सीता अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
अष्टोत्तर शतनामावली किसी देवता के 108 नामों की माला है, हर नाम एक गुण, स्वरूप या महिमा की स्तुति करता है। सीता अष्टोत्तर शतनामावली माता सीता के 108 नाम गाती है, जो भगवान राम की पत्नी और भक्ति, पवित्रता तथा धैर्य की आदर्श हैं।
राजा जनक की पुत्री रूप में जन्मी और पृथ्वी की कूँड़ में मिलीं, सीता महालक्ष्मी के स्वरूप और धरती माता की अपनी संतान रूप में पूजी जाती हैं। उनके नामों का पाठ सुखी गृहस्थी, निष्ठावान प्रेम और आंतरिक शक्ति के लिए उनकी कृपा का आह्वान है।
नीचे अर्थ सहित इन नामों का एक प्रतिनिधि चयन है (108 की पूर्ण सूची नहीं)।
चयनित नाम (भाग 1)
108 नामों में से अर्थ सहित एक चयन:
1. सीता (Sita) - पृथ्वी की कूँड़ में मिलीं 2. जानकी (Janaki) - राजा जनक की पुत्री 3. वैदेही (Vaidehi) - विदेह राज्य की राजकुमारी 4. मैथिली (Maithili) - मिथिला की राजकुमारी 5. रामप्रिया (Rama-priya) - राम की प्रिया 6. भूमिजा (Bhumija) - भूमि, धरती माता की पुत्री 7. रमा (Rama) - महालक्ष्मी का स्वरूप 8. पद्माक्षी (Padmakshi) - कमल के समान नेत्रों वाली 9. जनकात्मजा (Janakatmaja) - जनक की आत्मजा पुत्री 10. रघुवंशप्रिया (Raghuvansha-priya) - रघुवंश को प्रिय 11. पतिव्रता (Pativrata) - परम पतिव्रता 12. साध्वी (Sadhvi) - पवित्र और सद्गुणी 13. शुभा (Shubha) - शुभ 14. कमला (Kamala) - कमल, लक्ष्मी का एक नाम
चयनित नाम (भाग 2)
108 नामों में से चयन जारी:
15. देवी (Devi) - तेजोमयी देवी 16. लक्ष्मीस्वरूपिणी (Lakshmi-swarupini) - जो स्वयं लक्ष्मी का स्वरूप हैं 17. सर्वमंगला (Sarvamangala) - जो समस्त शुभ प्रदान करती हैं 18. क्षमा (Kshama) - क्षमा और धैर्य की मूर्ति 19. धैर्यशीला (Dhairyashila) - स्थिर और साहसी 20. सती (Sati) - पवित्र और समर्पित 21. रघुनाथप्रिया (Raghunatha-priya) - रघुनाथ (राम) की प्रिया 22. अयोध्यावासिनी (Ayodhya-vasini) - अयोध्या में निवास करने वाली 23. वनवासिनी (Vanavasini) - जो वन में रहीं 24. करुणामयी (Karunamayi) - करुणा से परिपूर्ण 25. त्रिलोकजननी (Triloka-janani) - तीनों लोकों की जननी 26. पवित्रा (Pavitra) - सदा पवित्र 27. शान्ता (Shanta) - शांत 28. भक्तप्रिया (Bhakta-priya) - भक्तों को प्रिय
ये नाम ॐ ... नमः (जैसे ॐ सीतायै नमः) रूप में कोमलता से पढ़े जाते हैं, स्मरण की एक प्रेममयी माला बनाते हुए।
महत्व, लाभ और पाठ विधि

महत्व: 108 नामों में से हर एक सीता का एक पक्ष प्रकट करता है - जनक की पुत्री, धरती की संतान, लक्ष्मी का स्वरूप, धैर्य और भक्ति की आदर्श। इनका पाठ उनके सद्गुण और कृपा पर ध्यान है।
लाभ (भक्ति-मान्यताएँ):
- सुखी, सामंजस्यपूर्ण दांपत्य जीवन का आशीर्वाद
- कठिनाई में शक्ति, धैर्य और गरिमा, जैसी सीता ने दिखाई
- समृद्धि और शांत गृहस्थी के लिए लक्ष्मी की कृपा
- श्रद्धा, पवित्रता और भक्ति की गहराई
पाठ कैसे करें: 1. स्नान कर सीता-राम के चित्र के समक्ष घी के दीप, पुष्प और तुलसी सहित बैठें। 2. नामों को ॐ ... नमः रूप में पढ़ें, श्रेष्ठ है राम के नाम (सीता-राम) के साथ। 3. सीता नवमी (जानकी जयंती) और राम नवमी सबसे शुभ दिन हैं; मंगलवार और चैत्र माह भी प्रिय हैं। 4. राम रक्षा स्तोत्रम् या सीता-राम भजन और आरती से समापन करें।
यह एक प्रतिनिधि चयन है; पूर्ण अष्टोत्तर शतनामावली में सभी 108 नाम क्रम में होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सीता अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?+
यह माता सीता के 108 पवित्र नामों की माला है, जो भगवान राम की पत्नी हैं, हर नाम उनके किसी गुण, स्वरूप या महिमा की स्तुति करता है। इन्हें 'ॐ ... नमः' रूप में पढ़ना उनके पूजन का ध्यानमय तरीका है।
सीता को जानकी और वैदेही क्यों कहा जाता है?+
उन्हें जानकी राजा जनक की पुत्री रूप में, वैदेही विदेह राज्य की राजकुमारी रूप में, और मैथिली मिथिला की राजकुमारी रूप में कहा जाता है। सीता नाम का अर्थ ही 'कूँड़' है, क्योंकि वे जनक को पृथ्वी में मिलीं।
सीता के 108 नाम पढ़ने का सर्वोत्तम दिन कौन सा है?+
सीता नवमी (जानकी जयंती) और राम नवमी सबसे शुभ हैं। मंगलवार और चैत्र माह भी प्रिय हैं। इन्हें राम के नाम के साथ, सीता-राम रूप में पढ़ना विशेष प्रिय है।
सीता के नाम पढ़ने के लाभ क्या हैं?+
भक्त मानते हैं कि यह सुखी दांपत्य का आशीर्वाद देता है, कठिनाई में धैर्य और गरिमा लाता है, और शांत, समृद्ध गृहस्थी के लिए लक्ष्मी की कृपा का आह्वान करता है। ये श्रद्धा और आंतरिक शक्ति पोषित करने वाली भक्ति-मान्यताएँ हैं।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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