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रक्षा बंधन 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, राखी मंत्र और भद्रा काल
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रक्षा बंधन 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, राखी मंत्र और भद्रा काल

9 मिनट पढ़ेंअद्यतन फ़रवरी 15, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

रक्षा बंधन 2026 तिथि, भद्रा व शुभ मुहूर्त

रक्षा बंधन श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। 2026 में यह रविवार, 9 अगस्त 2026 है।

सर्वाधिक महत्वपूर्ण नियम: राखी भद्रा काल में कभी न बांधें। 2026 में भद्रा 9 अगस्त की प्रातः ही समाप्त हो जाती है, अतः सूर्योदय से पूरा दिन शुभ है।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त (9 अगस्त 2026 - अनुमानित):

  • सर्वश्रेष्ठ: 5:48 AM – 1:24 PM (पूरी प्रातःकाल)
  • अपराह्न मुहूर्त: 1:30 PM – 4:08 PM
  • प्रदोष मुहूर्त: 6:48 PM – 9:00 PM

अपने नगर के पंचांग से सटीक समय अवश्य पुष्टि करें।

भद्रा क्यों वर्जित: भद्रा सूर्य की पुत्री व शनि की बहन हैं। रावण की बहन शूर्पणखा ने भद्रा में राखी बांधी थी - परिणामस्वरूप रावण नष्ट हुआ। भद्रा में राखी बांधने से भाई पर वही दुर्भाग्य आता है।

रक्षा बंधन पूजा विधि (चरणबद्ध)

चरण 1 (बहन की तैयारी): स्नान कर नए पारंपरिक वस्त्र पहनें। थाली में रखें - घी का दीप, रोली/कुमकुम, अक्षत (चावल + हल्दी), चंदन, कच्चे चावल, मिठाई, राखी और छोटी भेंट।

चरण 2 (भाई की तैयारी): स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें (काला त्यागें)। पूर्व या उत्तर मुख होकर लकड़ी की चौकी या आसन पर बैठें - सीधे भूमि पर कभी नहीं।

चरण 3: बहन थाली में नारियल व राखी रखे, दीप जलाए, और भाई की आरती (3 बार दक्षिणावर्त) करे।

चरण 4: तिलक लगाएं - पहले माथे पर रोली/कुमकुम, फिर अक्षत। चावल का दाना तिलक पर चिपकना चाहिए (दीर्घायु का चिह्न)।

चरण 5: राखी मंत्र (नीचे) जपते हुए भाई के दाहिने हाथ पर राखी बांधें। तीन गांठें लगाएं - पहली भाई के जीवन हेतु, दूसरी समृद्धि हेतु, तीसरी बल हेतु।

चरण 6: भाई भेंट दे, बहन के चरण स्पर्श करे (यदि बड़ी हो) या आशीर्वाद दे (यदि छोटी हो), और पहले बहन को मिठाई खिलाए।

चरण 7: दोनों मिलकर परिवार के बड़ों को प्रणाम करें।

पवित्र राखी-बंधन मंत्र (बांधते समय जपें)

1. मूल रक्षा सूत्र मंत्र (सर्वाधिक शक्तिशाली - बांधते समय जपें): 'येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥'

अर्थ: जिस सूत्र से दानवेन्द्र महाबली राजा बलि देवी लक्ष्मी द्वारा बांधे गए थे, उसी से मैं तुम्हें बांधती हूँ हे रक्षा सूत्र - विचलित न होना, विचलित न होना। (यह मूल रक्षा सूत्र था जो माँ लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को मुक्त कराने हेतु राजा बलि को बांधा था।)

2. आधुनिक रक्षा मंत्र (3 बार जपें): 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।'

3. भाई का रक्षा जप (राखी बंधते समय मन में दोहराए): 'ॐ सर्व मङ्गल माङ्गल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि, नारायणि नमोऽस्तुते॥'

4. बांधने के बाद बहन का आशीर्वाद: 'आयुष्मान् भव, यशस्वी भव, सुखी भव, विजयी भव।'

