कुबेर कौन हैं
कुबेर धनाधिपति हैं - देवताओं के कोषाध्यक्ष और धन, ऐश्वर्य व भौतिक समृद्धि के स्वामी। वे उत्तर दिशा के रक्षक (दिक्पाल) और नौ निधियों (निधि) के संरक्षक हैं। रत्नों से सुसज्जित स्थूल रूप में, गदा और रत्नों का पात्र धारण किए दर्शाए जाते हैं, कुबेर लोभ हेतु नहीं बल्कि घर चलाने और धर्म पालन हेतु आवश्यक धन के ईमानदार, स्थिर प्रवाह के लिए पूजे जाते हैं। उनकी उपासना प्रायः देवी लक्ष्मी के साथ की जाती है।
कुबेर और लक्ष्मी - दोनों क्यों
लक्ष्मी और कुबेर की उपासना साथ की जाती है क्योंकि वे परस्पर पूरक भूमिकाएँ निभाते हैं। लक्ष्मी वह देवी हैं जो धन व समृद्धि देती हैं, जबकि कुबेर वह कोषाध्यक्ष हैं जो उसे संचित कर रक्षा करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि एक बार पाया धन फिसले नहीं बल्कि टिके व बढ़े। दोनों की उपासना केवल आय नहीं बल्कि उसे संभालने व प्रबंधित करने की बुद्धि भी आमंत्रित करती मानी जाती है। इसीलिए कुबेर पूजा धनतेरस और दिवाली, धन के महान पर्वों में, केंद्रीय है।
कुबेर यंत्र और उसका उपयोग
कुबेर यंत्र एक पवित्र ज्यामितीय आरेख है जिस पर अंक और कुबेर का मंत्र अंकित होता है, जो धन को आकर्षित व स्थिर करने हेतु रचा गया है। इसे सामान्यतः घर, कार्यालय, तिजोरी या धन-पेटी के उत्तर में, आदर्शतः उपासक की ओर मुख किए रखा जाता है। उपयोग से पहले यंत्र को गंगा जल से शुद्ध कर कुबेर मंत्र जप से जागृत किया जाता है। धन या मूल्यवान वस्तुओं के स्थान पर जागृत कुबेर यंत्र रखना स्थिर समृद्धि लाता और आय की बाधाएँ दूर करता माना जाता है।
कुबेर मंत्र

कुबेर का मुख्य धन मंत्र है:
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्याधिपतये धन-धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा
एक छोटा दैनिक मंत्र है:
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं कुबेराय नमः
मंत्र का 108 बार पीली या रुद्राक्ष की माला पर, उत्तर की ओर मुख कर जप करें, विशेषकर शुक्रवार को या धनतेरस व दिवाली में, मन को ईमानदार, धर्म-सम्मत समृद्धि पर रखते हुए।
कुबेर आरती
कुबेर के सामने, विशेषकर लक्ष्मी के साथ, घी का दीपक जलाएँ और गाएँ:
ॐ जय यक्ष कुबेर हरे, स्वामी जय कुबेर हरे। शरण पड़ी है आपकी, सब संकट दुख हरे। धन-दाता दुख-हारी, वैभव के दाता। उत्तर दिशा के स्वामी, निधि के रखवाता।
ज्योति को दक्षिणावर्त घुमाएँ, फिर प्रणाम कर स्थिर धन, ऋण से मुक्ति और परिवार की समृद्धि की प्रार्थना करें।
कुबेर धन पूजा विधि
1. शुक्रवार, धनतेरस या दिवाली को स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें; उत्तर की ओर मुख करें। 2. कुबेर को लक्ष्मी के साथ स्थापित करें, और कुबेर यंत्र अपनी धन-पेटी या तिजोरी के पास रखें। 3. घी का दीपक जलाएँ, पीले पुष्प, हल्दी, अक्षत और खीर या पेड़ा जैसी मिठाई अर्पित करें। 4. खजाने के प्रतीक रूप में देवता के सामने कुछ सिक्के या नोट रखें। 5. कुबेर मंत्र का 108 बार जप करें, फिर आरती पढ़ें। 6. स्थिर, ईमानदार धन की प्रार्थना करें और जागृत यंत्र को धन के स्थान पर रखें। धनतेरस और दिवाली की रात्रि इस पूजा के सबसे शक्तिशाली समय हैं।
कुबेर उपासना के लाभ

कुबेर की उपासना स्थिर धन आकर्षित करती, आर्थिक बाधाएँ व ऋण दूर करती, और आय व व्यवसाय में स्थिरता व वृद्धि लाती मानी जाती है। लक्ष्मी के साथ उनकी कृपा केवल कमाने में नहीं बल्कि धन को टिकाने व बुद्धिमानी से संभालने में सहायक होती है। भक्त व्यापार, नए कार्यों में सफलता और समृद्ध, ऋण-मुक्त घर का आशीर्वाद भी माँगते हैं।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
कुबेर कौन हैं?+
कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष और धन के स्वामी, उत्तर दिशा के रक्षक और नौ निधियों के संरक्षक हैं। उनकी उपासना धन के ईमानदार, स्थिर प्रवाह हेतु, प्रायः लक्ष्मी के साथ की जाती है।
कुबेर मंत्र क्या है?+
मुख्य मंत्र 'ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्याधिपतये धन-धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा' है। एक छोटा रूप 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं कुबेराय नमः' है, जिसे उत्तर की ओर मुख कर 108 बार जपा जाता है।
कुबेर यंत्र क्या है और इसे कहाँ रखना चाहिए?+
कुबेर यंत्र एक पवित्र आरेख है जिस पर अंक और कुबेर का मंत्र अंकित होता है, जो धन को आकर्षित व स्थिर करता है। इसे शुद्ध कर मंत्रों से जागृत करने के बाद घर, कार्यालय, तिजोरी या धन-पेटी के उत्तर में रखें।
कुबेर और लक्ष्मी की उपासना साथ क्यों की जाती है?+
लक्ष्मी धन देती हैं जबकि कुबेर उसे संचित कर रक्षा करते हैं। दोनों की उपासना केवल आय नहीं बल्कि धन को टिकाने व संभालने की बुद्धि आमंत्रित करती है, इसीलिए उन्हें धनतेरस व दिवाली पर साथ पूजा जाता है।
कुबेर पूजा के लिए कौन सा दिन सर्वोत्तम है?+
धनतेरस और दिवाली की रात्रि कुबेर पूजा के सबसे शक्तिशाली समय हैं। शुक्रवार भी शुभ हैं, और उत्तर की ओर मुख कर घी के दीपक व पीले अर्पण से उपासना अनुशंसित है।
कुबेर की उपासना के क्या लाभ हैं?+
यह स्थिर धन आकर्षित करती, आर्थिक बाधाएँ व ऋण दूर करती, और आय व व्यवसाय में स्थिरता व वृद्धि लाती मानी जाती है, साथ ही धन को बुद्धिमानी से टिकाने व संभालने की समझ भी देती है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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