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शांति पाठ: ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः और असतो मा - शांति प्रार्थनाएँ
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शांति पाठ: ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः और असतो मा - शांति प्रार्थनाएँ

7 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 24, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

शांति पाठ क्या है?

शांति पाठ (शांति प्रार्थना) समस्त हिंदू प्रार्थनाओं में सबसे प्रिय में से एक है क्योंकि यह केवल अपने लिए कुछ नहीं माँगती - यह हर प्राणी के सुख और कल्याण के लिए प्रार्थना करती है। उपनिषदों से ली गई यह सनातन धर्म का हृदय व्यक्त करती है: कि समस्त जीवन एक परिवार है (वसुधैव कुटुम्बकम्)।

ये श्लोक पूजा, यज्ञ, कक्षाओं और सभाओं के आरंभ तथा समापन पर जपे जाते हैं, और 'ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः' से समाप्त होते हैं - शांति का तीन बार आह्वान, शरीर, मन और संसार में शांति के लिए। शांति पाठ जपना हृदय को स्वयं से परे विस्तृत करना और समस्त सृष्टि को आशीर्वाद देना है।

शांति प्रार्थनाएँ - श्लोक, लिप्यंतरण और अर्थ

1. ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः:

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।

अर्थ: सब सुखी हों, सब निरोग हों, सब शुभ का दर्शन करें, कोई दुःख का भागी न हो। ॐ शांति, शांति, शांति।

2. असतो मा सद्गमय (बृहदारण्यक उपनिषद से):

ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

ॐ असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।

अर्थ: मुझे असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरत्व की ओर ले चलें। ॐ शांति, शांति, शांति। यह आंतरिक सत्य, ज्ञान और अमर आत्मा की प्रार्थना है।

शांति पाठ कब और कैसे जपें

  • पूजा के आरंभ और अंत में: परंपरागत रूप से शांति पाठ पूजा, प्रार्थना और अध्ययन का आरंभ तथा समापन करता है, उन्हें सार्वभौमिक शांति को समर्पित करते हुए।
  • सुबह या संध्या: यह एक सुंदर दैनिक प्रार्थना है - दिन को आशीर्वाद देने के लिए सुबह एक बार जपें, या शांति में समाप्त करने के लिए संध्या में।
  • सभाओं में: यह सामुदायिक आयोजनों, कक्षाओं और सत्संगों के अंत में पढ़ी जाती है ताकि सब सद्भावना के साथ घर लौटें।
  • धीरे और स्पष्ट जपें: हर शब्द का ध्यान रखें; अंत में तीनों 'शान्तिः' को धीमा और शांत रहने दें।
  • अर्थ को महसूस करें: जपते समय सच्चे मन से सभी प्राणियों के सुख की कामना करें - परिवार, अजनबी, यहाँ तक कि जो आपको कष्ट देते हैं। वही भावना इस प्रार्थना की असली शक्ति है।

लाभ और आंतरिक अर्थ

लाभ और आंतरिक अर्थ
  • विस्तृत, करुण हृदय: सभी प्राणियों के लिए प्रार्थना स्वार्थ और द्वेष को घोल देती है, उनके स्थान पर सद्भावना लाती है।
  • आंतरिक शांति: 'शान्तिः' को तीन बार दोहराना शरीर, मन और परिवेश को शांति में बसाता है।
  • उच्च लक्ष्य: असतो मा मन को सत्य, ज्ञान और शाश्वत आत्मा की ओर मोड़ता है, उसे क्षुद्र चिंताओं से ऊपर उठाता है।
  • हर कार्य पर आशीर्वाद: शांति पाठ से कार्य, अध्ययन या पूजा आरंभ करना उसे सबके भले को समर्पित करता है।
  • एकता: यह उस मूल सत्य को व्यक्त करता है कि समस्त जीवन एक परिवार है, करुणा से भेद को भरता है।

शांति पाठ छोटा, सरल और गहराई से प्रभावित करने वाला है। दैनिक आदत बनाने पर यह हृदय को कोमलता से शांति और समस्त संसार की देखभाल की ओर ढालता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः का अर्थ क्या है?+

इसका अर्थ है 'सब सुखी हों, सब निरोग हों, सब शुभ का दर्शन करें, कोई दुःख का भागी न हो।' यह हर प्राणी के कल्याण की सार्वभौमिक प्रार्थना है, जो 'ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः' से समाप्त होती है।

असतो मा सद्गमय का अर्थ क्या है?+

बृहदारण्यक उपनिषद से, यह प्रार्थना करता है 'मुझे असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमरत्व की ओर ले चलें।' यह आंतरिक सत्य, ज्ञान और अमर आत्मा की प्रार्थना है।

'शान्तिः' तीन बार क्यों जपा जाता है?+

तीन बार का 'ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः' तीन स्तरों पर शांति का आह्वान करता है - अपने भीतर (शरीर और मन), अपने परिवेश में, और विस्तृत संसार या अदृश्य शक्तियों में - यह प्रार्थना करते हुए कि भीतर या बाहर की शांति को कुछ भंग न करे।

शांति पाठ कब जपना चाहिए?+

यह परंपरागत रूप से पूजा, अध्ययन और सभाओं के आरंभ तथा समापन पर जपा जाता है, परंतु यह दैनिक प्रातः या संध्या प्रार्थना भी हो सकती है। जब भी आप दिन और सभी प्राणियों को आशीर्वाद देना चाहें, यह उपयुक्त है।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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