जब विष्णु ने देवताओं को बचाने के लिए स्त्री रूप धारण किया
हिंदू वर्ष की 24 एकादशियों में मोहिनी एकादशी एकमात्र है जो भगवान विष्णु के एक रूप के नाम पर है - और वह रूप स्त्री का था।
जब असुरों और देवताओं ने समुद्र मंथन किया और अंततः अमृत प्रकट हुआ, असुरों ने कलश छीन लिया। भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया - ब्रह्मांड की अब तक की सबसे आकर्षक स्त्री - और असुरों को मोहित करके चुपचाप केवल देवताओं को अमृत बाँटा।
वह दिन वैशाख शुक्ल एकादशी था। मोहिनी एकादशी 2026 गुरुवार, 7 मई 2026 को है।
पद्म पुराण कहता है कि पूर्ण श्रद्धा से मोहिनी एकादशी व्रत करोड़ों जन्मों के पाप जलाता है - 1000 गायों के दान के समान। स्वयं भगवान राम ने सीता वियोग में दुःखी होकर वशिष्ठ मुनि के परामर्श पर यह व्रत किया था।
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मोहिनी एकादशी 2026 - तिथि, मुहूर्त व पारण समय
📅 व्रत तिथि: गुरुवार, 7 मई 2026 🕒 एकादशी तिथि प्रारंभ: 6 मई 2026, सुबह 6:48 🕒 एकादशी तिथि समाप्त: 7 मई 2026, सुबह 9:14
संकल्प समय (प्रातः): 7 मई, सुबह 5:18 – 7:00 श्रेष्ठ पूजा मुहूर्त: 7 मई, सुबह 7:00 – 11:30 अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:53 – दोपहर 12:46
🍎 पारण (व्रत खोलना): शुक्रवार 8 मई 2026, सुबह 5:35 – 8:14 द्वादशी तिथि समाप्त: 8 मई, सुबह 11:38 (इससे पहले पारण अनिवार्य)
पारण समय क्यों महत्वपूर्ण: बहुत जल्दी या द्वादशी समाप्त के बाद पारण व्रत नष्ट कर देता है। 12वीं तिथि के प्रथम चतुर्थांश में पारण पूर्ण पुण्य देता है।
बचें: गुरुवार राहु काल (दोपहर 1:55 – 3:33) - इस समय कोई नई पूजा प्रारंभ न करें।
समुद्र मंथन कथा - मोहिनी अवतार का जन्म

एक बार दुर्वासा मुनि के शाप से देवता शक्तिहीन हो गए। असुरों ने स्वर्ग जीत लिया। विष्णु ने देवताओं को सलाह दी - 'असुरों से संधि करो। मिलकर क्षीर सागर मंथन करो। अमृत निकलेगा। पीकर अमर हो जाओगे।'
मंदार पर्वत मथनी, नागराज वासुकि रस्सी बने। विष्णु ने स्वयं कूर्म (कछुआ) रूप धारण कर पर्वत को पीठ पर थामा ताकि वह डूबे नहीं।
1000 वर्ष मंथन चला। समुद्र से 14 रत्न निकले - स्वयं लक्ष्मी, ऐरावत हाथी, कल्पवृक्ष, कामधेनु, चंद्रमा, अमृत कलश के साथ धन्वंतरि, और अंत में हलाहल (सबसे घातक विष), जिसे शिव ने ब्रह्मांड की रक्षा हेतु पी लिया।
जब धन्वंतरि अमृत कलश के साथ निकले, असुरों ने छीन लिया। वे स्वयं पीने की योजना से भागने लगे। देवताओं ने विष्णु को पुकारा।
तब सबके सामने विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया - इतनी दिव्य सुंदर स्त्री कि स्वयं शिव ने बाद में स्वीकारा कि उन्हें देखकर एक क्षण को वे अपनी सुध भूल गए। असुर सब कुछ छोड़कर मोहिनी के चारों ओर एकत्र हुए - अमृत बाँटने का अनुरोध किया।
