क्या और कब
शाकंभरी नवरात्रि देवी के शाकंभरी स्वरूप को समर्पित नौ दिनों की उपासना है, जो परंपरा के अनुसार समस्त जीवों को वनस्पति, फल और शाक द्वारा पोषण देती हैं। यह हिंदू पौष मास (दिसंबर-जनवरी) में आती है, और मास की पूर्णिमा, अर्थात शाकंभरी पूर्णिमा पर संपन्न होती है।
भक्तजन शाकंभरी नाम का भाव 'शाक धारण करने वाली' मानते हैं, देवी का यह स्वरूप उनके पोषणकारी, जीवनदायी करुणा हेतु पूजा जाता है, न कि उनके रौद्र स्वरूप हेतु।
कथा और उत्पत्ति
देवी भागवत और मार्कण्डेय पुराण में एक गंभीर अनावृष्टि और अकाल के काल का वर्णन है, जब धरती सूख गई थी और जीव अत्यंत कष्ट में थे। भक्तों का विश्वास है कि करुणा से प्रेरित होकर देवी ने शाकंभरी स्वरूप प्रकट किया और अपने ही शरीर से शाक-फल उत्पन्न कर वर्षों तक संपूर्ण सृष्टि का पोषण किया, जब तक वर्षा पुनः न लौटी।
यह कथा इस बात का सशक्त स्मरण है कि मातृ-शक्ति की करुणा जीवन की सबसे मूलभूत आवश्यकता, अन्न और पोषण तक फैली है, और देवी की पूजा केवल संकट से रक्षा हेतु नहीं बल्कि जीवन के पोषण हेतु भी होती है।
रीति और विधि
शाकंभरी नवरात्रि मनाने वाले भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, प्रायः अन्न से परहेज करते हुए और देवी के स्वरूप के सम्मान में केवल फल-शाक ग्रहण करते हैं।
- दैनिक पूजा में देवी को ताजे फल, सब्जियाँ और पत्तेदार साग अर्पित किए जाते हैं
- भक्त देवी के नामों का जाप और शाकंभरी कथा वर्णित शास्त्रों के श्लोकों का पाठ करते हैं
- शाकंभरी पूर्णिमा पर, विशेषतः इस देवी-स्वरूप से जुड़े मंदिरों में, विस्तृत पूजाएँ की जाती हैं
- इस अवधि में अन्न और सब्जियों का दान विशेष पुण्यकारी माना जाता है
क्षेत्रीय रंग

शाकंभरी देवी के प्रमुख मंदिर राजस्थान तथा उत्तर भारत की शिवालिक पहाड़ियों के निकट देवी के इस स्वरूप से जुड़े हैं, और विशेष रूप से इस नवरात्रि में भक्तों को आकर्षित करते हैं।
उत्तर भारत भर में यह उपासना मुख्यतः समर्पित भक्तों और शाकंभरी देवी से व्यक्तिगत जुड़ाव रखने वाले परिवारों द्वारा की जाती है, जिससे यह देवी-भक्ति के व्यापक कैलेंडर का एक शांत परंतु गहन अर्थपूर्ण भाग बन जाती है।
मंत्र और सार
भक्त शाकंभरी देवी को उस अन्न और पोषण हेतु कृतज्ञता से प्रणाम करते हैं जो वे प्रदान करती हैं, ऐसा माना जाता है, अक्सर 'जय शाकंभरी माँ' जैसे सरल आह्वान के साथ फल-शाक अर्पित करते हुए।
शाकंभरी नवरात्रि यह सिखाती है कि दिव्य माता की कृपा भोजन जैसी साधारण और आवश्यक वस्तु में भी विद्यमान है, और दैनिक पोषण हेतु कृतज्ञता स्वयं में पूजा का एक रूप है। समस्त भक्ति की भाँति, यह स्मरण कराता है कि आस्था हृदय का अर्पण है, लेन-देन नहीं।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
शाकंभरी का क्या अर्थ है?+
भक्तजन शाकंभरी का अर्थ 'शाक धारण करने वाली' मानते हैं, देवी का यह स्वरूप वनस्पति और फलों द्वारा जीवन के पोषण हेतु पूजा जाता है।
शाकंभरी नवरात्रि कब मनाई जाती है?+
शाकंभरी नवरात्रि हिंदू पौष मास में मनाई जाती है, और मास की पूर्णिमा, शाकंभरी पूर्णिमा पर संपन्न होती है।
शाकंभरी देवी की कथा क्या है?+
परंपरा के अनुसार एक गंभीर अकाल के समय देवी ने शाकंभरी स्वरूप प्रकट किया और वर्षा लौटने तक शाक-फल द्वारा संपूर्ण सृष्टि का पोषण किया।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
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