बिस्वकर्मा पूजा 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
बिस्वकर्मा पूजा 2026 गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को है।
यह कन्या संक्रांति है - वह दिन जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करता है।
तारीख निश्चित क्यों:
सूर्य को एक राशि चक्र पूरा करने में लगभग 365.25 दिन लगते हैं। सिंह से कन्या में संक्रमण हर साल लगभग 16-17 सितंबर को होता है।
शुभ मुहूर्त 2026:
- संक्रांति पुण्य काल: सुबह 6:30 से 11:30 बजे तक।
- ब्रह्म मुहूर्त पूजा: सुबह 4:00 से 5:30 बजे तक।
- सुबह की पूजा: सुबह 7:00 से 9:00 बजे तक।
- कार्यस्थल/फैक्ट्री पूजा: सुबह 9:00 से दोपहर 12:00 बजे तक।
- राहु काल टालें: दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक।
क्षेत्रीय नाम:
- बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड: बिस्वकर्मा पूजा
- हिंदी पट्टी: विश्वकर्मा पूजा
- असम, त्रिपुरा: बिस्वकर्मा पूजा
- नेपाल: बिश्वकर्मा पूजा
पूरी विधि + सामग्री सूची (बंगाली और ओड़िया शैली)
आवश्यक सामग्री:
1. विश्वकर्मा मूर्ति या तस्वीर। 2. लाल कपड़ा। 3. केले के तने (4)। 4. आम के पत्ते। 5. कलश। 6. नारियल। 7. चावल के दाने। 8. सिंदूर, हल्दी, चंदन। 9. फूल। 10. अगरबत्ती, कपूर, दीपक। 11. फल। 12. मिठाई। 13. पूजक के औज़ार/उपकरण। 14. पान, सुपारी। 15. कलावा। 16. गंगाजल।
विधि:
चरण 1 - तैयारी (16 सितंबर शाम):
- कार्यस्थल को अच्छी तरह साफ करें।
- सभी औज़ार साफ करें।
चरण 2 - सुबह शुद्धिकरण।
चरण 3 - कलश स्थापना।
चरण 4 - विश्वकर्मा का आह्वान।
चरण 5 - मंत्र जप:
- मूल मंत्र: 'ॐ विश्वकर्मायै नमः' - 108 बार।
चरण 6 - औज़ार पूजा (अनूठा अनुष्ठान)।
चरण 7 - आरती और भोग।
चरण 8 - समापन।
कार्यस्थल/फैक्ट्री पूजा - कौन मनाता है और क्यों
बिस्वकर्मा पूजा अनूठे रूप से 'श्रमिकों का त्योहार' है - एकमात्र प्रमुख हिंदू त्योहार जो घरों के बजाय कार्यस्थलों पर केंद्रित है।
परंपरागत रूप से कौन मनाता है:
1. इंजीनियर और वास्तुकार। 2. फैक्ट्री श्रमिक, मैकेनिक। 3. बढ़ई, लोहार, सुनार। 4. ड्राइवर। 5. आईटी पेशेवर। 6. निर्माण श्रमिक। 7. दर्जी, बुनकर।
यह क्यों मायने रखता है:
प्राचीन ज्ञान: 'आपके औज़ार आपके दिव्य साथी हैं।'
1. औज़ार लंबे समय तक चलते हैं। 2. सुरक्षा बेहतर होती है। 3. काम में गर्व बढ़ता है।
भारत के औद्योगिक बेल्ट में, बिस्वकर्मा पूजा राज्य-स्तरीय छुट्टी है।
आधुनिक अनुकूलन:
- आईटी कंपनियाँ।
- स्टार्टअप।
- ड्राइवर।
- होम-आधारित फ्रीलांसर।
- रेस्तरां रसोई।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिस्वकर्मा पूजा हमेशा 17 सितंबर को क्यों होती है?+
अधिकांश हिंदू त्योहार चांद्र कैलेंडर का पालन करते हैं जहाँ तिथि सालाना ग्रेगोरियन तारीख के सापेक्ष बदलती है। बिस्वकर्मा पूजा सौर कैलेंडर का पालन करती है - यह कन्या संक्रांति पर पड़ती है, जब सूर्य कन्या में प्रवेश करता है।
क्या मैं अपने लैपटॉप और काम के औज़ारों के लिए घर पर बिस्वकर्मा पूजा कर सकता हूँ?+
हाँ, बिल्कुल। बिस्वकर्मा पूजा किसी के लिए भी खुली है जिसकी आजीविका औज़ारों पर निर्भर करती है। अपने लैपटॉप/औज़ारों को साफ कपड़े पर रखें, छोटा सिंदूर + चंदन तिलक लगाएँ, फूल चढ़ाएँ।
बिस्वकर्मा और विश्वकर्मा वर्तनी में क्या अंतर है?+
दोनों एक ही देवता को संदर्भित करते हैं। अंतर पूरी तरह से ध्वन्यात्मक है - क्षेत्रीय उच्चारण पर आधारित: 'बिस्वकर्मा' बंगाली, ओड़िया, असमिया, और नेपाली बोलने वाले इसे ऐसे उच्चारित करते हैं। 'विश्वकर्मा' संस्कृत और हिंदी उच्चारण है।
क्या बिस्वकर्मा पूजा 2026 में सार्वजनिक अवकाश है?+
बिस्वकर्मा पूजा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, और त्रिपुरा में राज्य-सीमित अवकाश है। यह राष्ट्रीय अवकाश नहीं है।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
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