राथमिकता दें - व्रत आलू जीरा, कद्दू सब्ज़ी, छोटी मात्रा में साबूदाना खिचड़ी - हलवा-खीर के बजाय। दिनभर भोजन बांटने हेतु डॉक्टर से सलाह लें।
क्या ये व्यंजन एकादशी या नवरात्रि व्रत हेतु भी उपयुक्त हैं?+
अधिकांश हाँ - साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू पूरी व मखाना खीर एकादशी व नवरात्रि व्रत में भी सामान्य हैं। कुछ नवरात्रि परंपराएं अधिक कठोर हो सकती हैं, अपने परिवार के नियम अवश्य जांचें।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
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