दुर्गा अष्टोत्तर क्या है
दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली माँ दुर्गा के 108 नामों की पवित्र सूची है, जो परम जगन्माता और बुराई का संहार करने वाली हैं। प्रत्येक नाम उनके अनेक रूपों, शक्तियों और कृपाओं में से एक को प्रकट करता है, पर्वत की सौम्य पुत्री से लेकर असुरों की उग्र संहारिणी तक। इन नामों को अर्चना के रूप में जपना, प्रत्येक के साथ कुमकुम या पुष्प अर्पित करना, एक शक्तिशाली भक्ति है, विशेषकर नवरात्रि में और मंगलवार व शुक्रवार को प्रिय।
108 क्यों पवित्र है
संख्या 108 हिंदू परंपरा में सर्वाधिक पवित्र में से एक है। यह ब्रह्मांड से जुड़ी है - 9 ग्रह गुणा 12 राशियाँ बराबर 108 - और एक जप माला में पूर्ण जप-चक्र हेतु 108 मनके होते हैं। यह संख्या समग्रता भी दर्शाती है: 1 एक शक्ति, 0 वह शून्य जिससे सब उत्पन्न होता है, और 8 अनंत। माँ दुर्गा के 108 नाम जपना माँ को स्मरण और समर्पण की पूर्ण, अखंड माला से घेरना है।
अष्टोत्तर कैसे जपें
प्रत्येक नाम परंपरागत रूप से ॐ शैलपुत्र्यै नमः के रूप में जपा जाता है, ॐ पहले और नमः बाद में। अर्चना करने हेतु: 1. स्नान कर माँ दुर्गा के चित्र के सामने पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर बैठें। 2. घी या तिल का दीप जलाएँ और लाल पुष्प, कुमकुम व लाल चुनरी तैयार रखें। 3. 108 नामों में से प्रत्येक का उच्चारण करें, और प्रत्येक नाम के साथ उनके चरणों में कुमकुम या लाल पुष्प अर्पित करें। 4. दुर्गा आरती और शक्ति व रक्षा की हार्दिक प्रार्थना से समापन करें। नवरात्रि में यह अर्चना विशेष फलदायी है।
मुख्य नामों और अर्थों का चयन

यहाँ 108 में से कुछ प्रिय नामों का प्रतिनिधि चयन है: शैलपुत्री (शैलपुत्र्यै) - पर्वत (हिमालय) की पुत्री। भवानी (भवान्यै) - जीवनदात्री और भव (शिव) की संगिनी। कात्यायनी (कात्यायन्यै) - ऋषि कात्यायन के यहाँ जन्मीं, उग्र योद्धा रूप। महिषासुरमर्दिनी (महिषासुरमर्दिन्यै) - महिषासुर असुर की संहारिणी। दुर्गा (दुर्गायै) - जो दुर्गम हैं, सभी कठिनाई की निवारिका। अंबिका - सबकी दिव्य माता। प्रत्येक नाम एक शक्ति का भिन्न मुख है।
और शक्तिशाली नाम
कुछ और प्रिय नाम और उनके अर्थ: काली - श्याम, उग्र, भय और काल की निवारिका। भद्रकाली - काली का मंगलमय और रक्षक रूप। चंडिका - उग्र देवी जो बुराई का नाश करती हैं। जगदंबा - समस्त ब्रह्मांड की माता। कौशिकी - पार्वती के कोश से जन्मी तेजोमय देवी। सर्वमंगला - समस्त मंगल का स्रोत। शिवदूती - जिन्होंने शिव को अपना दूत बनाया। इनका उच्चारण साहस, भक्ति और आंतरिक बल जगाता है।
108 नाम जपने के लाभ
दुर्गा अष्टोत्तर का पाठ साहस और रक्षा प्रदान करता, भय, शत्रुओं व नकारात्मक ऊर्जा का नाश करता, और स्वास्थ्य, परिवार व समृद्धि की बाधाएँ दूर करता माना जाता है। यह संघर्षों में विजय, घर में शांति और कठिनाई का सामना करने का आंतरिक बल पाने हेतु माँ का आशीर्वाद आह्वान करता कहा जाता है। नवरात्रि की नौ रातों में जप सच्ची मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु विशेष शक्तिशाली माना जाता है।
विधि और सरल सुझाव