मोहिनी ने एक शर्त पर हाँ की - 'मैं जो करूँ, कोई प्रश्न न करे।' उन्होंने देवता और असुरों को दो पंक्तियों में बैठाया। फिर मुस्कुराते हुए नाचते हुए केवल देवताओं के हाथ में अमृत डालने लगीं - असुरों के खाली हाथ ऊपर से छोड़ते हुए।
केवल राहु (असुर) ने धोखा पकड़ा। देवता का वेश धारण कर सूर्य व चंद्र के बीच बैठ गया। जैसे ही उसने अमृत चखा, सूर्य-चंद्र ने पहचान बताई। विष्णु ने तुरंत सुदर्शन चक्र से राहु का सिर काट दिया - पर अमृत कंठ छू चुका था। राहु का सिर अमर हो गया। (इसी कारण आज भी राहु बदला लेने हेतु सूर्य व चंद्र को निगलने का प्रयास करता है - जिसे ग्रहण कहते हैं।)
जब तक असुरों को धोखा समझ आया, सारा अमृत समाप्त हो चुका था। देवता अमर हो गए। स्वर्ग पुनः स्थापित हुआ।
उस दिन विष्णु ने पूरी सृष्टि बचाई - अब तक देखे गए सबसे आकर्षक रूप बनकर। भक्त मोहिनी एकादशी पर यह स्मरण करते हैं कि भगवान की सबसे बड़ी शक्ति बल नहीं - कृपा है।
मोहिनी एकादशी व्रत - चरणबद्ध विधि

एक दिन पहले (दशमी - 6 मई): सूर्यास्त से पहले एक सात्विक भोजन। अन्न, प्याज, लहसुन, मसूर दाल नहीं। जल्दी सोएँ, सोने से पहले व्रत संकल्प करें।
चरण 1 - स्नान व संकल्प (5:00 AM, 7 मई): सूर्योदय से पहले स्नान। घर के मंदिर के सामने पूर्व मुख बैठें। दाहिने हाथ में जल + अक्षत + तुलसी पत्र लेकर कहें:
'मैं [नाम], इस मोहिनी एकादशी पर अपने सभी पापों के नाश हेतु यह व्रत धारण करता/करती हूँ और इस पुण्य को भगवान विष्णु, श्री कृष्ण व माता लक्ष्मी को समर्पित करता/करती हूँ। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।'
जल मंदिर के फर्श पर अर्पित करें।
चरण 2 - विष्णु पूजा: विष्णु की मूर्ति/चित्र पर दूध + गंगाजल अभिषेक। पीला चंदन तिलक। पीले फूल (विशेषतः गेंदा), तुलसी पत्र, फल, पंचामृत अर्पण। पूर्व मुख घी का दीया।
चरण 3 - मोहिनी अवतार कथा: ऊपर दी गई समुद्र मंथन / मोहिनी अवतार कथा पढ़ें या सुनें। परिवार को सुनाएँ - कथा सुनाना समान पुण्य देता है।
चरण 4 - मंत्र जप: अगले खंड के किसी विष्णु मंत्र का तुलसी माला पर न्यूनतम 108 बार जप। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मोहिनी एकादशी हेतु सर्वश्रेष्ठ।
चरण 5 - फलाहार/निर्जल (दिन भर): अन्न, नमक, दाल, प्याज, लहसुन वर्जित। अनुमत - जल, दूध, फल, साबूदाना, मखाना, सेंधा नमक। दिन में न सोएँ। वाद-विवाद, झूठ, क्रोध से बचें।
चरण 6 - संध्या आरती व भजन: सूर्यास्त पर पंच-बत्ती घी दीया। विष्णु आरती - 'ॐ जय जगदीश हरे'। संभव हो तो मध्यरात्रि तक हरि कीर्तन - एकादशी पर जागरण अत्यंत शुभ।
चरण 7 - पारण (शुक्रवार प्रातः, 8 मई): सूर्योदय पर स्नान। पहले विष्णु पूजा। विष्णु का भोग पहले (पीला चावल + खीर + तुलसी पत्र पारंपरिक)। स्वयं खाने से पहले ब्राह्मण/जरूरतमंद को भोजन/वस्त्र/मुद्रा दान। पारण समय - सुबह 5:35 – 8:14।
दान (अत्यंत अनुशंसित): पीले वस्त्र, मिठाई, सत्तू, जल पात्र, हाथ पंखा, चीनी, घी। मोहिनी एकादशी पर दान 1000 गुना फल देता है।
