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स्नान के समय स्नान मंत्र - बोल और महत्व
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स्नान के समय स्नान मंत्र - बोल और महत्व

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

स्नान के समय मंत्र क्यों पढ़ें

हिंदू जीवन में प्रातःस्नान केवल शारीरिक सफाई नहीं बल्कि एक दैनिक शुद्धि है जो शरीर व मन को प्रार्थना और कार्य के लिए तैयार करती है। जल को पवित्र माना जाता है, और सबसे पवित्र जल महान नदियों का है। एक स्नान मंत्र इन नदियों को आपके स्नान में आमंत्रित करता है, जिससे नल या कुएँ का जल भी ऐसे माना जाता मानो उसमें गंगा की कृपा हो। यह छोटा संकल्प एक सामान्य स्नान को दिन के पवित्र आरंभ में बदल देता है।

स्नान मंत्र - सात पवित्र नदियाँ

प्रसिद्ध स्नान मंत्र भारत की सात पवित्र नदियों का आह्वान करता है:

गंगे च यमुने चैव, गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि, जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥

अर्थ: हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी - कृपया इस जल में उपस्थित हों। यह प्रार्थना विनम्रता से सात पवित्र नदियों से स्नान-जल में आकर निवास करने को कहती है, जिससे स्नान एक पवित्र तीर्थ स्नान बन जाता है, स्वयं नदियों में स्नान।

कब और कैसे पढ़ें

1. सबसे शुभ प्रभाव हेतु आदर्श रूप से प्रातःकाल, सूर्योदय से पूर्व या शीघ्र बाद स्नान करें। 2. स्वयं पर पहला जल डालने से पूर्व, हथेली में थोड़ा जल लें या बाल्टी की ओर देखें। 3. गंगे च यमुने चैव, गोदावरि सरस्वति, नर्मदे सिन्धु कावेरि, जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु का जप करें। 4. वह जल अपने सिर पर छिड़कें, फिर शांत व प्रार्थनापूर्ण मन से स्नान करें। 5. कुछ लोग स्नान करते समय 'ॐ नमः शिवाय' या अपना इष्ट देवता मंत्र भी जपते हैं। एक सच्चा जप पर्याप्त है; नदियों की कृपा ग्रहण करने का भाव ही मुख्य है।

महत्व और लाभ

महत्व और लाभ

स्नान मंत्र बिना यात्रा किए सातों पवित्र नदियों में स्नान का पुण्य देता माना जाता है, जो केवल शरीर ही नहीं बल्कि मन और सूक्ष्म ऊर्जाओं को भी शुद्ध करता है। यह दिन का आरंभ विनम्रता, कृतज्ञता और पवित्रता के भाव से करता है, और थकान, नकारात्मकता व नींद की भारी मनःस्थिति को धोने में सहायक होता है। ठंडे या ताज़े जल के स्नान के साथ यह अभ्यास व्यक्ति को सतर्क, शांत और प्रार्थना के लिए तैयार छोड़ता है।

पूजा और उपासना से पहले स्नान

परंपरा अनुसार ताज़े स्नान के बिना घर के मंदिर में प्रवेश या पूजा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि शरीर की स्वच्छता मन की तत्परता को दर्शाती है। स्नान मंत्र के बाद स्वच्छ, यथासंभव ताज़े धुले वस्त्र पहनें, और तभी प्रार्थना हेतु बैठें। त्योहारों, एकादशी, ग्रहण और विशेष अवसरों पर इस मंत्र सहित प्रातःस्नान विशेष शुद्धिकारक माना जाता है और दैनिक आचार (सदाचरण) का पुराना अंग है।

परंपरा पर एक टिप्पणी

मंत्र की सात नदियाँ उत्तर की गंगा से दक्षिण की कावेरी तक पूरे भारत में जीवंत देवियों और तीर्थों (पवित्र संगमों) रूप में पूजित हैं। इन्हें प्रतिदिन नाम लेकर स्मरण करने से किसी नदी से दूर रहने वाले भी देश के पवित्र जल से जुड़ाव का धागा बनाए रखते हैं। यह अभ्यास सिखाता है कि पवित्रता केवल स्थान में नहीं बल्कि उस हृदय व भाव में है जो व्यक्ति सरलतम दैनिक कर्म में लाता है।

लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं

स्नान करते समय जपने का स्नान मंत्र क्या है?+

प्रसिद्ध मंत्र 'गंगे च यमुने चैव, गोदावरि सरस्वति, नर्मदे सिन्धु कावेरि, जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु' है, जो सात पवित्र नदियों को स्नान-जल में आमंत्रित करता है।

स्नान मंत्र किन सात नदियों का नाम लेता है?+

यह गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी का नाम लेता है - भारत की सात पवित्र नदियाँ जो जीवंत देवियों रूप में पूजित हैं।

स्नान मंत्र का अर्थ क्या है?+

यह विनम्रता से सात पवित्र नदियों से स्नान-जल में उपस्थित होने को कहता है, जिससे साधारण जल उनकी कृपा रखता है और स्नान एक पवित्र तीर्थ स्नान बन जाता है।

स्नान मंत्र पढ़ने का सर्वोत्तम समय कब है?+

प्रातःकाल, सूर्योदय से पूर्व या शीघ्र बाद, सबसे शुभ है। पहला जल डालने से पूर्व और विशेषकर पूजा, त्योहार या एकादशी से पहले इसे जपें।

क्या यह मंत्र नल या कुएँ के जल के साथ काम करता है?+

हाँ। मंत्र नदियों की उपस्थिति को आपके प्रयुक्त किसी भी जल में आमंत्रित करता है, अतः नल या कुएँ का जल उनकी कृपा रखता माना जाता है। भाव और श्रद्धा ही मुख्य हैं।

पूजा करने से पहले स्नान क्यों करें?+

ताज़ा स्नान शरीर को शुद्ध और मन को स्थिर करता है, जो उपासना की तत्परता दर्शाता है। परंपरा अनुसार घर के मंदिर में प्रवेश से पूर्व स्नान मंत्र के बाद स्वच्छ वस्त्र पहने जाते हैं।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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