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कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर - महत्व और दर्शन
Pilgrimage

कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर - महत्व और दर्शन

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 4, 2026
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By Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

Reviewed by Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

देवी महालक्ष्मी (अंबाबाई)

प्रमुख देवी देवी महालक्ष्मी हैं, जिन्हें स्नेह से अंबाबाई कहा जाता है, जो धन, कल्याण और कृपा प्रदान करने वाली दिव्य माता का रूप हैं। उनकी काले पत्थर की मूर्ति लगभग तीन फुट ऊँची है, मुकुट व समृद्ध आभूषणों से सुसज्जित, अपनी शक्ति के प्रतीक धारण किए। यहाँ लक्ष्मी की पूजा केवल समृद्धि की देवी रूप में नहीं, बल्कि परम आदि शक्ति, जगत की माता रूप में भी होती है।

स्थान और शक्ति पीठ का दर्जा

मंदिर दक्षिणी महाराष्ट्र के कोल्हापुर के हृदय में स्थित है, जो जटिल पत्थर की नक्काशी वाली हेमाडपंथी शैली में बना है। यह शक्ति पीठों में से एक माना जाता है, वे पवित्र स्थान जहाँ देवी सती के अंग गिरे माने जाते हैं। कोल्हापुर रेल व सड़क से अच्छी तरह जुड़ा है, इसका अपना हवाई अड्डा है, और भाग्य की देवी का आशीर्वाद चाहने वाले भक्त समूचे भारत से यहाँ आते हैं।

इतिहास और कथा

मंदिर का उद्गम लगभग 7वीं शताब्दी के चालुक्य काल से जोड़ा जाता है, बाद में शिलाहार व मराठा शासकों ने इसमें वृद्धि की। एक लोकप्रिय कथा कहती है कि भगवान विष्णु के दक्षिण प्रस्थान के बाद महालक्ष्मी ने कोल्हापुर (करवीर) को अपना स्थायी निवास बनाया, इसीलिए उन्हें तिरुपति के विष्णु से जुड़े पत्नी रूप में भी देखा जाता है। सदियों से वे इस क्षेत्र की संरक्षक देवी और समृद्धिदात्री रूप में पूजित हैं।

किरणोत्सव - सूर्य किरणों का पर्व

किरणोत्सव - सूर्य किरणों का पर्व

सबसे असाधारण विशेषता किरणोत्सव है, जब डूबते सूर्य की किरणें मंदिर के पश्चिमी द्वारों से होकर सीधे देवी की मूर्ति पर पड़ती हैं। यह प्रत्येक वर्ष लगभग जनवरी अंत और नवंबर में कुछ दिनों तक होता है, जब सूर्य, द्वार और गर्भगृह पूर्ण रूप से एक रेखा में आ जाते हैं। इसे प्राचीन मंदिर स्थापत्य का अद्भुत चमत्कार और वह शुभ क्षण माना जाता है जब सूर्य स्वयं माता को नमन करते हैं।

दर्शन और समय संबंधी सुझाव

मंदिर सामान्यतः सुबह लगभग 5 बजे काकड़ आरती के साथ खुलता है, और दिनभर अनेक आरतियों के साथ रात्रि की शेज आरती तक खुला रहता है। शुक्रवार, मंगलवार, पूर्णिमा और नवरात्रि में अत्यधिक भीड़ होती है। शांत दर्शन हेतु सप्ताह के किसी दिन प्रातःकाल जाने की योजना बनाएँ, और यदि उस दुर्लभ आयोजन को देखना चाहें तो किरणोत्सव की तिथियाँ पहले से देख लें।

महालक्ष्मी मंत्र

भक्त देवी की पूजा लक्ष्मी मंत्र से करते हैं:

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

महालक्ष्मी अष्टकम और लक्ष्मी आरती भी उनके समक्ष गाई जाती है। शुक्रवार को घी का दीपक तथा मिठाई व पुष्प अर्पित कर जप समृद्धि, सामंजस्य और अंबाबाई का आशीर्वाद लाता माना जाता है।

कोल्हापुर के पर्व

कोल्हापुर के पर्व

नवरात्रि बड़ी भव्यता से मनाई जाती है, देवी को प्रतिदिन भिन्न रूपों में सजाया जाता है और नगर में भव्य शोभायात्राएँ निकलती हैं। किरणोत्सव, दीवाली (लक्ष्मी पूजा), गुड़ी पड़वा और देवी के विशेष पालकी उत्सव विशाल जनसमूह आकर्षित करते हैं। इन समयों में मंदिर और समूचा कोल्हापुर नगर दीपों, संगीत व भक्ति से जगमगाते हैं।

भक्तों के सामान्य प्रश्न

कोल्हापुर मंदिर की देवी कौन हैं?+

प्रमुख देवी देवी महालक्ष्मी हैं, जिन्हें स्नेह से अंबाबाई कहा जाता है। उनकी पूजा धन व कल्याण की देवी और परम आदि शक्ति, जगत की माता रूप में होती है।

किरणोत्सव क्या है?+

किरणोत्सव वह पर्व है जब डूबते सूर्य की किरणें पश्चिमी द्वारों से होकर सीधे देवी की मूर्ति पर पड़ती हैं। यह जनवरी अंत और नवंबर के लगभग कुछ दिनों होता है जब सूर्य व गर्भगृह एक रेखा में आते हैं।

क्या कोल्हापुर महालक्ष्मी एक शक्ति पीठ है?+

हाँ। यह मंदिर शक्ति पीठों में से एक माना जाता है, वे पवित्र स्थान जहाँ देवी सती के अंग गिरे माने जाते हैं, जो इसे दिव्य माता का शक्तिशाली स्थान बनाता है।

कोल्हापुर महालक्ष्मी मंदिर कहाँ है?+

यह दक्षिणी महाराष्ट्र के कोल्हापुर के हृदय में, हेमाडपंथी शैली में बना है। कोल्हापुर रेल, सड़क से अच्छी तरह जुड़ा है और इसका अपना हवाई अड्डा है।

महालक्ष्मी के लिए कौन सा मंत्र जपा जाता है?+

प्रचलित मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' है। भक्त महालक्ष्मी अष्टकम और लक्ष्मी आरती भी गाते हैं, विशेषकर शुक्रवार को।

दर्शन का सर्वोत्तम समय कब है?+

सप्ताह के दिनों में प्रातःकाल सबसे शांत होता है। नवरात्रि और दीवाली सबसे जीवंत किंतु भीड़भाड़ वाले हैं। यदि मूर्ति पर सूर्य किरणें देखना चाहें तो किरणोत्सव तिथियाँ पहले देख लें।

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About the author

Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

Pandit Ravindra is the Vandnaa editorial team's resident specialist on aarti, chalisa, and daily devotion. He has performed home and temple pujas across Varanasi and Delhi for over two decades and contributes the bhakti-focused articles on this site.

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