भक्ति के दो तीज पर्व
हरियाली तीज और हरतालिका तीज सबसे प्रिय तीज पर्वों में दो हैं, दोनों भगवान शिव और माँ पार्वती के पवित्र मिलन का उत्सव मनाते हैं। इन्हें मुख्यतः विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु हेतु और अविवाहित कन्याएँ अच्छे वर की कामना से रखती हैं। यद्यपि इनमें वही दिव्य युगल व वैवाहिक सुख का विषय समान है, ये भिन्न मासों में पड़ते हैं और उपवास की कठोरता में बहुत भिन्न हैं, जो तुलना का मूल है। सटीक तिथि स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
हरियाली तीज - श्रावण, झूले और मानसून
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया (श्रावण के शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि) को पड़ती है, मानसून के मध्य (लगभग जुलाई-अगस्त) में। इसका नाम हरियाली से आता है, क्योंकि वर्षा धरती को हरा-भरा कर देती है। स्त्रियाँ हरे वस्त्र व चूड़ियाँ पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं, लोकगीत गाती हैं और पेड़ों से बँधे झूलों (झूला) का आनंद लेती हैं। यह उस दिन का उत्सव है जब शिव ने पार्वती को स्वीकार किया, और भाव उत्सवमय, आनंदपूर्ण व गीतों से भरा होता है। यहाँ उपवास सामान्यतः कोमल होता है, और अनेक इसे फल या एक भोजन के साथ रखती हैं।
हरतालिका तीज - भाद्रपद और कठोर उपवास
हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया (भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि) को पड़ती है, हरियाली तीज के लगभग एक मास बाद (लगभग अगस्त-सितंबर)। नाम हरत (अपहरण) व आलिका (सखी) से आता है - वह कथा कि कैसे पार्वती की सखी उन्हें ले गई ताकि वे अन्यत्र विवाह के बजाय तप से शिव को पा सकें। इसकी विशेषता पूरे दिन-रात रखा जाने वाला अत्यंत कठोर निर्जला (जलरहित) उपवास है, रातभर शिव-पार्वती की मिट्टी की मूर्ति की पूजा के साथ। यह स्त्रियों के सबसे कठोर व्रतों में है।
तीज व्रतों के पीछे की कथा

