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वट सावित्री बनाम वट पूर्णिमा - अंतर और व्रत
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वट सावित्री बनाम वट पूर्णिमा - अंतर और व्रत

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

एक पवित्र व्रत के दो नाम

वट सावित्री और वट पूर्णिमा एक ही पूज्य व्रत के दो क्षेत्रीय रूप हैं, जिन्हें *विवाहित स्त्रियाँ (सुहागन) रखती हैं जो अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य व समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। दोनों वट (बरगद) वृक्ष की पूजा और सावित्री की अमर कथा पर केंद्रित हैं, जिसने अपने पति सत्यवान को स्वयं यम से वापस जीत लिया। ये पर्व ज्येष्ठ चंद्र मास (लगभग मई-जून) में पर भिन्न तिथियों पर पड़ते हैं, लगभग पंद्रह दिन के अंतर* से, जो इनके बीच अंतर का मूल है। तिथि स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

वट सावित्री व्रत - उत्तर और पश्चिम भारत

वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या (ज्येष्ठ की अमावस्या) को मनाया जाता है। यह उत्तर व पश्चिम भारत में सर्वाधिक प्रचलित है - उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र व निकटवर्ती क्षेत्र। स्त्रियाँ प्रातः उठती हैं, दुल्हन की साज-सज्जा व सोलह शृंगार करती हैं, और वट वृक्ष पर एकत्र होकर सावित्री-सत्यवान कथा सुनते हुए इसके तने पर पवित्र धागा बाँधती हैं। अनेक दिनभर कठोर व्रत रखती हैं, अपने पति की रक्षा व सौभाग्य की अखंडता की प्रार्थना करते हुए।

वट पूर्णिमा व्रत - महाराष्ट्र, गुजरात, दक्षिण

वट पूर्णिमा व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा (ज्येष्ठ की पूर्णिमा) को मनाया जाता है, अमावस्या के लगभग पंद्रह दिन बाद। यह महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा व दक्षिण भारत के कुछ भागों में प्रचलित रूप है। अनुष्ठान लगभग समान हैं - विवाहित स्त्रियाँ वट की पूजा करती हैं, धागा लपेटते हुए सात बार परिक्रमा करती हैं, जल अर्पित करती हैं और पति की दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। मुख्य अंतर केवल तिथि है: पूर्णिमांत पंचांग मानने वाले वही क्षेत्र व्रत को अमावस्या के बजाय पूर्णिमा पर रखते हैं।

सावित्री और सत्यवान की कथा

सावित्री और सत्यवान की कथा

व्रत अपनी शक्ति महाभारत की सावित्री कथा से लेता है। भक्त सावित्री ने सत्यवान से विवाह किया, यह जानते हुए कि एक ऋषि की भविष्यवाणी अनुसार वह एक वर्ष में मर जाएगा। नियत दिन, जब मृत्यु के स्वामी यम उसकी आत्मा लेने आए, सावित्री अटूट भक्ति व बुद्धिमान वाणी से उनके पीछे चली। प्रसन्न होकर यम ने उसे कई वर दिए, और अपनी चतुराई से उसने ऐसा वर पाया जिसने सत्यवान को जीवन लौटा दिया। वट वृक्ष के नीचे उसका अडिग प्रेम हर उस स्त्री द्वारा सम्मानित शाश्वत आदर्श है जो यह व्रत रखती है।

तुलना - मुख्य अंतर और समानताएँ

कौन रखता है: दोनों - विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु हेतु। तिथि: वट सावित्री ज्येष्ठ अमावस्या को; वट पूर्णिमा ज्येष्ठ पूर्णिमा को (लगभग 15 दिन बाद)। क्षेत्र: वट सावित्री उत्तर व पश्चिम भारत में; वट पूर्णिमा महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा व दक्षिण में। देवता व केंद्र: दोनों वट वृक्ष की पूजा करते और सावित्री-सत्यवान का स्मरण करते हैं; सावित्री, सत्यवान व यम दोनों में केंद्रीय हैं। अनुष्ठान: दोनों वट पर धागा बाँधते, परिक्रमा करते, जल अर्पित करते और कथा सुनते हैं। मुख्य अंतर: मूलतः भिन्न क्षेत्रों में अपनाया गया पंचांग (अमावस्या बनाम पूर्णिमा) - व्रत, अर्थ व अनुष्ठान अन्यथा समान हैं।

व्रत कैसे रखा जाता है

पूजा विधि दोनों के लिए समान है: 1. प्रातः उठें, स्नान करें और दुल्हन के वस्त्र व सोलह शृंगार करें। 2. दिनभर व्रत रखें (प्रायः निर्जला या केवल फलाहार)। 3. वट वृक्ष के पास जाएँ, उसका आधार साफ करें और जल, रोली, चावल, पुष्प व फल अर्पित करें। 4. सात बार परिक्रमा करते हुए तने पर कच्चा सूती धागा लपेटें। 5. सावित्री-सत्यवान कथा सुनें या पढ़ें। 6. भोग अर्पित करें, बड़ों का आशीर्वाद लें, और पूजा के बाद व्रत खोलें। विवाहित स्त्रियाँ पूरे समय अपने पति की दीर्घायु व स्थायी वैवाहिक सामंजस्य की प्रार्थना करती हैं।

त्वरित उत्तर

क्या वट सावित्री और वट पूर्णिमा एक ही हैं?+

ये समान अर्थ व अनुष्ठान वाला एक ही व्रत हैं, पर भिन्न तिथियों पर मनाया जाता है। वट सावित्री ज्येष्ठ अमावस्या को, और वट पूर्णिमा ज्येष्ठ पूर्णिमा को, लगभग पंद्रह दिन बाद पड़ती है।

ये व्रत कौन रखता है?+

दोनों व्रत विवाहित स्त्रियाँ रखती हैं, जो सावित्री के आदर्श का अनुसरण करते हुए अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य व समृद्धि और स्थायी वैवाहिक सामंजस्य की प्रार्थना करती हैं।

वट वृक्ष की पूजा क्यों होती है?+

वट वृक्ष दीर्घायु व अमरता का प्रतीक है, क्योंकि यह सदियों जीवित रहता है। सावित्री ने वट के नीचे सत्यवान को जीवित किया, अतः स्त्रियाँ पति की दीर्घायु की प्रार्थना करते हुए इस पर धागा बाँधती और परिक्रमा करती हैं।

कौन से क्षेत्र वट सावित्री और कौन वट पूर्णिमा मानते हैं?+

अमावस्या को वट सावित्री उत्तर व पश्चिम भारत जैसे यूपी, बिहार व एमपी में प्रचलित है, जबकि पूर्णिमा को वट पूर्णिमा महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा व दक्षिण भारत के भागों में प्रचलित रूप है।

सावित्री-सत्यवान कथा क्या सिखाती है?+

यह भक्ति, बुद्धि व अडिग प्रेम की शक्ति सिखाती है। सावित्री की दृढ़ श्रद्धा व चतुर वाणी ने यम को उसके पति सत्यवान को जीवन लौटाने पर राजी किया, जिससे वह भक्त पत्नी का शाश्वत आदर्श बनी।

वट व्रत का उपवास कैसे रखा जाता है?+

अनेक स्त्रियाँ दिनभर निर्जला (जलरहित) या केवल फलाहार व्रत रखती हैं, दुल्हन की साज-सज्जा करती हैं, वट वृक्ष की पूजा करती हैं, कथा सुनती हैं और पूजा के बाद बड़ों के आशीर्वाद से व्रत खोलती हैं।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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