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कार्तिकेय (मुरुगन) आरती, चालीसा और मंत्र - पूर्ण पूजा विधि
Deity Worship

कार्तिकेय (मुरुगन) आरती, चालीसा और मंत्र - पूर्ण पूजा विधि

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित मई 31, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) कौन हैं

भगवान कार्तिकेय शिव और पार्वती के बड़े पुत्र तथा गणेश के छोटे भाई हैं। पूरे भारत में उन्हें कई नामों से प्रेम किया जाता है - तमिलनाडु में मुरुगन, पुराणों में स्कंद, कर्नाटक में सुब्रमण्य और बंगाल में कार्तिक। वे देवताओं की सेना के सेनापति हैं, मोर पर सवार रहते हैं और दिव्य भाला वेल धारण करते हैं। भक्त उनसे साहस, शत्रुओं पर विजय, तीव्र एकाग्रता और रक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं।

महत्व और प्रतीक

कार्तिकेय का जन्म तारकासुर नामक राक्षस का वध करने के लिए हुआ, जो केवल शिव-पुत्र ही कर सकता था। उनका वेल अज्ञान को काटने वाले विवेक का प्रतीक है, और उनका मोर वाहन अहंकार व घमंड पर नियंत्रण दर्शाता है। उनकी उपासना वीरता के साथ ज्ञान भी देती है, इसीलिए उन्हें तारकजित और सेनापति भी कहा जाता है। स्कंद षष्ठी उनका सबसे महत्वपूर्ण पर्व है।

कार्तिकेय आरती - जय जय कार्तिकेय

घी का दीपक जलाकर, प्रातः या संध्या को, मूर्ति के सामने दीपक को दक्षिणावर्त घुमाते हुए यह आरती गाएँ:

जय जय कार्तिकेय स्वामी, शिव-सुवन सुखदाई। मोर वाहन पर सोहत, हाथ शक्ति वेल लाई। तारकासुर संहारी, देवन रक्षा कीन्ही। भक्त जनों की विपदा, पल में हारी लीन्ही।

अंत में परिवार को ज्योति अर्पित करें, आँखों पर आशीर्वाद लें और साहस व स्पष्ट दिशा की प्रार्थना करें।

कार्तिकेय चालीसा - सार और पाठ विधि

कार्तिकेय चालीसा - सार और पाठ विधि

कार्तिकेय चालीसा मुरुगन की छह मुख वाले षण्मुख रूप में स्तुति करती है, जो शिव के तेज से उत्पन्न हुए और छह कृत्तिका माताओं द्वारा पाले गए। पहले गणेश और शिव का आह्वान करते हुए दोहा पढ़ें, फिर चालीस चौपाइयाँ पढ़ें जो उनके जन्म, वेल, तारक पर विजय और वरदानों का वर्णन करती हैं। मंगलवार और स्कंद षष्ठी पर पाठ भय व बाधाओं को दूर करने में अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

मुरुगन बीज मंत्र और गायत्री

सबसे सरल और शक्तिशाली जप सरवण भव मंत्र है:

ॐ सरवण भवाय नमः

एकाग्र साधना के लिए कार्तिकेय गायत्री का प्रयोग करें:

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महासेनाय धीमहि, तन्नो षण्मुख प्रचोदयात्।

पूर्व की ओर मुख करके रुद्राक्ष माला पर 108 बार जप करें। बीज मंत्र चंचल मन को स्थिर करता है, अध्ययन को तीव्र करता है और परीक्षा, साक्षात्कार व कठिन कार्यों से पहले भय दूर करता है।

घर पर कार्तिकेय पूजा विधि

1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें; पूर्व की ओर मुख करें। 2. कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र रखें, घी का दीपक व धूप जलाएँ। 3. लाल या पीले पुष्प, चंदन और कुमकुम अर्पित करें। 4. फल, गुड़ या मीठे पोंगल का भोग लगाएँ। 5. ॐ सरवण भवाय नमः का 108 बार जप करें। 6. चालीसा पढ़ें, फिर आरती करें। 7. साहस, एकाग्रता व रक्षा की प्रार्थना करें और प्रसाद बाँटें। मंगलवार, षष्ठी तिथि और स्कंद षष्ठी सर्वाधिक शुभ दिन हैं।

कार्तिकेय की उपासना के लाभ

कार्तिकेय की उपासना के लाभ

भक्तों को अधिक साहस व आत्मविश्वास, प्रतिस्पर्धा और मुकदमों में विजय, भय व नकारात्मकता से मुक्ति, विद्यार्थियों के लिए तीव्र एकाग्रता और संतान की रक्षा का अनुभव होता है। शक्ति और ज्ञान दोनों के प्रतीक होने के कारण करियर, रक्षा सेवा, खेल और अध्ययन में सफलता चाहने वाले उनकी उपासना करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवान कार्तिकेय के माता-पिता कौन हैं?+

भगवान कार्तिकेय भगवान शिव और देवी पार्वती के पुत्र तथा भगवान गणेश के बड़े भाई हैं। उनका जन्म तारकासुर के विरुद्ध देवताओं का नेतृत्व करने के लिए हुआ।

मुरुगन का मुख्य मंत्र क्या है?+

मुख्य मंत्र 'ॐ सरवण भवाय नमः' है। पूर्व की ओर मुख करके रुद्राक्ष माला पर 108 बार जप साहस, एकाग्रता और भय से मुक्ति देता है।

कार्तिकेय की पूजा के लिए कौन सा दिन सर्वोत्तम है?+

मंगलवार और षष्ठी तिथि उत्तम हैं। तमिल मास ऐप्पासी (अक्टूबर से नवंबर) में पड़ने वाली स्कंद षष्ठी व्रत व विशेष पूजा के लिए उनका सबसे महत्वपूर्ण पर्व है।

कार्तिकेय मोर पर सवारी क्यों करते हैं?+

मोर अहंकार, घमंड और चंचल मन पर विजय का प्रतीक है। उस पर सवार होकर कार्तिकेय दर्शाते हैं कि सच्ची शक्ति अपने अभिमान पर नियंत्रण से आती है।

क्या विद्यार्थी अध्ययन के लिए कार्तिकेय की पूजा कर सकते हैं?+

हाँ। चूँकि कार्तिकेय वीरता और ज्ञान दोनों देते हैं, विद्यार्थी तीव्र एकाग्रता, आत्मविश्वास और परीक्षा-प्रतियोगिता में सफलता के लिए उनके बीज मंत्र व गायत्री का जप करते हैं।

भगवान मुरुगन को कौन से भोग प्रिय हैं?+

फल, गुड़ और मीठा पोंगल, साथ ही लाल या पीले पुष्प, चंदन और कुमकुम अर्पित करें। दक्षिण भारतीय मंदिरों में दूध अभिषेक और गन्ना भी लोकप्रिय भोग हैं।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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