दिन का आरंभ ईश्वर के साथ
हिंदू जीवन-पद्धति में जागने का क्षण पवित्र है, जिसे ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं जब यह सूर्योदय-पूर्व के घंटों में हो। जागने के पहले क्षणों में मन ताज़ा और संवेदनशील होता है, अतः जो हम पहले देखते और स्मरण करते हैं वह पूरे दिन का स्वर तय करता है। फोन उठाने के बजाय परंपरा है कि अपनी ही हथेलियों को देखें और एक छोटा जागरण मंत्र अर्पित करें, संसार में कदम रखने से पूर्व ईश्वर का अभिवादन करते हुए।
कराग्रे वसते लक्ष्मी - हस्त मंत्र
जागने पर अपने हाथ सामने लाएँ, हथेलियों को देखें और पढ़ें:
कराग्रे वसते लक्ष्मीः, करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः, प्रभाते करदर्शनम्॥
अर्थ: हाथों के अग्रभाग में लक्ष्मी (धन) निवास करती हैं, हाथों के मध्य में सरस्वती (ज्ञान), और हाथों के मूल में गोविंद (प्रभु)। इसलिए प्रातःकाल अपने हाथों के दर्शन करने चाहिए। यह छंद स्मरण कराता है कि ईश्वर और कार्य, विद्या व अर्जन की शक्ति हमारे अपने हाथों में ही बसी है।
समुद्रवसने देवि - धरती का स्पर्श
धरती पर पैर रखने से पूर्व धरती माता से क्षमा माँगें:
समुद्रवसने देवि, पर्वतस्तनमण्डिते। विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं, पादस्पर्शं क्षमस्व मे॥
अर्थ: हे समुद्र रूपी वस्त्र धारण करने वाली देवी, पर्वतों रूपी स्तनों से सुशोभित, विष्णु की पत्नी, मैं आपको प्रणाम करता हूँ - कृपया मुझे पैरों से स्पर्श करने के लिए क्षमा करें। यह कोमल प्रार्थना उस धरती के प्रति श्रद्धा और दिन के पहले ही कदम पर विनम्रता दिखाती है जिस पर हम चलते हैं।
प्रातः विधि - चरण दर चरण

1. जागने पर क्षणभर बिस्तर में रहें; जल्दबाजी न करें या फोन न उठाएँ। 2. हथेलियाँ जोड़कर देखें और कराग्रे वसते लक्ष्मीः पढ़ें। 3. हथेलियों से धीरे से अपनी आँखों को स्पर्श करें, भीतर बसे ईश्वर का स्मरण करते हुए। 4. नीचे उतरने से पूर्व समुद्रवसने देवि पढ़ें और धरती से क्षमा माँगें। 5. पहले दाहिना पैर रखकर उतरें, फिर शौच, स्नान और प्रार्थना की ओर बढ़ें। 6. अपने इष्ट देवता, माता-पिता और गुरु का क्षणभर स्मरण करें और दिन के लिए सकारात्मक संकल्प लें। पूरा अभ्यास मुश्किल से एक मिनट लेता है पर दिन को कृतज्ञता में स्थिर कर देता है।
महत्व और लाभ
इन मंत्रों से दिन का आरंभ लक्ष्मी, सरस्वती और गोविंद - समृद्धि, बुद्धि और दिव्य कृपा - को दिनभर के सभी कार्यों में आमंत्रित करता माना जाता है। व्यावहारिक रूप से हथेलियों को देखना आँखों व मन को धीरे से जगाने का कोमल तरीका है, जबकि धरती और ईश्वर का स्मरण पहले ही क्षण से विनम्रता व कृतज्ञता पोषित करता है। भक्तिमय आरंभ भावनाओं को स्थिर करता, चिंतित जल्दबाजी को कम करता और आगे आने वाले सब के लिए एक शांत, उद्देश्यपूर्ण स्वर तय करता है।
परंपरा पर एक टिप्पणी
ये छंद धर्मग्रंथों में वर्णित नित्य कर्म (दैनिक कर्तव्यों) के अंग हैं, जहाँ प्रातः का प्रत्येक कार्य - जागना, हथेलियों को देखना, धरती का स्पर्श, स्नान और प्रार्थना - एक छोटे मंत्र से पवित्र किया जाता है। गहरी शिक्षा दर्शन की है: हम प्रतिदिन जो पहले देखना चुनते हैं वह मन को प्रशिक्षित करता है। अपने ही हाथों में ईश्वर और नीचे की धरती के प्रति श्रद्धा से आरंभ करके परंपरा जागने को भी भक्ति का कर्म बना देती है।
त्वरित उत्तर
प्रातः जागरण मंत्र क्या है?+
मुख्य जागरण मंत्र 'कराग्रे वसते लक्ष्मीः, करमध्ये सरस्वती, करमूले तु गोविन्दः, प्रभाते करदर्शनम्' है, जो जागने पर हथेलियों को देखते हुए पढ़ा जाता है।
कराग्रे वसते लक्ष्मी का अर्थ क्या है?+
इसका अर्थ है लक्ष्मी अंगुलियों के अग्रभाग में, सरस्वती हाथों के मध्य में और गोविंद उनके मूल में बसते हैं, अतः प्रातः हाथों के दर्शन करने चाहिए, उनमें ईश्वर को देखते हुए।
फर्श पर कदम रखने से पहले कौन सा मंत्र कहा जाता है?+
धरती पर पैर रखने से पूर्व 'समुद्रवसने देवि, पर्वतस्तनमण्डिते, विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं, पादस्पर्शं क्षमस्व मे' पढ़ें, धरती माता से क्षमा माँगते हुए।
प्रातः सबसे पहले हथेलियों को क्यों देखें?+
हाथ लक्ष्मी, सरस्वती और गोविंद का प्रतीक हैं - कृपा सहित अर्जन, विद्या व कर्म की शक्ति। उन्हें पहले देखना स्मरण कराता है कि ईश्वर और कार्य की हमारी क्षमता हमारे भीतर ही बसी है।
इन मंत्रों को पढ़ने का सर्वोत्तम समय कब है?+
जागते ही, आदर्श रूप से सूर्योदय-पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में। फोन देखने से पहले बिस्तर में इन्हें पढ़ें, फिर शौच, स्नान और प्रार्थना की ओर बढ़ें।
क्या कोई भी यह प्रातः अभ्यास कर सकता है?+
हाँ। किसी भी आयु का कोई भी इसे कर सकता है। इसके लिए विशेष वस्तुओं की आवश्यकता नहीं, मुश्किल से एक मिनट लेता है, और धीरे से कृतज्ञता, विनम्रता व दिन का शांत भक्तिमय आरंभ पोषित करता है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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