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तुलसी माता आरती और चालीसा - महत्व और पूजा विधि
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तुलसी माता आरती और चालीसा - महत्व और पूजा विधि

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 2, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

तुलसी माता कौन हैं

तुलसी माता पवित्र तुलसी का पौधा हैं जो जीवित देवी और भगवान विष्णु की सर्वाधिक प्रिया रूप में पूजी जाती हैं। परंपरा अनुसार, वे वृंदा थीं, एक पतिव्रता स्त्री जिनकी पवित्रता व भक्ति ने उन्हें विष्णु के चरणों में शाश्वत स्थान दिलाया, तुलसी पौधे का रूप लेकर। लगभग हर हिंदू घर के आँगन में पाई जाने वाली, वे पवित्रता, भक्ति व मांगल्य की प्रतीक हैं। उनके पत्ते विष्णु व कृष्ण की उपासना में अनिवार्य माने जाते हैं, जो तुलसी बिना भोग स्वीकार नहीं करते।

तुलसी का महत्व

तुलसी का आध्यात्मिक व व्यावहारिक दोनों महत्व है। आध्यात्मिक रूप से, वे घर को पवित्र करती, नकारात्मकता दूर करती और भगवान विष्णु को प्रसन्न करती हैं, दैनिक उपासना स्वास्थ्य, सामंजस्य व समृद्धि लाती मानी जाती है। व्यावहारिक रूप से, तुलसी एक पूज्य आयुर्वेदिक औषधि है जो वायु शुद्ध करती और रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाती है। दो मुख्य प्रकार - राम तुलसी (हरी) और श्यामा तुलसी (गहरी) - दोनों पूजी जाती हैं। तुलसी विवाह, कार्तिक एकादशी को तुलसी का भगवान विष्णु (शालिग्राम) से विधिवत विवाह, उनका सबसे बड़ा पर्व है।

तुलसी चालीसा - सार और प्रारंभिक दोहा

तुलसी चालीसा उन्हें सर्वाधिक पवित्र पौध-देवी, हरि की प्रिया और पाप व रोग की नाशिनी रूप में स्तुति करती है। प्रारंभिक दोहा:

जय तुलसी माँ पवित्र-रूपा, हरि को अत्यंत प्यारी। शरण पड़ी जो आपकी, मिट जाये विपदा सारी।

चौपाई (उदाहरण): जय तुलसी महारानी जगदंबा, पाप-नाशिनी भक्त-अवलंबा। विष्णु-प्रिया तुम सुख की दाता, घर-घर में शोभा पाती माता।

छंद उनकी पवित्रता, विष्णु से बंधन और घर को आशीर्वाद व रक्षा की शक्ति को महिमामंडित करते हैं।

तुलसी माता आरती

तुलसी माता आरती

संध्या को तुलसी पौधे के पास घी का दीपक जलाएँ और गाएँ:

तुलसी महारानी नमो नमो, हरि की पटरानी नमो नमो। धन तुलसी पूरण तप कीन्हो, शालिग्राम-हि व्याह रचायो। नाम अपार श्री जगदानी, नमो नमो हरि की पटरानी। सब के दुख-संकट तुम हरो, घर-घर में आनंद भरो।

दीपक को दक्षिणावर्त घुमाएँ, फिर जल अर्पित करें और परिवार की पवित्रता, स्वास्थ्य व समृद्धि की प्रार्थना करें।

तुलसी पूजा विधि - दैनिक उपासना

1. प्रातः स्नान कर तुलसी पौधे की जड़ों में ताज़ा जल अर्पित करें। 2. पौधे को रोलीअक्षत (चावल) लगाएँ और पुष्प व थोड़ा कुमकुम अर्पित करें। 3. संध्या को पौधे के आधार पर घी या तिल के तेल का दीपक जलाएँ। 4. तुलसी चालीसा पढ़ें और ॐ तुलस्यै नमः या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें। 5. तुलसी आरती गाएँ और दीपक को दक्षिणावर्त घुमाएँ, फिर पौधे की परिक्रमा करें। 6. पवित्रता, स्वास्थ्य व विष्णु के आशीर्वाद की प्रार्थना करें, और किसी अनजाने अनादर हेतु क्षमा माँगें। हर संध्या तुलसी के पास दीप जलाना विशेष शुभ दैनिक अभ्यास है।

लाभ और बचने योग्य बातें

दैनिक तुलसी उपासना घर में पवित्रता, शांति व समृद्धि लाती, भगवान विष्णु को प्रसन्न करती, स्वास्थ्य में सहायक होती और नकारात्मकता दूर करती मानी जाती है। उनका सम्मान करने हेतु: रविवार, एकादशी या सूर्यास्त के बाद तुलसी पत्ते कभी न तोड़ें, नाखूनों से कभी न तोड़ें, और सूखे पौधे पर या पास पैर न रखें। पौधे को उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में रखें, रोज जल दें, और उसे सूखने या अस्वच्छ स्थान पर न रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलसी माता कौन हैं?+

तुलसी माता पवित्र तुलसी पौधा हैं जो देवी और भगवान विष्णु की प्रिया रूप में पूजी जाती हैं। वे वृंदा थीं, जिनकी पवित्रता व भक्ति ने उन्हें तुलसी पौधे रूप में विष्णु के चरणों में शाश्वत स्थान दिलाया।

तुलसी भगवान विष्णु को इतनी प्रिय क्यों है?+

तुलसी सबसे पवित्र अर्पण और विष्णु की प्रिया का रूप मानी जाती है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु व कृष्ण तुलसी पत्र बिना भोग स्वीकार नहीं करते, जिससे यह उनकी उपासना में अनिवार्य है।

तुलसी मंत्र क्या है?+

एक सरल मंत्र 'ॐ तुलस्यै नमः' है, जो पौधे की उपासना करते समय जपा जाता है। विष्णु मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' भी जपा जाता है, क्योंकि तुलसी विष्णु को प्रिय है।

तुलसी पत्ते कब नहीं तोड़ने चाहिए?+

तुलसी पत्ते रविवार, एकादशी या सूर्यास्त के बाद नहीं तोड़ने चाहिए, और नाखूनों से कभी नहीं। तोड़ना कोमलता व सम्मान से करें, पौधे को देवी मानते हुए।

तुलसी पौधा किस दिशा में रखना चाहिए?+

तुलसी पौधा घर के उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में रखना सर्वोत्तम है। इसे स्वच्छ, धूप वाले स्थान पर रखें, रोज जल दें और उसे कभी सूखने या उपेक्षित न होने दें।

तुलसी विवाह क्या है?+

तुलसी विवाह तुलसी माता का भगवान विष्णु (शालिग्राम रूप) से विधिवत विवाह है, जो कार्तिक एकादशी को मनाया जाता है। यह हिंदू विवाह ऋतु का आरंभ है और उनका सबसे बड़ा पर्व है।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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