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हम एकादशी का व्रत क्यों रखते हैं - महत्व और लाभ
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हम एकादशी का व्रत क्यों रखते हैं - महत्व और लाभ

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

एकादशी क्या है

एकादशी प्रत्येक चंद्र पक्ष की ग्यारहवीं तिथि (चंद्र दिवस) है, जो माह में दो बार आती है - एक बार शुक्ल पक्ष में (शुक्ल) और एक बार कृष्ण पक्ष में (कृष्ण)। यह भगवान विष्णु के भक्तों के लिए सबसे प्रिय व्रत का दिन है, जिनकी इस दिन शुद्धता, शांति व मोक्ष के लिए उपासना की जाती है। वर्ष में चौबीस एकादशियाँ होती हैं, प्रत्येक का अपना नाम और कथा है, जिनमें सबसे कठिन निर्जला एकादशी है, जो जल तक के बिना रखी जाती है।

व्रत का आध्यात्मिक अर्थ

एकादशी का व्रत केवल भोजन छोड़ने से कहीं अधिक है; यह इंद्रियों को संसार से समेटकर मन को ईश्वर की ओर मोड़ने का दिन है। थोड़ा खाकर और अन्न से बचकर भक्त शरीर का भारीपन शांत करता और ऊर्जा को प्रार्थना, जप व विष्णु के चिंतन हेतु मुक्त करता है। सच्चा व्रत मन का है - उसे क्रोध, निंदा व कामना से दूर रखना, और उसके स्थान पर ईश्वर के नाम से भरना। इस प्रकार एकादशी शरीर और आत्मा दोनों को शुद्ध करती है।

चंद्रमा, मन और ग्यारहवाँ दिन

हिंदू परंपरा सिखाती है कि चंद्रमा मन का शासन करता है, और उसका बढ़ना-घटना हमारे भावों व मानसिक संतुलन को सूक्ष्म रूप से प्रभावित करता है। ग्यारहवीं तिथि वह दिन माना जाता है जब मन पर यह चंद्र खिंचाव सबसे प्रबल होता है, जिससे बेचैनी व लालसाएँ बढ़ती हैं। एकादशी का व्रत मन को इस खिंचाव के विरुद्ध स्थिर करता है, इसीलिए यह दिन संयम व भक्ति हेतु निर्धारित है। हल्का भोजन करने से शरीर व मन शांत रहते और आध्यात्मिक साधना के अनुरूप बने रहते हैं।

स्वास्थ्य और वैज्ञानिक पक्ष

स्वास्थ्य और वैज्ञानिक पक्ष

एक नियमित व्रत पाचन तंत्र को अत्यंत आवश्यक विश्राम देता है, जिससे शरीर स्वयं को शुद्ध व पुनर्निर्मित कर पाता है। हर पखवाड़े अन्न के बिना रहना चयापचय को सहारा देता, शरीर को हल्का करता और उस अंतराल उपवास का पारंपरिक रूप है जिसका अब स्वास्थ्य हेतु व्यापक अध्ययन हो रहा है। फल, दूध व जल का हल्का आहार शरीर को पोषित रखता हुए आँत पर भार कम करता है। इस प्रकार माह में दो बार की एकादशी प्राचीन भक्ति को शरीर के लिए विश्राम व नवीनीकरण की प्राकृतिक लय से जोड़ती है।

नियम - क्या खाएँ और क्या टालें

एकादशी का मुख्य नियम है सभी अन्न, चावल, दाल व फलियों से बचना, जो इस दिन नकारात्मक ऊर्जा सोखते माने जाते हैं। भक्त ग्रहण कर सकते हैं:

  • फल, दूध, दही व मेवे।
  • जल व बिना कैफीन के पेय (निर्जला एकादशी को छोड़कर)।
  • व्रत के भोजन जैसे साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, आलू व सेंधा नमक।