मोहिनी एकादशी के 5 शक्तिशाली विष्णु मंत्र
इन में से किसी भी मंत्र का तुलसी माला पर 108 बार जप करें। अधिकतम फल हेतु मोहिनी एकादशी पर 11 माला (1188 जप) पूर्ण करें।
1. मूल मंत्र - ॐ नमो भगवते वासुदेवाय → विष्णु का 12-अक्षरी मंत्र - सात जन्मों के पाप नष्ट करता है।
2. विष्णु गायत्री मंत्र ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ → दिव्य बुद्धि जागृत करता है, अज्ञान मिटाता है।
3. विष्णु सहस्रनाम बीज (प्रारंभिक श्लोक) शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥ → सभी विघ्न दूर, अंतर्मन शांति।
4. मोहिनी मंत्र (आज विशेष) ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं मोहिन्यै नमः → मन का भ्रम दूर, कठिन निर्णयों में स्पष्टता।
5. लक्ष्मी-नारायण मंत्र (समृद्धि हेतु) ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नारायणाय नमः → मोहिनी एकादशी लक्ष्मी-नारायण विशेष योग में आती है। यह मंत्र समृद्धि देता है।
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मोहिनी एकादशी व्रत के आध्यात्मिक व व्यावहारिक लाभ
1. पूर्व जन्मों के पाप मिटाना: पद्म पुराण कहता है - मोहिनी एकादशी व्रत 1000 जन्मों के पाप - अनजाने भी - नष्ट करता है।
2. मोह (भ्रम) हटाना: 'मोहिनी' नाम का अर्थ ही भ्रम है। यह व्रत विशेषतः उन लोगों हेतु है जो जीवन के बड़े निर्णय (करियर, विवाह, स्थानांतरण) के सामने हैं। व्रत के बाद की स्पष्टता को 'कोहरा हटना' कहा गया है।
3. 1000 गौ दान के समान: शास्त्रों में मोहिनी एकादशी व्रत का पुण्य 1000 गायों के दान के बराबर।
4. शोक के बाद शांति: भगवान राम ने सीता वियोग में यह व्रत किया था। हाल में हानि, विछोह या आघात झेलने वालों हेतु अनुशंसित।
5. लक्ष्मी प्रवाह बढ़ाना: वैशाख मास (लक्ष्मी का प्रिय मास) में और विष्णु व्रत होने से घर पर लक्ष्मी-नारायण कृपा बढ़ती है।
6. पूर्व कर्म की रुकावटें हटाना: ठहरे करियर, अव्याख्यात आर्थिक रुकावट, बार-बार असफलता वाले लोग 3 लगातार मोहिनी एकादशी व्रत के बाद अचानक प्रगति पाते हैं।
7. स्वास्थ्य लाभ: चिकित्सकीय निगरानी में लगभग 24 घंटे का जल उपवास पाचन तंत्र को पूर्ण विश्राम देता है - आंत स्वास्थ्य सुधार, सूजन में कमी। आधुनिक विज्ञान वही पुष्ट करता है जो शास्त्रों ने सहस्राब्दियों पहले कहा।
मोहिनी एकादशी पर वर्जित कार्य (अनिवार्य नियम)

इनमें से किसी का उल्लंघन व्रत पुण्य कम या नष्ट कर सकता है। ध्यान से पढ़ें।
🚫 भोजन:
- चावल, गेहूँ, कोई अन्न नहीं
- साधारण नमक नहीं - आवश्यक हो तो केवल सेंधा नमक
- प्याज, लहसुन, मसूर दाल, बैंगन नहीं
- मांसाहार, अंडा, मदिरा नहीं
- व्रत न रखने वाले द्वारा बना भोजन नहीं
🚫 व्यवहार:
- झूठ, चुगली, किसी की निंदा नहीं
- क्रोध न करें - विशेषतः परिवार पर
- दिन में न सोएँ
- शारीरिक संबंध नहीं
- धन उधार लेना/देना नहीं
🚫 गतिविधियाँ:
