भगवान दत्तात्रेय कौन हैं
भगवान दत्तात्रेय, जिन्हें गुरु दत्त कहा जाता है, त्रिमूर्ति - ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) के एक रूप में अद्वितीय संयुक्त अवतार हैं। महर्षि अत्रि और सती अनसूया के पुत्र, उन्हें तीन सिर और छह भुजाओं के साथ, चार कुत्तों (चार वेद) और एक गाय (पृथ्वी व धर्म) सहित दर्शाया जाता है। वे आदि गुरु के रूप में पूजित हैं, योग व अवधूत परंपराओं के प्रथम गुरु, जो साधकों को अहंकार से परे सच्चे ज्ञान और मोक्ष की ओर ले जाते हैं।
महत्व और गुरु परंपरा
दत्तात्रेय गुरु परंपरा (गुरु परम्परा) के हृदय हैं। कहा जाता है उन्होंने प्रकृति से लिए 24 गुरुओं - पृथ्वी, जल, वायु, मधुमक्खी, अजगर आदि - से सीखा, यह सिखाते हुए कि विनम्र मन को ज्ञान सर्वत्र मिल सकता है। सृष्टि, पालन और संहार के संगम रूप में वे साधक के त्रिविध ताप दूर करते और सांसारिक राहत व आध्यात्मिक उन्नति दोनों देते हैं। श्रीपाद श्री वल्लभ और नृसिंह सरस्वती जैसे महान संत उनके परवर्ती अवतार माने जाते हैं।
दत्तात्रेय आरती
गुरु दत्त के सामने घी का दीपक जलाएँ, विशेषकर गुरुवार को, और गाएँ:
जय देव जय देव जय श्री गुरु दत्त। आरती ओवालू, चरणी ठेवुनी माथा। त्रिमुख-षड्भुज रूपा, ब्रह्मा-विष्णु-महा। अनसूया-नंदन, तारो भव-सरिता।
दीपक को दक्षिणावर्त घुमाएँ, उनके चरणों में पुष्प अर्पित करें, और 'दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा' की प्रार्थना के साथ प्रणाम करें।
दत्तात्रेय मंत्र और जाप

सबसे प्रिय दत्त मंत्र हैं:
ॐ श्री गुरुदेव दत्ताय नमः
और लयबद्ध जाप:
दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा
एक शक्तिशाली गायत्री रूप है ॐ दत्तात्रेयाय विद्महे, योगीश्वराय धीमहि, तन्नो दत्त प्रचोदयात्। गुरुवार प्रातः रुद्राक्ष माला पर 108 बार जप करें, सच्चा गुरु, मन की स्पष्टता और सांसारिक बंधन से मुक्ति की कामना करते हुए।
दत्तात्रेय पूजा विधि
गुरुवार गुरु दत्त को पवित्र है। एक सरल विधि: 1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ, यथासंभव पीले या श्वेत वस्त्र पहनें। 2. गुरु दत्त का चित्र या पादुका (पवित्र चरण-पादुका) रखें और घी का दीपक व धूप जलाएँ। 3. पीले या श्वेत पुष्प, तुलसी, और दूध, फल या मिठाई का भोग अर्पित करें। 4. 'ॐ श्री गुरुदेव दत्ताय नमः' का 108 बार जप करें। 5. यदि रखते हों तो गुरु चरित्र का एक अध्याय या दत्त बावनी पढ़ें। 6. आरती करें और मार्गदर्शन की प्रार्थना करें, फिर प्रसाद बाँटें। गुरुवार को कुत्ते या गाय को भोजन कराना दत्त को विशेष प्रिय माना जाता है।
गुरु दत्त की उपासना के लाभ
भक्त दत्तात्रेय की उपासना सच्चा गुरु व आध्यात्मिक दिशा पाने, अहंकार व भ्रम मिटाने, और नकारात्मक शक्तियों व कठिन समय से रक्षा हेतु करते हैं। त्रिमूर्ति की संयुक्त शक्ति होने के कारण उनकी कृपा आंतरिक शांति, साधना में स्थिर प्रगति, पुराने कष्टों से राहत, और शांत, समर्पित हृदय से धर्म के मार्ग पर चलने का बल देती मानी जाती है।
दत्त जयंती और पवित्र स्थान

दत्त जयंती, भगवान दत्तात्रेय का जन्मोत्सव, मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को आती है, जब भक्त उपवास रखते, गुरु चरित्र पढ़ते और रातभर भजन करते हैं। प्रमुख तीर्थों में महाराष्ट्र का गाणगापुर व नृसिंहवाड़ी और गुजरात का गिरनार शामिल हैं, जहाँ उनकी पादुकाएँ अत्यंत पूजनीय हैं। दत्त उपासना महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में विशेष प्रिय है।
त्वरित उत्तर
दत्तात्रेय कौन हैं?+
दत्तात्रेय, या गुरु दत्त, ब्रह्मा, विष्णु और महेश के एक रूप में संयुक्त अवतार हैं। महर्षि अत्रि और अनसूया के पुत्र, वे आदि गुरु के रूप में पूजित हैं, योग व अवधूत परंपराओं के प्रथम गुरु।
मुख्य दत्तात्रेय मंत्र क्या है?+
मुख्य मंत्र 'ॐ श्री गुरुदेव दत्ताय नमः' है, जिसे अक्सर 'दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा' जाप के साथ, गुरुवार को रुद्राक्ष माला पर 108 बार जपा जाता है।
गुरु दत्त की उपासना के लिए कौन सा दिन सर्वोत्तम है?+
गुरुवार गुरु दत्त को पवित्र है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा की दत्त जयंती उनका सबसे महत्वपूर्ण पर्व है, जो उपवास, गुरु चरित्र पाठ और रातभर भजनों के साथ मनाया जाता है।
दत्तात्रेय के साथ कुत्ते और गाय क्यों दर्शाए जाते हैं?+
चार कुत्ते उनके पीछे चलने वाले चार वेदों का और गाय पृथ्वी व धर्म का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये दर्शाते हैं कि समस्त ज्ञान और प्रकृति का सहयोग आदि गुरु के साथ है।
दत्तात्रेय को 24 गुरुओं का गुरु क्यों कहा जाता है?+
दत्तात्रेय ने कहा कि उन्होंने प्रकृति से लिए 24 गुरुओं, जैसे पृथ्वी, जल, वायु और मधुमक्खी, से सीखा। यह सिखाता है कि विनम्र साधक सृष्टि में सर्वत्र ज्ञान पा सकता है।
दत्तात्रेय की उपासना के क्या लाभ हैं?+
गुरु दत्त की उपासना सच्चा गुरु व आध्यात्मिक दिशा देने, अहंकार व भ्रम मिटाने, नकारात्मकता व कठिन समय से रक्षा करने, और आंतरिक शांति व साधना में स्थिर प्रगति लाने वाली मानी जाती है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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