प्याज, लहसुन, मांसाहार, मद्य, क्रोध व कटु वाणी से भी बचें। अनेक आंशिक व्रत (फलाहार) रखते हैं, जबकि श्रद्धालु पूर्ण या निर्जल व्रत रखते हैं।

एकादशी व्रत कैसे रखें

1. एकादशी को सूर्योदय से व्रत आरंभ करें, आदर्श रूप से दशमी (एक दिन पूर्व) की रात्रि हल्के भोजन के साथ। 2. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु की उपासना करें, तुलसी पत्र, पीले पुष्प व फल अर्पित करें। 3. दिनभर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें या विष्णु स्तोत्र पढ़ें। 4. मन को प्रार्थना में रखें; अधिक सोने, क्रोध व व्यर्थ बातचीत से बचें। 5. रात्रि में भक्ति में जागरण करें, विशेषकर प्रमुख एकादशियों पर। 6. अगली प्रातः द्वादशी को निर्धारित समय में, उपासना के बाद और आदर्श रूप से अन्न व दान सहित व्रत का पारण (पारण) करें।

एकादशी रखने के लाभ

एकादशी रखने के लाभ

शास्त्र वचन देते हैं कि सच्चा एकादशी व्रत पूर्व पापों को भस्म करता, भगवान विष्णु की कृपा लाता और आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाता है। सांसारिक स्तर पर यह आत्म-अनुशासन विकसित करता, मन शांत करता, भक्ति को तीव्र करता और शरीर को नियमित शुद्धि व विश्राम देता है। सबसे बढ़कर, व्रत इच्छाशक्ति को प्रशिक्षित करता और हृदय को निरंतर ईश्वर की ओर मोड़ता है, जो इसे हिंदू जीवन के सबसे फलदायी व्रतों में से एक बनाता है।

भक्तों के सामान्य प्रश्न

हम एकादशी का व्रत क्यों रखते हैं?+

एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित ग्यारहवीं तिथि है। हम व्रत शरीर व इंद्रियों को शांत करने, चंद्रमा के खिंचाव के विरुद्ध मन स्थिर करने और पूर्णतः प्रार्थना की ओर मुड़ने हेतु रखते हैं, जिससे शुद्धता व विष्णु की कृपा मिलती है।

एकादशी पर अन्न क्यों टाला जाता है?+

अन्न, चावल व दाल एकादशी पर नकारात्मक ऊर्जा सोखते और शरीर को भारी व मन को बेचैन करते माने जाते हैं। उन्हें टालना मन को हल्का और भक्ति पर केंद्रित रखता है।

एकादशी व्रत में मैं क्या खा सकता हूँ?+

आप फल, दूध, दही, मेवे और साबूदाना, सिंघाड़े का आटा व सेंधा नमक के साथ आलू जैसे व्रत के भोजन ले सकते हैं। प्याज, लहसुन, अन्न व मांसाहार टाले जाते हैं।

चंद्रमा और एकादशी का क्या संबंध है?+

चंद्रमा मन का शासक कहा जाता है, और ग्यारहवीं तिथि पर मन पर उसका खिंचाव सबसे प्रबल होता है, जिससे बेचैनी बढ़ती है। एकादशी का व्रत मन को इस चंद्र प्रभाव के विरुद्ध स्थिर करता है।

हम एकादशी व्रत का पारण कब करते हैं?+

व्रत अगली प्रातः द्वादशी, बारहवीं तिथि को, निर्धारित पारण समय में, उपासना के बाद तोड़ा जाता है। इसे पारंपरिक रूप से अन्न और आदर्श रूप से दान के साथ तोड़ा जाता है।

किसे कठोर एकादशी व्रत नहीं रखना चाहिए?+

रोगी, वृद्ध, गर्भवती स्त्रियाँ, बच्चे और दवा लेने वाले निर्जल व्रत के बजाय फल व दूध के साथ कोमल फलाहार व्रत रखें। शरीर पर भार से अधिक भक्ति महत्वपूर्ण है।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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