वैद्यनाथ, दिव्य उपचारक
तमिलनाडु में सिरकाझी नगर के निकट वैद्यीश्वरन कोविल, भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें यहां वैद्यनाथ स्वामी, दिव्य वैद्य के रूप में पूजा जाता है, उनकी संगिनी देवी तैयालनायकी के साथ। इसी मंदिर परिसर में अंगारक का मंदिर भी स्थित है, जिन्हें मंगल के नाम से भी जाना जाता है, और परंपरा में शक्ति, साहस और जीवन शक्ति से जोड़ा जाता है।
भक्त इस मंदिर को शिव तीर्थों में उपचार से जुड़ी अपनी गहरी परंपरा के लिए विशिष्ट मानते हैं, यह प्रतिष्ठा अनेक पीढ़ियों से भक्तों को कल्याण और सांत्वना की खोज में यहां खींच लाती रही है।
कथा और पवित्र जल
परंपरा के अनुसार, यह स्थल देवताओं के जुड़वां वैद्यों, अश्विनी कुमारों की कथा से जुड़ा है, कहा जाता है कि उन्होंने यहां शिव से उपचार की शक्ति पाने हेतु आशीर्वाद मांगा था, जिसके बाद वे स्वर्गलोक में दिव्य वैद्यों के रूप में विख्यात हुए। इसी कथा को यहां शिव के वैद्यनाथ नाम की उत्पत्ति माना जाता है।
मंदिर का तालाब, जिसे सिद्धामृत तीर्थम् कहा जाता है, भक्तों द्वारा पवित्र जल माना जाता है, परंपरा में इसे कल्याण का आशीर्वाद वहन करने वाला माना जाता है, और तीर्थयात्री प्रायः अपनी यात्रा के भाग के रूप में तालाब पर कुछ क्षण व्यतीत करते हैं।
अंगारक पूजा का महत्व
इस मंदिर में नवग्रह परिक्रमा के भाग के रूप में पूजे जाने वाले अंगारक को हिन्दू परंपरा में साहस, शक्ति और दृढ़ संकल्प से जोड़ा जाता है। भक्त इस मंदिर में आंतरिक शक्ति और स्थिरता की कामना के साथ आते हैं, अंगारक के गुणों के सम्मान स्वरूप प्रार्थना अर्पित करते हुए।
वैद्यनाथ से जुड़े उपचार भाव और अंगारक से जुड़ी शक्ति मिलकर इस मंदिर को ऐसा स्थान बनाते हैं जहां भक्त शारीरिक और आंतरिक कल्याण दोनों की प्रार्थना के साथ आते हैं, सदैव इसे आस्था के विषय के रूप में देखते हुए, न कि किसी निश्चित परिणाम की गारंटी के रूप में।
दर्शन गाइड और उत्सव

मंदिर में अनुष्ठानों का नियमित दैनिक क्रम चलता है, और भक्तों को स्थानीय स्तर पर वर्तमान समय की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।
- इस मंदिर में अंगारक की पूजा हेतु मंगलवार विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है
- वार्षिक उत्सव कैलेंडर में शिव के वैद्यनाथ स्वरूप को केंद्रित उत्सव शामिल हैं
- कई भक्त यहां प्रथानुसार नमक अर्पित करते हैं, नवग्रह परिक्रमा में यह परंपरा इसी मंदिर में विशिष्ट है
- तीर्थयात्री प्रायः मुख्य गर्भगृह में प्रवेश से पहले सिद्धामृत तालाब पर रुकते हैं
वैद्यीश्वरन कोविल कैसे पहुंचें
वैद्यीश्वरन कोविल सिरकाझी के निकट स्थित है, इसका अपना रेलवे स्टेशन चेन्नई-नागोर मार्ग पर है, जिससे यहां सीधे रेल द्वारा पहुंचा जा सकता है। निकटतम हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली में है।
व्यापक नवग्रह परिक्रमा के भाग के रूप में यात्रा करने वाले भक्त सामान्यतः कुम्भकोणम से अपने दिन की यात्रा में इस मंदिर को शामिल करते हैं।
मंत्र और भक्त का चिंतन
भक्त 'ॐ अंगारकाय नमः' का जाप करते हैं, जिसका अर्थ है 'अंगारक को नमन', साथ ही कल्याण हेतु वैद्यनाथ स्वामी से प्रार्थना करते हैं।
उपचार से जुड़ी मंदिर की दीर्घ परंपरा भक्तों को स्मरण कराती है कि आस्था और धैर्य साथ-साथ चलते हैं, और सांत्वना प्रायः उन्हें मिलती है जो इसे सच्चे हृदय से खोजते हैं। यहां पूजा श्रद्धा और प्रेम का कार्य है, न कि कोई लेन-देन।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
इस मंदिर में शिव को वैद्यनाथ के रूप में क्यों पूजा जाता है?+
परंपरा के अनुसार, दिव्य वैद्य अश्विनी कुमारों को इसी स्थल पर शिव की आराधना के बाद उपचार की शक्ति प्राप्त हुई, जिससे उनका नाम वैद्यनाथ पड़ा, अर्थात वैद्यों के स्वामी।
सिद्धामृत तीर्थम् क्या है?+
सिद्धामृत तीर्थम् मंदिर का पवित्र तालाब है, जिसे भक्त पावन जल मानते हैं और परंपरा में इसे कल्याण का आशीर्वाद वहन करने वाला माना जाता है।
इस मंदिर में परंपरागत रूप से क्या अर्पित किया जाता है?+
कई भक्त वैद्यीश्वरन कोविल में नमक अर्पित करते हैं, नवग्रह परिक्रमा के नौ मंदिरों में यह प्रथा इसी मंदिर में विशिष्ट है।
About the author
Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years
Pandit Ravindra is the Vandnaa editorial team's resident specialist on aarti, chalisa, and daily devotion. He has performed home and temple pujas across Varanasi and Delhi for over two decades and contributes the bhakti-focused articles on this site.
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