देवता - भगवान रंगनाथ
प्रमुख देवता भगवान विष्णु हैं, जिनकी पूजा रंगनाथ रूप में होती है, जो महान सर्प आदिशेष पर शांत शयन मुद्रा (अनंत-शयन) में दर्शाए जाते हैं। यह रूप ब्रह्मांडीय सागर पर विश्राम करते और पूर्ण शांति में जगत का धारण करते प्रभु को दर्शाता है। उनके साथ उनकी पत्नी रंगनायकी (लक्ष्मी) हैं, और उस विशाल, शांत मूर्ति का दर्शन गहराई से आशीर्वादक व मुक्तिदायक माना जाता है।
स्थान और सबसे बड़ा मंदिर
श्रीरंगम तमिलनाडु में तिरुचिरापल्ली (त्रिची) के समीप कावेरी नदी पर एक द्वीप-नगर है। यह मंदिर विश्व का सबसे बड़ा कार्यरत हिंदू मंदिर है, जो सात संकेंद्रित परिसरों (प्राकारम) और इक्कीस ऊँचे गोपुरमों वाले विशाल परिसर में फैला है। दक्षिणी राजगोपुरम एशिया के सबसे ऊँचे मंदिर शिखरों में से एक है। यह 108 दिव्य देशम में पहला और अग्रणी है, जो आळवार संतों द्वारा प्रशंसित विष्णु के पवित्र धाम हैं।
इतिहास और कथा
मंदिर का उद्गम प्राचीन है, रामायण परंपरा बताती है कि भगवान राम ने रंगनाथ की यही मूर्ति विभीषण को दी, जो इसे लंका ले जा रहे थे। कावेरी तट पर रखने पर मूर्ति वहीं स्थिर हो गई, और श्रीरंगम को अपना शाश्वत धाम चुना। सदियों में चोल, पांड्य, होयसल और विजयनगर शासकों ने मंदिर का विस्तार किया, और महान वैष्णव आचार्य श्री रामानुज यहाँ रहे व उपदेश दिया, जिससे इसकी समृद्ध परंपरा गढ़ी गई।
श्रीरंगम को क्या विशेष बनाता है

अपने विशाल आकार से परे, श्रीरंगम श्री वैष्णव दर्शन के जीवंत केंद्र और रामानुज की विशिष्टाद्वैत शिक्षा के स्थान रूप में विशेष है। मंदिर में प्रसिद्ध सहस्र-स्तंभ मंडप और विजयनगर-कालीन उत्कृष्ट मूर्तिशिल्प हैं। माना जाता है कि श्री रामानुज का शरीर यहाँ एक मंदिर में संरक्षित है। तीर्थयात्री शयनरत प्रभु के एक सच्चे दर्शन को अनगिनत तीर्थों का पुण्य देने वाला मानते हैं।
दर्शन और समय संबंधी सुझाव
मंदिर सामान्यतः लगभग 6 बजे खुलता है और दोपहर के विराम के साथ दिनभर खुला रहता है, संध्या में पुनः खुलकर रात्रि तक। परिसर विशाल है, इसलिए प्राकारमों में चलने हेतु कई घंटे और अच्छे जूते (प्रवेश पर छोड़े गए) रखें। वैकुंठ एकादशी पर अपार भीड़ होती है; शांत दर्शन हेतु सामान्य सप्ताह-दिवस के प्रातःकाल चुनें और पहुँचने पर दैनिक पूजा समय-सारणी देख लें।
रंगनाथ मंत्र
भक्त प्रभु की पूजा महान विष्णु मंत्र से करते हैं:
ॐ नमो नारायणाय
अनेक लोग रंगनाथ के समक्ष ॐ नमो भगवते वासुदेवाय और आळवारों के छंद (दिव्य प्रबंधम) भी जपते हैं। समर्पण (शरणागति) के साथ इन नामों का पाठ श्री वैष्णव भक्ति का हृदय है और आत्मा को मुक्ति की ओर ले जाता माना जाता है।
पर्व और वैकुंठ एकादशी

मंदिर का सबसे प्रसिद्ध पर्व वैकुंठ एकादशी है, तमिल मास मार्गशी (दिसंबर-जनवरी) में, जब परमपद वासल (स्वर्ग का द्वार) खोला जाता है और भक्त उससे होकर निकलते हैं, यह मानते हुए कि यह विष्णु के धाम में प्रवेश देता है। इक्कीस-दिवसीय वैकुंठ एकादशी उत्सवम, राम नवमी और ब्रह्मोत्सवम समारोह विशाल भीड़ आकर्षित करते और मंदिर को संगीत, शोभायात्राओं व भक्ति से भर देते हैं।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
भगवान रंगनाथ कौन हैं?+
रंगनाथ सर्प आदिशेष पर शयन मुद्रा में भगवान विष्णु हैं, जो ब्रह्मांडीय सागर पर विश्राम करते और जगत का धारण करते हैं। श्रीरंगम में उनकी पूजा पत्नी रंगनायकी के साथ होती है।
क्या श्रीरंगम सबसे बड़ा मंदिर है?+
हाँ। श्रीरंगम विश्व का सबसे बड़ा कार्यरत हिंदू मंदिर है, जिसमें सात संकेंद्रित प्राकारम और इक्कीस गोपुरम हैं। इसका दक्षिणी राजगोपुरम एशिया के सबसे ऊँचे मंदिर शिखरों में से एक है।
रामायण से क्या संबंध है?+
परंपरा कहती है कि भगवान राम ने रंगनाथ मूर्ति विभीषण को दी, जो इसे लंका ले जा रहे थे। कावेरी तट पर रखने पर मूर्ति वहीं स्थिर हो गई, और श्रीरंगम को अपना शाश्वत धाम चुना।
श्रीरंगम में वैकुंठ एकादशी क्या है?+
वैकुंठ एकादशी, तमिल मास मार्गशी में, मंदिर का सबसे प्रसिद्ध पर्व है। परमपद वासल (स्वर्ग का द्वार) खोला जाता है और भक्त उससे होकर निकलते हैं, यह मानते हुए कि यह विष्णु के धाम में प्रवेश देता है।
श्री रामानुज कौन थे और श्रीरंगम से उनका संबंध?+
श्री रामानुज महान वैष्णव आचार्य थे जिन्होंने विशिष्टाद्वैत की शिक्षा दी। वे श्रीरंगम में रहे व उपदेश दिया, इसकी श्री वैष्णव परंपरा गढ़ी, और माना जाता है कि उनका शरीर यहाँ एक मंदिर में संरक्षित है।
रंगनाथ के लिए कौन सा मंत्र जपा जाता है?+
भक्त 'ॐ नमो नारायणाय' और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करते हैं। आळवारों के छंद (दिव्य प्रबंधम) भी रंगनाथ के समक्ष समर्पण से पढ़े जाते हैं।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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