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अन्नपूर्णा जयंती 2026: तिथि, महत्व और पूजा विधि
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अन्नपूर्णा जयंती 2026: तिथि, महत्व और पूजा विधि

7 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 18, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

देवी अन्नपूर्णा कौन हैं?

देवी अन्नपूर्णा माता पार्वती का वह स्वरूप हैं जो सभी प्राणियों को अन्न (भोजन) प्रदान करता है। उनके नाम का अर्थ है 'अन्न से परिपूर्ण', और वे स्वर्ण कलछी और खीर का पात्र धारण किए, स्वयं भगवान शिव को भी भोजन कराते हुए दर्शाई जाती हैं।

एक प्रसिद्ध कथा कहती है कि जब शिव ने एक बार भौतिक संसार को माया कहा, पार्वती ने यह दिखाने के लिए कि अन्न और पोषण वास्तविक और पवित्र हैं, अंतर्धान हो गईं - और संसार भूख का सामना करने लगा। तब वे काशी (वाराणसी) में अन्नपूर्णा रूप में पुनः प्रकट हुईं और सबको, स्वयं शिव को भी, भोजन कराया, यह सिखाते हुए कि अन्न दिव्य है और सदा सम्मानित होना चाहिए।

अन्नपूर्णा जयंती 2026 - तिथि

📅 तिथि: मार्गशीर्ष पूर्णिमा 🗓️ तारीख: गुरुवार, 24 दिसंबर 2026

अन्नपूर्णा जयंती मार्गशीर्ष की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दत्तात्रेय जयंती के निकट पड़ती है, दोनों मार्गशीर्ष पूर्णिमा के आसपास। पूर्णिमा का समय अपने स्थानीय पंचांग में देखें।

अन्नपूर्णा जयंती पूजा विधि

इस दिन रसोई और चूल्हे की देवी के स्थान रूप में पूजा होती है:

1. एक दिन पहले रसोई अच्छी तरह स्वच्छ करें। 2. सुबह स्नान कर चूल्हा और अनाज साफ करें। रसोई के पास अन्नपूर्णा या पार्वती का चित्र रखें। 3. चूल्हे और देवी को रोली, अक्षत, पुष्प, घी का दीप और धूप अर्पित करें। 4. ताजा सात्विक भोजन पकाएँ और किसी के खाने से पहले पहला अंश (भोग) देवी को अर्पित करें। 5. अन्नपूर्णा मंत्र जपें और परिवार, अतिथियों और विशेषकर भूखों को भोजन कराएँ। 6. अन्न दान दिन का सबसे प्रिय कार्य है - जरूरतमंद को भोजन कराएँ या अनाज दान करें।

मंत्र और लाभ

मंत्र और लाभ

अन्नपूर्णा मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं अन्नपूर्णायै नमः

प्रसिद्ध प्रार्थना: अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राणवल्लभे, ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वती (हे अन्नपूर्णा, सदा परिपूर्ण, शंकर की प्राणप्रिया, मुझे ज्ञान और वैराग्य की भिक्षा दें, हे पार्वती।)

लाभ:

  • अन्न और पोषण की कभी कमी न होने का आशीर्वाद
  • समृद्धि, वैभव और सुखी घर
  • कृतज्ञ हृदय जो अन्न कभी बर्बाद नहीं करता
  • परिवार में शांति और संतोष

इस दिन की सबसे गहरी साधना कृतज्ञता है - हर भोजन को आशीर्वाद देना, एक भी दाना बर्बाद न करना, और जिनके पास कम है उनसे भोजन बाँटना।

पाठकों के प्रश्न

2026 में अन्नपूर्णा जयंती कब है?+

अन्नपूर्णा जयंती 2026 मार्गशीर्ष पूर्णिमा, गुरुवार 24 दिसंबर को पड़ती है। यह दत्तात्रेय जयंती के निकट मनाई जाती है। पूर्णिमा तिथि अपने स्थानीय पंचांग में देखें।

अन्नपूर्णा जयंती पर रसोई की पूजा क्यों होती है?+

देवी अन्नपूर्णा अन्न की दात्री हैं, इसलिए रसोई और चूल्हे को उनके स्थान रूप में सम्मानित किया जाता है। उनकी पूजा घर के पोषण के लिए देवी का धन्यवाद करने का तरीका है।

अन्नपूर्णा मंत्र क्या है?+

बीज मंत्र है 'ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं अन्नपूर्णायै नमः'। प्रिय प्रार्थना 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राणवल्लभे...' भी पढ़ी जाती है, जो देवी से ज्ञान और वैराग्य की भिक्षा माँगती है।

अन्नपूर्णा जयंती का मुख्य संदेश क्या है?+

अन्न को दिव्य मानना - इसे कभी बर्बाद न करना, हर भोजन को आशीर्वाद देना, और भूखों से बाँटना। इस दिन अन्न दान सर्वोच्च दान कर्मों में से एक माना जाता है।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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