भगवान दत्तात्रेय कौन हैं?
भगवान दत्तात्रेय एक अद्वितीय देव हैं जो त्रिमूर्ति - ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) को एक स्वरूप में मिलाते हैं। वे तीन मुख और छह भुजाओं सहित दर्शाए जाते हैं, साथ में चार कुत्ते (वेद) और एक गाय (पृथ्वी व कामधेनु) होते हैं।
ऋषि अत्रि और पतिव्रता अनसूया के पुत्र, दत्तात्रेय आदि गुरु के रूप में पूजे जाते हैं - प्रथम शिक्षक और समस्त गुरुओं के स्वामी। वे ज्ञान, भक्ति और वैराग्य के संगम का प्रतिनिधित्व करते हैं, और गुरु भक्ति के मार्ग पर चलने वालों को विशेष प्रिय हैं।
दत्तात्रेय जयंती 2026 - तिथि और मुहूर्त
📅 तिथि: मार्गशीर्ष पूर्णिमा 🗓️ तारीख: बुधवार, 23 दिसंबर 2026
माना जाता है कि दत्तात्रेय मार्गशीर्ष की पूर्णिमा को संध्या (प्रदोष काल) में प्रकट हुए। इसलिए संध्या पूजा विशेष शुभ मानी जाती है। पूर्णिमा तिथि का समय अपने स्थानीय पंचांग में देखें।
दत्तात्रेय के 24 गुरु
दत्तात्रेय की सबसे सुंदर शिक्षाओं में से एक यह है कि उन्होंने प्रकृति से 24 गुरु बनाए - पृथ्वी, वायु, आकाश, जल, अग्नि, चंद्रमा, सूर्य, मधुमक्खी, हाथी, हिरण, मछली, बालक, बाण बनाने वाला और अन्य।
प्रत्येक से उन्होंने एक गुण सीखा: पृथ्वी से धैर्य, वायु से अनासक्ति, जल से पवित्रता, मधुमक्खी से लोभ का खतरा, हिरण और मछली से इंद्रियों का खतरा। उनका उदाहरण सिखाता है कि विनम्रता से देखने वाले के लिए सारा संसार गुरु है, और हर प्राणी व परिस्थिति से ज्ञान बटोरा जा सकता है।
पूजा विधि और मंत्र

1. जल्दी स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और संध्या में, उनके प्रकट होने के समय पूजा करें। 2. पूजा: दत्तात्रेय के चित्र के समक्ष पुष्प, धूप, फल और घी का दीप अर्पित करें। कुत्तों और गाय को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि वे उनके साथ रहते हैं। 3. मंत्र: रुद्राक्ष माला से ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः या श्री गुरुदेव दत्त का 108 बार जप करें। 4. पाठ: भक्त परंपरागत रूप से गुरुचरित्र या अवधूत गीता पढ़ते हैं, विशेषकर महाराष्ट्र और कर्नाटक में। 5. आरती से समापन करें और प्रसाद वितरित करें। बहुत लोग दिन भर हल्का व्रत रखते हैं।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
2026 में दत्तात्रेय जयंती कब है?+
दत्तात्रेय जयंती 2026 मार्गशीर्ष पूर्णिमा, बुधवार 23 दिसंबर को पड़ती है। संध्या (प्रदोष काल) पूजा सबसे शुभ मानी जाती है। पूर्णिमा का समय अपने स्थानीय पंचांग में देखें।
दत्तात्रेय के तीन सिर क्यों हैं?+
तीन सिर ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) का प्रतिनिधित्व करते हैं। भगवान दत्तात्रेय त्रिमूर्ति की सृजन, पालन और परिवर्तन शक्तियों को एक दिव्य स्वरूप में मिलाते हैं।
सबसे सरल दत्तात्रेय मंत्र क्या है?+
सबसे सरल और प्रचलित है 'श्री गुरुदेव दत्त'। मंत्र 'ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः' भी व्यापक रूप से जपा जाता है, श्रेष्ठ है रुद्राक्ष माला से 108 बार।
दत्तात्रेय के साथ कुत्ते और गाय क्यों दर्शाए जाते हैं?+
चार कुत्ते चार वेदों के प्रतीक हैं, जो प्रभु के पीछे चलते हैं, और गाय धरती माता तथा कामधेनु, इच्छापूर्ति करने वाली गाय का प्रतिनिधित्व करती है। साथ में वे दर्शाते हैं कि समस्त ज्ञान और पोषण गुरु के पीछे चलते हैं।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
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