जप माला क्या है
जप माला मनकों की लड़ी है जो जप के दौरान मंत्र की आवृत्तियाँ गिनने हेतु प्रयुक्त होती है, जप अर्थात किसी दिव्य नाम या पवित्र ध्वनि के उच्चारण का अभ्यास। यह मन को गिनती से मुक्त करती है ताकि भक्त मंत्र पर पूर्ण ध्यान दे सके। मालाएँ शिव उपासना हेतु रुद्राक्ष, विष्णु व कृष्ण हेतु तुलसी, शांति हेतु स्फटिक, और विशेष संकल्पों हेतु चंदन या रत्नों से बनती हैं। माला दैनिक अभ्यास में एक व्यक्तिगत व पवित्र साथी बन जाती है।
108 मनके क्यों
एक पारंपरिक जप माला में *108 मनके और एक अतिरिक्त मनका होता है जिसे सुमेरु (या मेरु) कहते हैं*। संख्या 108 हिंदू, योग व खगोलीय परंपराओं में पवित्र है - यह 12 राशियों को 9 ग्रहों से, 27 नक्षत्रों को 4 दिशाओं में, और एक दिन के श्वास चक्रों से जोड़ती है। 108 आवृत्तियाँ पूर्ण करना जप का एक पूरा दौर माना जाता है। बड़ा सुमेरु मनका प्रत्येक दौर के आरंभ व अंत को चिह्नित करता और परमात्मा का प्रतीक है, जो सभी जप का लक्ष्य है।
माला से जप कैसे करें
अपने जप को स्थिर व शुद्ध बनाने हेतु माला का सजगता से उपयोग करें: 1. पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर शांति से बैठें, आदर्श रूप से स्नान के बाद, प्रातःकाल। 2. माला दाएँ हाथ में पकड़ें, मध्यमा अंगुली पर लटकाते हुए। 3. सुमेरु के पास वाले मनके से आरंभ करें और प्रत्येक मनका अंगूठे से अपनी ओर घुमाएँ, मध्यमा का उपयोग करते हुए, हर मनके पर मंत्र एक बार जपते हुए। 4. तर्जनी अंगुली का उपयोग न करें, जो जप हेतु अशुद्ध मानी जाती है। 5. 108 मनकों के बाद आप सुमेरु तक पहुँचते हैं - इसे न लाँघें। 6. आगे जारी रखने हेतु माला को पलटें और दूसरी दिशा में जपें, हर दौर में सुमेरु को मोड़-बिंदु रखते हुए।
माला जप के महत्वपूर्ण नियम

कुछ नियम माला जप को सम्मानजनक व प्रभावी रखते हैं। 1. सुमेरु को कभी न लाँघें - इस तक पहुँचने पर हमेशा माला पलटें। 2. हाथ व माला को ढकने हेतु गौमुखी (कपड़े की थैली) का उपयोग करें ताकि जप निजी व सुरक्षित रहे। 3. माला को फर्श या पैरों से छूने न दें, और अपनी निजी माला दूसरों को उपयोग न करने दें। 4. एक माला एक मंत्र या देवता हेतु समर्पित रखें ताकि निरंतरता रहे। 5. स्थिर गति से जपें - न जल्दबाज़ी, न उनींदापन - और मन मंत्र के अर्थ पर रखें। उपयोग में न होने पर माला स्वच्छ वस्त्र में या अपने मंदिर में रखें।
जप के लिए सरल मंत्र
आरंभ करने वाले किसी भी छोटे, परिचित मंत्र से शुरू कर 108 का एक पूरा दौर जप सकते हैं। कुछ लोकप्रिय विकल्प हैं:
ॐ नमः शिवाय (शिव हेतु), ॐ नमो भगवते वासुदेवाय (विष्णु हेतु), हरे कृष्ण हरे राम (कृष्ण व राम हेतु), या केवल ॐ।
स्थिरता हेतु प्रतिदिन वही मंत्र जपें। 108 का एक दौर भी, शांति व ध्यान से किया गया, मन को स्थिर करता और समय के साथ भक्ति को गहरा करता है।
अपनी माला की देखभाल
माला को पवित्र वस्तु मानें, आभूषण नहीं। इसे स्वच्छ व सूखा रखें, और रुद्राक्ष या तुलसी माला सोते, स्नान करते या अशुद्ध स्थानों पर जाते समय न पहनें, जब तक कि वह अभिमंत्रित धारण-माला न हो। नियमित उपयोग से पहले नई माला को अपने चुने मंत्र का 108 बार जप कर अभिमंत्रित करें। इसे सूखे वस्त्र से कोमलता से पोंछें और धागा कमज़ोर होने पर आदरपूर्वक पुनः पिरोएँ, पुराने मनके कभी लापरवाही से न फेंकें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जप माला में 108 मनके क्यों होते हैं?+
संख्या 108 हिंदू व योग परंपरा में पवित्र है, जो राशियों, ग्रहों, नक्षत्रों व श्वास चक्रों को जोड़ती है। 108 आवृत्तियाँ पूर्ण करना जप का एक पूरा दौर गिना जाता है, इसे चिह्नित करने हेतु एक अतिरिक्त सुमेरु मनका होता है।
सुमेरु मनका क्या है और इसे क्यों नहीं लाँघना चाहिए?+
सुमेरु बड़ा मनका है जो दौर के आरंभ व अंत को चिह्नित करता और परमात्मा का प्रतीक है। इसे लाँघना अनादर माना जाता है, इसलिए इस तक पहुँचने पर आप माला पलटकर दूसरी दिशा में जपते हैं।
जप के लिए कौन सा हाथ और अंगुलियाँ उपयोग करनी चाहिए?+
दायाँ हाथ उपयोग करें, माला मध्यमा अंगुली पर लटकाकर मनके अंगूठे से घुमाएँ। तर्जनी अंगुली से बचा जाता है, क्योंकि यह जप हेतु अशुद्ध मानी जाती है।
गौमुखी क्या है और इसका उपयोग क्यों होता है?+
गौमुखी एक कपड़े की थैली है जो जप के दौरान हाथ व माला को ढकती है। यह अभ्यास को निजी रखती, माला की रक्षा करती और भक्त को बिना विचलन भीतर की ओर ध्यान केंद्रित करने में सहायता करती है।
क्या एक ही माला विभिन्न मंत्रों के लिए उपयोग की जा सकती है?+
निरंतरता व एकाग्रता हेतु एक माला एक मंत्र या देवता को समर्पित रखना सर्वोत्तम है। एक माला पर अनेक मंत्र मिलाना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि समर्पित माला एक मजबूत, स्थिर अभ्यास बनाती है।
जप माला की देखभाल कैसे करनी चाहिए?+
माला स्वच्छ व सूखी रखें, इसे फर्श या पैरों से कभी न छूने दें, और स्वच्छ वस्त्र में या मंदिर में रखें। इसे आभूषण नहीं, पवित्र वस्तु मानें, और अपनी निजी माला दूसरों को उपयोग न करने दें।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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