दोनों पर्व पार्वती की तपस्या का सम्मान करते हैं जो उन्होंने शिव को पति रूप में पाने हेतु की। कथा अनुसार, पार्वती ने अनेक जन्मों तक कठोर तप किया, अन्य सभी वरों को अस्वीकार करते हुए। हरतालिका कथा में, उनके पिता उन्हें विष्णु से विवाह देना चाहते थे, अतः एक प्रिय सखी (सखी) ने उन्हें गुप्त रूप से वन में ले जाकर वहाँ रेत का शिवलिंग बनाकर पूर्ण भक्ति से पूजा कराई। उनके संकल्प से द्रवित होकर शिव ने उन्हें अपनी शाश्वत संगिनी स्वीकार किया। प्रेम व अडिग तप की यही विजय हर स्त्री तीज व्रत रखते हुए स्मरण करती है।
तुलना - मुख्य अंतर और समानताएँ
कौन रखता है: दोनों - विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु हेतु, अविवाहित कन्याएँ अच्छे वर हेतु। तिथि व मास: हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया (जुलाई-अगस्त); हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया (अगस्त-सितंबर), लगभग एक मास बाद। देवता: दोनों शिव और पार्वती की पूजा करते और उनके मिलन का उत्सव मनाते हैं। उपवास: हरियाली तीज सामान्यतः कोमल (फल या एक भोजन); हरतालिका तीज पूरे दिन-रात कठोर निर्जला उपवास। भाव व अनुष्ठान: हरियाली तीज हरे वस्त्र, मेहंदी व झूलों के साथ उत्सवमय; हरतालिका तीज कठोर, रातभर मिट्टी की शिव-पार्वती मूर्ति की पूजा के साथ। मुख्य अंतर: मास और उपवास की कठोरता - वही दिव्य युगल व लक्ष्य, भिन्न तीव्रता।
तीज व्रत कैसे रखे जाते हैं
सामान्य पूजा विधि समान है, हरतालिका अधिक कठोर: 1. भोर से पहले उठें, स्नान करें और उत्सव के वस्त्र पहनें (हरियाली हेतु हरा)। 2. मेहंदी व सोलह शृंगार करें। 3. हरतालिका हेतु शिव, पार्वती व गणेश की मूर्ति (अक्सर मिट्टी की) बनाएँ या रखें और रातभर पूजा करें। 4. बेल पत्र, पुष्प, फल व मिठाई अर्पित करें, और दीप जलाएँ। 5. तीज व्रत कथा सुनें या पढ़ें। 6. पर्व अनुसार व्रत रखें - हरियाली हेतु कोमल, हरतालिका हेतु कठोर निर्जला - और अगली सुबह खोलें। स्त्रियाँ वैवाहिक सुख, पति के कल्याण व पारिवारिक सामंजस्य की प्रार्थना करती हैं।
त्वरित उत्तर
हरियाली और हरतालिका तीज में मुख्य अंतर क्या है?+
दोनों शिव-पार्वती की पूजा करते हैं, पर भिन्न मासों में पड़ते हैं और उपवास में भिन्न हैं। हरियाली तीज (श्रावण) में कोमल उपवास व उत्सवमय झूले होते हैं, जबकि हरतालिका तीज (भाद्रपद) में कठोर निर्जला उपवास होता है।
हरियाली तीज और हरतालिका तीज कब पड़ती हैं?+
हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया (लगभग जुलाई-अगस्त) को, और हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया (लगभग अगस्त-सितंबर) को, लगभग एक मास बाद पड़ती है। सटीक तिथि पंचांग से पुष्टि करें।
तीज पर किस देवता की पूजा होती है?+
दोनों तीज पर्व भगवान शिव और माँ पार्वती की पूजा करते हैं, उनके दिव्य मिलन का उत्सव मनाते हुए। हरतालिका तीज पर अक्सर शिव, पार्वती व गणेश की मिट्टी की मूर्ति की रातभर पूजा होती है।
हरतालिका तीज इतनी कठोर क्यों मानी जाती है?+
हरतालिका तीज में निर्जला उपवास होता है, पूरे दिन-रात बिना भोजन या जल के, रातभर पूजा के साथ। यह शिव को पाने हेतु पार्वती की तीव्र तपस्या को दर्शाता है और स्त्रियों के सबसे कठोर व्रतों में है।
हरियाली तीज पर स्त्रियाँ हरा क्यों पहनती हैं?+
हरियाली का अर्थ है हरीतिमा, हरे-भरे मानसून का उत्सव। स्त्रियाँ हरे वस्त्र व चूड़ियाँ पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और झूले झूलती हैं, क्योंकि हरा ताजगी, उर्वरता व वर्षा ऋतु के आनंद का प्रतीक है।
क्या अविवाहित कन्याएँ तीज व्रत रख सकती हैं?+
हाँ। अविवाहित कन्याएँ पार्वती के भक्ति आदर्श का अनुसरण करते हुए अच्छे व स्नेही वर की प्रार्थना हेतु तीज व्रत रखती हैं। विवाहित स्त्रियाँ इसे अपने पति की दीर्घायु व कल्याण हेतु रखती हैं।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
Meet the Vandnaa editorial team →Explore on Vandnaa
संबंधित लेख

वट सावित्री बनाम वट पूर्णिमा - अंतर और व्रत
9 मिनट पढ़ें

पोंगल 2027 - महत्व और 4-दिवसीय उत्सव
9 मिनट पढ़ें

कुंभ मेला - महत्व, इतिहास और पवित्र स्नान
10 मिनट पढ़ें

शिव आरती – ॐ जय शिव ओमकारा लिरिक्स हिंदी में
13 मिनट पढ़ें

ॐ नमः शिवाय मंत्र के फायदे और अर्थ
9 मिनट पढ़ें

दुर्गा आरती – अम्बे तू है जगदम्बे काली लिरिक्स
8 मिनट पढ़ें