लाल माँ दुर्गा का रंग है - लाल पुष्प (विशेषकर गुड़हल), लाल चुनरी व कुमकुम, और मीठा भोग अर्पित करें। मंगलवार और शुक्रवार उनके साप्ताहिक दिन हैं, और नवरात्रि उनका सबसे बड़ा पर्व है। स्वच्छ, प्रकाशित स्थान और शांत, एकाग्र मन रखें। सच्चे प्रेम और समर्पण से जपा गया एक नाम जल्दबाज़ी में पढ़े अनेक नामों से अधिक निश्चित रूप से माँ तक पहुँचता है।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?+
यह माँ दुर्गा के 108 नामों की पवित्र सूची है, जिनमें प्रत्येक उनके अनेक रूपों, शक्तियों और कृपाओं में से एक प्रकट करता है। इसे अर्चना के रूप में जपना, प्रत्येक नाम के साथ कुमकुम या पुष्प अर्पित करना, भक्ति का शक्तिशाली रूप है, विशेषकर नवरात्रि में।
ठीक 108 नाम ही क्यों हैं?+
संख्या 108 अत्यंत पवित्र है, ब्रह्मांड से जुड़ी - 9 ग्रह गुणा 12 राशियाँ, और जप माला में पूर्ण चक्र हेतु 108 मनके होते हैं। 108 नामों का जप माँ को स्मरण की पूर्ण माला से घेरता है।
मैं प्रत्येक नाम कैसे जपूँ?+
प्रत्येक नाम 'ॐ शैलपुत्र्यै नमः' के रूप में जपा जाता है, ॐ पहले और नमः बाद में। अर्चना के समय प्रत्येक नाम के साथ उनके चरणों में कुमकुम या लाल पुष्प अर्पित करें, और दुर्गा आरती व शक्ति की प्रार्थना से समापन करें।
शैलपुत्री और महिषासुरमर्दिनी जैसे नामों का क्या अर्थ है?+
शैलपुत्री का अर्थ है पर्वत की पुत्री, भवानी जीवनदात्री, कात्यायनी ऋषि कात्यायन के यहाँ जन्मीं उग्र योद्धा रूप, और महिषासुरमर्दिनी महिषासुर असुर की संहारिणी। प्रत्येक नाम एक शक्ति का भिन्न मुख है।
108 नाम जपने के क्या लाभ हैं?+
यह साहस और रक्षा प्रदान करता, भय, शत्रुओं व नकारात्मक ऊर्जा का नाश करता, स्वास्थ्य, परिवार व समृद्धि की बाधाएँ दूर करता और संघर्षों में विजय लाता माना जाता है। नवरात्रि में जप सच्ची मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु विशेष शक्तिशाली है।
कौन से अर्पण और रंग माँ दुर्गा को प्रसन्न करते हैं?+
लाल माँ दुर्गा का रंग है। लाल पुष्प, विशेषकर गुड़हल, लाल चुनरी और कुमकुम, मीठे भोग सहित अर्पित करें। मंगलवार और शुक्रवार उनके साप्ताहिक दिन हैं, और नवरात्रि उनका सबसे बड़ा पर्व है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
Meet the Vandnaa editorial team →Explore on Vandnaa
संबंधित लेख

दुर्गा आरती – अम्बे तू है जगदम्बे काली लिरिक्स
8 मिनट पढ़ें

दुर्गा चालीसा बोल हिंदी व अंग्रेज़ी अर्थ सहित
9 मिनट पढ़ें

दुर्गा अष्टोत्तर - माँ दुर्गा के 108 नाम - सुरक्षा व विजय हेतु
11 मिनट पढ़ें

शारदीय नवरात्रि 2026: 9 दिन के रंग, पूजा विधि, व्रत नियम व कन्या पूजन गाइड
10 मिनट पढ़ें

गणेश के 108 नाम (अष्टोत्तर) - अर्थ और लाभ
9 मिनट पढ़ें

सूर्य के 108 नाम (अष्टोत्तर) - अर्थ और लाभ
9 मिनट पढ़ें