- बाल, नाखून न काटें, दाढ़ी न बनाएँ
- एकादशी पर तुलसी पत्ते न तोड़ें (दशमी संध्या को अगले दिन हेतु तोड़ें)
- कपड़े न धोएँ
- कोई नया व्यवसाय आरंभ नहीं
- शमशान/अंत्येष्टि न जाएँ (अनिवार्य न हो तो)
✅ अतिरिक्त कर्तव्य:
- स्वच्छ पीले या सफेद सूती वस्त्र
- ध्यान के समय न्यूनतम 1 घंटा पूर्ण मौन
- हरि कीर्तन / विष्णु सहस्रनाम सुनें
- न्यूनतम 1 घंटा सेवा (स्वैच्छिक कार्य) - गरीबों को भोजन कराना सर्वश्रेष्ठ
पाठकों के प्रश्न
मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्या वालों को मोहिनी एकादशी पर निर्जल व्रत करना चाहिए?+
बिल्कुल नहीं। फलाहार व्रत (फल + दूध + आवश्यक जल) शास्त्र पूर्णतया स्वीकार करते हैं और शुद्ध भाव हो तो समान पुण्य देता है। मधुमेह रोगी केला/खजूर तैयार रखें, नियमित जल पिएँ, रक्त शर्करा कभी कम न होने दें। गर्भवती, स्तनपान, वृद्धजन (60+), 12 से छोटे बच्चे सदैव फलाहार करें - निर्जल नहीं। स्वास्थ्य भी धर्म का अंग है।
यदि मैं शुक्रवार सुबह पारण समय चूक जाऊँ?+
निर्धारित समय (सुबह 5:35 – 8:14) चूक जाएँ तो भी द्वादशी तिथि समाप्त (सुबह 11:38) से पहले पारण अनिवार्य - पर पुण्य कम होता है। द्वादशी भी चूक जाए तो क्षमा प्रार्थना के साथ पारण करें, ब्राह्मण/जरूरतमंद को अतिरिक्त दान करें, उसी वर्ष एक अतिरिक्त एकादशी व्रत प्रायश्चित में करें। वंदना ऐप में अलार्म लगाना सबसे सरल समाधान।
मोहिनी एकादशी केवल स्त्रियों के लिए है क्या, क्योंकि विष्णु ने स्त्री रूप लिया था?+
बिल्कुल नहीं - मोहिनी एकादशी सबके लिए है। स्त्री रूप विष्णु की कृपा व सार्वभौमिक मातृ-तत्व का प्रतीक है। पुरुष, स्त्री, विवाहित, अविवाहित, 12 से ऊपर के बच्चे - सब यह व्रत रखते हैं। केवल विशेष नियम - गर्भवती फलाहार करें, बहुत छोटे बच्चे निर्जल न करें।
मोहिनी एकादशी को अन्य एकादशियों से अधिक शक्तिशाली क्यों माना जाता है?+
तीन कारण। पहला, यह वैशाख में आती है - जिसमें ब्रह्मांड जन्मा (पद्म पुराण)। दूसरा, यह उस क्षण की स्मृति है जब विष्णु ने धर्म रक्षा को व्यक्तिगत गरिमा से ऊपर रखा (किसी अवतार के लिए स्त्री रूप असामान्य है)। तीसरा, स्वयं भगवान राम ने यह व्रत किया - मर्यादा पुरुषोत्तम का व्रत अद्वितीय अधिकार रखता है। तीनों मिलकर मोहिनी एकादशी को 'पाप-नाशक एकादशी' का विशेष स्थान देते हैं।
क्या मैं पहली बार सीधे मोहिनी एकादशी व्रत कर सकता/सकती हूँ?+
हाँ - मोहिनी एकादशी वास्तव में पहली एकादशी हेतु आदर्श है। इसकी पाप-नाशक शक्ति 'शुरुआत' हेतु श्रेष्ठ। फलाहार से आरंभ करें (निर्जल नहीं), सच्चे भाव से संकल्प, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' न्यूनतम 108 बार जप। विष्णु तकनीक नहीं - भाव देखते हैं। पहली मोहिनी एकादशी के बाद धीरे-धीरे अन्य एकादशी जोड़ें।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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