सूर्य अष्टोत्तर क्या है
सूर्य अष्टोत्तर शतनामावली सूर्य देव के 108 नामों की पवित्र सूची है, जो प्रकाश, जीवन, ऊर्जा और उत्तम स्वास्थ्य के स्रोत सूर्य देवता हैं। प्रत्येक नाम सूर्य के किसी गुण या रूप की स्तुति करता है, तेजोमय आदित्य से लेकर सर्व-प्रकाशक भास्कर तक। इन नामों को सूर्योदय पर जपना, आदर्श रूप से पूर्व की ओर मुख कर अर्घ्य (जल) अर्पित करते हुए, एक देदीप्यमान दैनिक भक्ति है जो शरीर, मन और आत्मा को उगते सूर्य से जोड़ती है।
108 क्यों पवित्र है
संख्या 108 गहरा अर्थ रखती है, और इसका सूर्य से विशेष संबंध है। सूर्य का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग 108 गुना है, और पृथ्वी से सूर्य की दूरी लगभग 108 सूर्य-व्यास है। परंपरा में 9 ग्रह गुणा 12 राशियाँ बराबर 108, और जप माला में 108 मनके होते हैं। इस प्रकार सूर्य के 108 नामों का जप प्रकाश और कृतज्ञता का अत्यंत उपयुक्त पूर्ण चक्र है।
अष्टोत्तर कैसे जपें
प्रत्येक नाम परंपरागत रूप से ॐ आदित्याय नमः के रूप में जपा जाता है, ॐ पहले और नमः बाद में। दैनिक विधि हेतु: 1. प्रातः शीघ्र उठें, स्नान करें, और सूर्योदय पर पूर्व की ओर मुख कर खड़े हों। 2. ताम्र पात्र से सूर्य की ओर जल गिराकर अर्घ्य अर्पित करें। 3. गिरते जल के बीच प्रकाश देखते हुए 108 नामों का धीरे उच्चारण करें। 4. ॐ सूर्याय नमः और गायत्री या सूर्य मंत्र से समापन करें। प्रेम से कुछ नामों सहित अर्घ्य का दैनिक अर्पण भी अत्यंत शुभ है।
मुख्य नामों और अर्थों का चयन

यहाँ 108 में से कुछ प्रिय नामों का प्रतिनिधि चयन है: आदित्य (आदित्याय) - अदिति के पुत्र, तेजोमय। भास्कर (भास्कराय) - प्रकाश के रचयिता। सूर्य (सूर्याय) - परम दाता और प्रेरक। रवि (रवये) - जो स्तुत हैं और दिन लाते हैं। मार्तंड (मार्तंडाय) - ब्रह्मांड-अंड से जन्मे, जीवनदाता। मित्र (मित्राय) - सभी प्राणियों के मित्र। सवितृ - दिव्य प्रेरक जो समस्त जीवन को जगाते हैं।
और तेजोमय नाम
कुछ और प्रिय नाम और उनके अर्थ: भानु - प्रकाशमान। दिवाकर - दिन के रचयिता। प्रभाकर - तेज और प्रकाश के दाता। पूषन - पोषक जो पालन और पोषण करते हैं। अर्क - तेजोमय किरण, आक के पौधे सहित पूजित। हिरण्यगर्भ - स्वर्णिम गर्भ, सृष्टि का स्रोत। सहस्रकिरण - सहस्र किरणों वाले। प्रत्येक नाम हृदय में ऊष्मा, ओज और स्पष्टता लाता है।
108 नाम जपने के लाभ
सूर्य अष्टोत्तर का जप उत्तम स्वास्थ्य, ओज और तीव्र दृष्टि का आशीर्वाद देता, आत्मविश्वास, नेतृत्व व इच्छाशक्ति बढ़ाता, और नकारात्मकता, आलस्य व रोग दूर करता माना जाता है। यह विशेषकर कुंडली में सूर्य दोष को कम करने और सफलता, यश व मान्यता लाने हेतु पढ़ा जाता है। हर प्रातः इन नामों से सूर्य का अभिनंदन दिन को ऊर्जा, स्पष्टता और कृतज्ञ, सकारात्मक भाव से भर देता है।
विधि और सरल सुझाव

रविवार सूर्य देव का दिन है, और सूर्योदय पर ताम्र पात्र से थोड़े लाल चंदन व लाल पुष्प सहित अर्घ्य अर्पित करना विशेष शुभ है। पूर्व की ओर मुख करें, जल की धारा पतली रखें ताकि सूर्य का प्रकाश उसमें से गुज़रे, और सूर्य के अधिक ऊँचा उठ जाने के बाद अर्घ्य देने से बचें। रविवार को गेहूँ, गुड़ और लाल वस्तुएँ दान करना आपके जीवन में सूर्य के आशीर्वाद को सुदृढ़ करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सूर्य अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?+
यह सूर्य देव के 108 नामों की पवित्र सूची है, जो प्रकाश, जीवन और स्वास्थ्य के स्रोत सूर्य देवता हैं। प्रत्येक नाम सूर्य के किसी रूप या गुण की स्तुति करता है, और सूर्योदय पर अर्घ्य अर्पित करते हुए इन्हें जपना एक देदीप्यमान दैनिक भक्ति है।
ठीक 108 नाम ही क्यों हैं?+
संख्या 108 पवित्र है और सूर्य से इसका विशेष संबंध है - सूर्य का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग 108 गुना है। परंपरा में 9 ग्रह गुणा 12 राशियाँ बराबर 108, और जप माला में 108 मनके होते हैं, जो प्रकाश का उपयुक्त पूर्ण चक्र बनाते हैं।
मैं प्रत्येक नाम कैसे जपूँ?+
प्रत्येक नाम 'ॐ आदित्याय नमः' के रूप में जपा जाता है, ॐ पहले और नमः बाद में। यह सूर्योदय पर पूर्व की ओर मुख कर, ताम्र पात्र से सूर्य की ओर जल गिराकर अर्घ्य अर्पित करते हुए सर्वोत्तम है, और ॐ सूर्याय नमः से समाप्त होता है।
आदित्य और मार्तंड जैसे नामों का क्या अर्थ है?+
आदित्य का अर्थ है अदिति के पुत्र, तेजोमय; भास्कर प्रकाश के रचयिता; रवि जो दिन लाते हैं; मार्तंड ब्रह्मांड-अंड से जन्मे जीवनदाता; और मित्र सभी प्राणियों के मित्र। प्रत्येक नाम सूर्य के किसी रूप की स्तुति करता है।
108 नाम जपने के क्या लाभ हैं?+
यह उत्तम स्वास्थ्य, ओज और दृष्टि का आशीर्वाद देता, आत्मविश्वास, नेतृत्व व इच्छाशक्ति बढ़ाता, और नकारात्मकता व रोग दूर करता माना जाता है। यह विशेषकर सूर्य दोष कम करने और सफलता, यश व मान्यता लाने हेतु पढ़ा जाता है।
कौन सा दिन और अर्पण सूर्य देव को प्रसन्न करते हैं?+
रविवार सूर्य देव का दिन है। सूर्योदय पर पूर्व की ओर मुख कर, ताम्र पात्र से थोड़े लाल चंदन व लाल पुष्प सहित अर्घ्य अर्पित करें। रविवार को गेहूँ, गुड़ और लाल वस्तुएँ दान करना सूर्य के आशीर्वाद को सुदृढ़ करता है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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