रक्षा बंधन में आवश्यक नियम - क्या करें, क्या न करें

रक्षा बंधन में आवश्यक नियम - क्या करें, क्या न करें

✅ करें:

  • राखी केवल भाई की दाहिनी कलाई पर बांधें
  • ठीक 3 गांठें लगाएं - एक या दो कभी नहीं
  • लाल, पीले या केसरिया धागे की राखी (सर्वाधिक शुभ)
  • राखी कम से कम 21 दिन, आदर्श रूप से दिवाली तक पहनें, फिर बहते जल में प्रवाहित करें
  • स्वयं भी रक्षा सूत्र (मौली) बांधें - स्त्री बायीं, पुरुष दाहिनी कलाई पर

❌ न करें:

  • भद्रा काल में राखी कभी न बांधें - विलंब हो तो भी प्रतीक्षा करें
  • काली, टूटी या फटी राखी कभी न प्रयोग करें
  • पुरानी राखी कूड़ेदान में कभी न फेंकें - सदा नदी, तालाब या पीपल वृक्ष के नीचे प्रवाहित करें
  • ग्रहण, सूतक, या शोक काल (परिवार में मृत्यु के 13 दिनों के भीतर) में राखी न बांधें
  • आज भाई-बहन से विवाद कभी न करें - पुराने मनमुटाव भी क्षमा करें
  • बलपूर्वक व्रत न रखें - यह दिन आनंद हेतु है, तप हेतु नहीं

रक्षा बंधन का गहरा इतिहास और पौराणिक महत्व

रक्षा बंधन प्राचीन है - जितना दिखता है उससे कहीं अधिक पुराना। इसकी जड़ें कई पौराणिक परंपराओं और ऐतिहासिक युगों में फैली हैं:

कथा 1 - इंद्र और शची (भविष्य पुराण): जब इंद्र असुरों से युद्ध में हार रहे थे, शची (उनकी पत्नी) ने मंत्र जपते हुए उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बाँधा। इंद्र जीते। यह पहला रक्षा बंधन माना जाता है।

कथा 2 - द्रौपदी और कृष्ण: जब शिशुपाल प्रसंग में कृष्ण की उंगली कट गई, द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर बाँधा। कृष्ण ने इसे राखी माना - और महाभारत में वस्त्रहरण के समय द्रौपदी की रक्षा की।

कथा 3 - रानी कर्णावती और हुमायूँ: 1535 में चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूँ को राखी भेजी। हुमायूँ तुरंत उनकी रक्षा के लिए चला - यद्यपि देर से पहुँचा। इस ऐतिहासिक घटना ने रक्षा बंधन को रक्त से परे भाईचारे का प्रतीक बनाया।

शब्द का अर्थ: रक्षा (सुरक्षा) + बंधन (बाँधना)। जब बहन राखी बाँधती है और भाई स्वीकार करता है, दोनों एक पवित्र संविदा में प्रवेश करते हैं।

🙏 वंदना ऐप में रक्षा बंधन पूजा मंत्र और रक्षा सूत्रम् स्तोत्र - 28 अगस्त 2026 का रिमाइंडर सेट करें।

आधुनिक परिवार के लिए रक्षा बंधन: बहनें, भाई और उससे आगे

रक्षा बंधन आधुनिक युग में विकसित हुआ है - और यह विकास उसके मूल स्वभाव के अनुरूप है:

भाई न हो तो: चचेरे भाइयों, करीबी पुरुष मित्रों, सम्मानित बुजुर्गों, या भगवान गणेश/शिव को राखी बाँधी जा सकती है।

बहन न हो तो: चचेरी बहनों, महिला मित्रों, माँ, या महिला मार्गदर्शकों से राखी ली जा सकती है।

दूरी पर राखी (NRI परिवार):

  • राखी 10 दिन पहले कूरियर करें
  • मुहूर्त समय पर वीडियो कॉल पर मंत्र जपते हुए बाँधें
  • भाई डिजिटल उपहार भेजे
  • यह आध्यात्मिक रूप से मान्य है

