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तुलसी पूजा प्रतिदिन कैसे करें - विधि, नियम और रीति
Daily Rituals

तुलसी पूजा प्रतिदिन कैसे करें - विधि, नियम और रीति

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

तुलसी की पूजा क्यों होती है

तुलसी हिंदू परंपरा का सबसे पवित्र पौधा है, जिसे तुलसी माता, देवी लक्ष्मी का रूप और भगवान विष्णु की प्रिया, मानकर पूजा जाता है। जिस घर में तुलसी की पूजा होती है, वह पवित्रता, समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति से आशीर्वादित माना जाता है। दैनिक तुलसी पूजा एक सरल, कोमल अनुष्ठान है जिसे कोई भी कर सकता है, जो घर में सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य कृपा खींचता है।

तुलसी कहाँ रखें

तुलसी के पौधे को घर या आँगन के उत्तर, ईशान या पूर्व में रखें, जहाँ प्रातः की धूप मिले; परंपरागत रूप से यह ऊँचे तुलसी वृंदावन या स्वच्छ गमले में रहता है। इसके आसपास का क्षेत्र स्वच्छ और अव्यवस्था, जूते व कूड़ेदान से मुक्त रखें। तुलसी को दक्षिण में, अँधेरे कोनों में, या कचरे के पास न रखें। स्वच्छ, धूपयुक्त, सम्मानपूर्ण स्थान पौधे को स्वस्थ और पूजा को शुभ रखता है।

प्रातःकालीन तुलसी पूजा विधि

1. प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ शरीर और वस्त्रों के साथ तुलसी माता के पास जाएँ। 2. पौधे को कोमलता से ताज़ा जल अर्पित करें (रविवार और एकादशी को जल न चढ़ाएँ, जब तुलसी विश्राम या व्रत में मानी जाती हैं)। 3. थोड़ी रोली या कुमकुम लगाएँ और जड़ पर अक्षत (चावल) व एक पुष्प अर्पित करें। 4. हाथ जोड़कर सरल प्रार्थना या ॐ तुलसायै नमः या तुलसी मंत्र का जप करें। 5. पौधे की सम्मानपूर्ण परिक्रमा करें, आदर्श रूप से तीन बार। अर्पण सरल और हृदय भक्तिमय रखें; भव्य कर्मकांड से अधिक निरंतरता मायने रखती है।

संध्या दीप और परिक्रमा

संध्या दीप और परिक्रमा

संध्या को, गोधूलि के समय, तुलसी के पौधे के पास घी या तेल का दीया जलाएँ। यह सबसे प्रिय दैनिक अभ्यासों में से एक है, जो लक्ष्मी को आमंत्रित करता और घर से नकारात्मकता दूर करता माना जाता है। हाथ जोड़ें, संक्षिप्त प्रार्थना करें, और चाहें तो पुनः परिक्रमा करें। संध्या-बेला में तुलसी दीप की कोमल आभा पूरे परिवार के लिए गहराई से पवित्र और शुभ मानी जाती है।

महत्वपूर्ण नियम और रीति

पूजा को शुद्ध रखने हेतु ये नियम पालें: 1. सूर्यास्त के बाद, रविवार, एकादशी या ग्रहण के समय तुलसी पत्र न तोड़ें; पत्ते आवश्यक हों तो दिन में कोमलता व सम्मान से लें। 2. नाखूनों से रूखेपन से या बिना कारण पत्ते कभी न तोड़ें; पहले संक्षिप्त प्रार्थना करें। 3. सदा स्नान के बाद, स्वच्छ हाथ-पैर से जाएँ। 4. पौधे को भली भाँति सींचें (रविवार व एकादशी छोड़कर) और सूखे पत्ते सावधानी से हटाएँ। 5. पौधे को सूखने या लापरवाही से न रखें, क्योंकि मुरझाई तुलसी अशुभ मानी जाती है। सम्मान और नियमित देखभाल ही तुलसी सेवा का सच्चा मर्म है।

दैनिक तुलसी पूजा के लाभ

दैनिक तुलसी पूजा घर में लक्ष्मी के समृद्धि, सामंजस्य व उत्तम स्वास्थ्य के आशीर्वाद लाती और वातावरण को शुद्ध करती मानी जाती है। पौधा स्वयं आयुर्वेद में रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और वायु शुद्ध करने हेतु मूल्यवान है। इससे परे, सरल प्रातः-संध्या दिनचर्या पारिवारिक जीवन में अनुशासन, कृतज्ञता और शांत, भक्तिमय लय भरती है, जो हर आकार के परिवारों हेतु सुंदर दैनिक आधार बनती है।

भक्तों के सामान्य प्रश्न

क्या तुलसी को प्रतिदिन जल चढ़ा सकते हैं?+

हाँ, प्रतिदिन प्रातः ताज़ा जल अर्पित करें, रविवार और एकादशी को छोड़कर जब तुलसी विश्राम या व्रत में मानी जाती हैं। स्नान के बाद, स्वच्छ शरीर व वस्त्रों के साथ जाएँ।

सूर्यास्त के बाद तुलसी पत्र क्यों न तोड़ें?+

तुलसी सूर्यास्त के बाद विश्राम में मानी जाती हैं, अतः तब पत्ते नहीं तोड़े जाते, न ही रविवार, एकादशी या ग्रहण में। आवश्यकता हो तो दिन में सम्मान व संक्षिप्त प्रार्थना के साथ कोमलता से लें।

घर में तुलसी का पौधा कहाँ रखें?+

तुलसी को उत्तर, ईशान या पूर्व में रखें जहाँ प्रातः की धूप मिले, आदर्श रूप से ऊँचे तुलसी वृंदावन में। आसपास का क्षेत्र स्वच्छ और जूते, अव्यवस्था व कूड़ेदान से मुक्त रखें।

तुलसी के पास दीया जलाने का क्या लाभ है?+

तुलसी के पौधे पर संध्या दीप जलाना देवी लक्ष्मी को आमंत्रित करता, नकारात्मकता दूर करता, और शांति व समृद्धि लाता माना जाता है। यह सबसे प्रिय दैनिक गृह अनुष्ठानों में से एक है।

तुलसी पूजा के समय कौन सा मंत्र जपें?+

जल अर्पित करते और परिक्रमा करते समय 'ॐ तुलसायै नमः' या सरल तुलसी प्रार्थना जप सकते हैं। लंबे या कठिन मंत्र से अधिक सच्चा, भक्तिमय हृदय मायने रखता है।

क्या तुलसी का पौधा सूख जाना अशुभ है?+

मुरझाई तुलसी अशुभ मानी जाती है, अतः पौधे को नियमित सींचना व देखभाल करनी चाहिए। देखभाल के बावजूद सूख जाए तो उसे कोमलता से बहते जल में प्रवाहित करें और प्रेमपूर्वक नया लगाएँ।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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