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पूजा में तांबे और पीतल के बर्तन ही क्यों उपयोग होते हैं
Spiritual Wisdom

पूजा में तांबे और पीतल के बर्तन ही क्यों उपयोग होते हैं

6 मिनट पढ़ेंप्रकाशित सितंबर 8, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

यह परंपरा: पूजा थाली में तांबा और पीतल

अधिकांश हिंदू पूजा घरों में झांकें तो कलश, लोटा, दीया, थाली और घंटी स्टील, कांच या प्लास्टिक की बजाय तांबे या पीतल की मिलेंगी। यह बात लगभग हर क्षेत्र और समुदाय में सच है, चाहे घर की छोटी पूजा हो या मंदिर का बड़ा अनुष्ठान।

जो परिवार रोज़ के खाने में स्टील के बर्तन इस्तेमाल करते हैं, वे भी आमतौर पर सिर्फ पूजा के लिए अलग से तांबे या पीतल के बर्तन रखते हैं, जिन्हें उपयोग से पहले साफ और चमकाया जाता है।

परंपरागत रूप से यही धातुएं क्यों

तांबे और पीतल के बर्तन वैदिक काल से यज्ञ और पूजा का हिस्सा रहे हैं, जब धातु के पात्रों का उपयोग जल रखने, अर्घ्य देने और पवित्र वस्तुओं को संभालने के लिए किया जाता था। तांबे को विशेष रूप से सूर्य देव से जोड़ा गया है और इसे ईश्वर के योग्य शुद्ध धातु माना गया है।

तांबे के बर्तन में रखा पानी, जिसे तांबे का जल कहा जाता है, पीढ़ियों से रोज़मर्रा जीवन में भी महत्वपूर्ण माना गया है, और तांबे की इसी शुद्धता पर भरोसा स्वाभाविक रूप से पूजा में भी आ गया।

तांबा और पीतल किसका प्रतीक हैं

पीतल, जो तांबे और जस्ते से मिलकर बनता है, सोने जैसी गर्म सुनहरी चमक लिए होता है, जो बिना असली सोने के भी देवता को कुछ शुभ और सुंदर अर्पित करने का भाव देता है। दीये की रोशनी में चमकता तांबे या पीतल का साफ बर्तन स्वयं पूजा स्थान की पवित्रता बढ़ाने वाला माना जाता है।

इन्हीं धातुओं को चुनना ईश्वर के प्रति सुविधा नहीं बल्कि अपना सर्वश्रेष्ठ अर्पित करने का भाव भी दर्शाता है, एक छोटा सा संकेत कि पूजा कितनी सावधानी और श्रद्धा से की जा रही है।

आज घरों और मंदिरों में यह चलन

आज घरों और मंदिरों में यह चलन

स्टील और प्लास्टिक के बर्तन सस्ते और आसान होने के बावजूद, आज भी अधिकांश हिंदू घरों और मंदिरों में रोज़ की और त्योहारी पूजा के लिए तांबे या पीतल के कलश, दीये और लोटे ही पहली पसंद हैं। कई परिवार इन बर्तनों का एक विशेष सेट रखते हैं, जिन्हें त्योहारों से पहले इमली या नींबू के मिश्रण से चमकाया जाता है।

मंदिरों की दुकानों और पूजा सामग्री की दुकानों में भी तांबे और पीतल के बर्तन ही मुख्य रूप से बिकते हैं, स्टील या अन्य धातुओं को परंपरा नहीं बल्कि आधुनिक विकल्प माना जाता है।

अपना सर्वश्रेष्ठ अर्पित करने का एक छोटा तरीका

चमकता तांबे का कलश या पीतल का दीया देखने में एक छोटी सी बात लग सकती है, पर यह एक बड़ी भावना को दर्शाता है, ईश्वर के सामने हर छोटी वस्तु में भी देखभाल और गुणवत्ता को चुनना। पूजा श्रद्धा और प्रेम का कार्य है, और एक बर्तन की धातु भी उसी भाव को आगे बढ़ाती है।

त्वरित उत्तर

क्या पूजा में तांबे-पीतल की जगह स्टील के बर्तन उपयोग किए जा सकते हैं?+

कई परिवार परंपरा के अनुसार आज भी तांबे या पीतल को प्राथमिकता देते हैं, पर यह रीति और व्यक्तिगत आस्था का विषय है, सख्त नियम नहीं, और आधुनिक घरों में बिना किसी झिझक के स्टील भी उपयोग होता है।

हिंदू परंपरा में तांबे को पवित्रता से क्यों जोड़ा जाता है?+

तांबे को परंपरागत रूप से सूर्य देव से जोड़ा गया है, और रोज़मर्रा जीवन में पानी रखने के लिए इसे लंबे समय से भरोसेमंद माना गया है, इसीलिए इसे पूजा के योग्य शुद्ध धातु माना जाता है।

तांबे और पीतल के पूजा बर्तनों को कैसे साफ करना चाहिए?+

इन्हें परंपरागत रूप से इमली और नींबू जैसी प्राकृतिक चीज़ों से साफ किया जाता है, जो रोज़ की पूजा या त्योहारों से पहले इनकी चमक लौटाने में मदद करती हैं।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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