वृक्ष रक्षा बंधन: महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तराखंड में वृक्षों - पीपल, बरगद, तुलसी - को राखी बाँधी जाती है। यह ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित प्रथा है।

रक्षा बंधन 2026: शुक्रवार, 28 अगस्त 2026। सर्वोत्तम मुहूर्त: दोपहर 1:30 – शाम 5:30।

🙏 वंदना ऐप में रक्षा बंधन रिमाइंडर - पूजा मुहूर्त की सूचना और रक्षा सूत्रम् मंत्र तैयार।

राखी बाँधने के मंत्र और पूर्ण विधि - शब्द दर शब्द

राखी बाँधने के मंत्र और पूर्ण विधि - शब्द दर शब्द

अधिकांश बहनें मंत्र के बिना राखी बाँधती हैं - और यह तब भी काम करती है क्योंकि भाव प्रमुख है। पर मंत्र के साथ यह बंधन एक वास्तविक वैदिक रक्षा कवच बन जाता है:

चरण 1 - आरती: बहन दीए से 7 बार दक्षिणावर्त आरती करे।

चरण 2 - तिलक: भाई के माथे पर दाहिने हाथ की अनामिका से कुमकुम या रोली तिलक।

चरण 3 - अक्षत: चावल के दाने सिर पर छिड़कें।

चरण 4 - राखी बाँधते समय मंत्र: 'येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥'

अर्थ: 'जिस धागे से महाबली राजा बलि बाँधे गए थे, उसी से मैं तुम्हें बाँधती हूँ, हे रक्षा - स्थिर रहो, स्थिर रहो।'

दाहिनी कलाई पर 3 गाँठ लगाएं।

चरण 5 - मिठाई: पहले बहन भाई को मिठाई खिलाए।

चरण 6 - भाई का प्रतिज्ञा: भाई बहन के सिर पर हाथ रखे और कहे: 'बहन, मैं सदैव आपकी रक्षा के लिए तैयार हूँ।'

उपहार परंपरा: बहन की जरूरत के अनुसार उपहार - लेन-देन की तरह नहीं।

🙏 वंदना ऐप में रक्षा सूत्रम् मंत्र ऑडियो और चरणबद्ध गाइड।

भक्तों के सामान्य प्रश्न

क्या बहन वीडियो कॉल पर या डाक से राखी भेज कर बांध सकती है?+

हाँ - दूरी के कारण व्यक्तिगत न बांध सकें तो राखी पूर्व में डाक से भेजें। उत्सव के दिन शुभ मुहूर्त में वीडियो कॉल करें, भाई स्वयं बांधे जबकि बहन मंत्र जपे व आभासी आरती करे। रक्षा बंधन भाव से बनता है, भौतिक निकटता से नहीं। स्वयं श्रीकृष्ण ने दूर से ही द्रौपदी की फटी साड़ी को राखी रूप में स्वीकार किया था।

क्या विवाहित स्त्री पति को राखी बांध सकती है या केवल भाइयों को?+

राखी पारंपरिक रूप से केवल भाई (सगा, चचेरा या प्रतीकात्मक) को बांधी जाती है। पति-पत्नी का बंधन भिन्न पवित्र संबंध है - पत्नी पति को राखी न बांधे। हाँ, वही राखी मंत्र से पति की दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र (मौली) बांध सकती है - यह वैवाहिक रक्षा सूत्र है, बहन की राखी नहीं।

क्या मैं स्वर्गवासी भाई को राखी बांध सकती हूँ?+

हाँ - यह सुंदर व अनुशंसित प्रथा है। राखी स्वर्गीय भाई की फोटो पर या छोटे श्री यंत्र/भगवान कृष्ण की मूर्ति के सम्मुख रखें, घी का दीप जलाएं, उनकी प्रिय मिठाई अर्पित करें, और राखी मंत्र जपें। रक्षा बंधन सीधे आत्मा तक पहुँचता है। फिर 7 दिनों के भीतर राखी बहते जल में प्रवाहित करें। आज उनके नाम भोजन दान करें।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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