← सभी ब्लॉगRead in English9 मिनट पढ़ें
श्री यंत्र - महत्व, लाभ और पूजा विधि
Remedies

श्री यंत्र - महत्व, लाभ और पूजा विधि

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
MT

By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

श्री यंत्र क्या है

श्री यंत्र (जिसे श्री चक्र भी कहते हैं) एक पवित्र ज्यामितीय आकृति है जो केंद्र बिंदु (बिंदु) से निकलते नौ परस्पर जुड़े त्रिकोणों से बनी है। यह माँ त्रिपुर सुंदरी और महालक्ष्मी का दृश्य रूप है, जो दिव्य स्त्री व पुरुष शक्ति के मिलन और संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करता है। सभी यंत्रों का राजा माना जाने वाला यह यंत्र समृद्धि, सामंजस्य व आध्यात्मिक ऊर्जा आकर्षित करने का शक्तिशाली साधन माना जाता है।

ज्यामिति का महत्व और अर्थ

श्री यंत्र की हर परत का अर्थ है। केंद्रीय बिंदु समस्त सृष्टि का स्रोत है, चार ऊर्ध्वमुखी त्रिकोण शिव और पाँच अधोमुखी त्रिकोण शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके चारों ओर कमल की पंखुड़ियाँ हैं, जो जीवन के विकास की प्रतीक हैं, और इन्हें चार द्वारों वाले वर्गाकार प्रवेश (भूपुर) में घेरा गया है। इस ज्यामिति पर ध्यान करना मन को बाहरी संसार से आंतरिक दिव्य केंद्र की ओर खींचता कहा जाता है।

श्री यंत्र मंत्र

यंत्र को लक्ष्मी के शक्तिशाली बीज मंत्र से ऊर्जित किया जाता है:

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

एक संक्षिप्त दैनिक मंत्र है ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्म्यै नमः। यंत्र की ओर मुख करके इसका 108 बार जप करें ताकि यह ऊर्जित व सक्रिय बना रहे।

श्री यंत्र कहाँ रखें

श्री यंत्र कहाँ रखें

श्री यंत्र को घर के मंदिर के ईशान कोण में या उत्तर दिशा में, जो कुबेर व धन की दिशा है, रखें। इसका मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो, इसे स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र पर फर्श से ऊपर रखें, और इसे स्नानघर, पलंग के पास शयनकक्ष या भूमि पर कभी न रखें। दुकान या कार्यालय में नकदी पेटी के पास या स्वामी के आसन की ओर श्री यंत्र व्यापार वृद्धि हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है।

श्री यंत्र पूजा विधि

1. शुक्रवार या दीपावली को स्नान कर यंत्र को कच्चे दूध व गंगा जल से स्वच्छ करें, फिर पोंछकर सुखा लें। 2. इसे मंदिर में लाल वस्त्र पर पूर्व की ओर मुख करके रखें। 3. घी का दीपक व धूप जलाएँ, और कुमकुम, अक्षत, लाल पुष्प व मिठाई अर्पित करें। 4. कमल गट्टे या स्फटिक माला पर लक्ष्मी मंत्र का 108 बार जप करें। 5. जल अर्पित करें और समृद्धि व सामंजस्य की प्रार्थना करें। 6. इसकी ऊर्जा बनाए रखने हेतु प्रतिदिन दीपक व ताज़े पुष्पों से इसकी पूजा करें।

श्री यंत्र के लाभ

श्री यंत्र स्थिर धन आकर्षित करता, आर्थिक बाधाएँ दूर करता व ऋण समाप्त करता, व्यापार व करियर में सफलता व वृद्धि लाता और घर को सकारात्मक, सामंजस्यपूर्ण ऊर्जा से भरता माना जाता है। यह ध्यान व एकाग्रता को गहरा करने, तनाव कम करने और वास्तु दोष दूर करने हेतु भी मूल्यवान है, जिससे यह धन का साधन व आध्यात्मिक सहारा दोनों है।

श्री यंत्र चुनना और उसकी देखभाल

श्री यंत्र चुनना और उसकी देखभाल

ताँबे, पीतल, चाँदी या स्फटिक (क्रिस्टल) में सटीक, सममित ज्यामिति वाला यंत्र चुनें; दोषपूर्ण या असममित यंत्र से बचना उत्तम है। नियमित पूजा से पहले इसे मंत्रों द्वारा ऊर्जित (प्राण प्रतिष्ठा) कराएँ। इसे स्वच्छ व धूल-रहित रखें, इसे बुरी तरह काला न होने दें, और उसी वेदी पर अन्य अव्यवस्था रखने से बचें। सम्मानपूर्वक रखा व नियमित पूजित यंत्र शक्तिशाली रूप से सक्रिय रहता माना जाता है।

त्वरित उत्तर

श्री यंत्र क्या है?+

श्री यंत्र नौ परस्पर जुड़े त्रिकोणों की पवित्र ज्यामितीय आकृति है, जो माँ त्रिपुर सुंदरी और महालक्ष्मी का दृश्य रूप है। इसे धन, सामंजस्य व आध्यात्मिक ऊर्जा आकर्षित करने हेतु पूजा जाता है।

श्री यंत्र मंत्र क्या है?+

एक सामान्य मंत्र है 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्म्यै नमः', जिसे यंत्र की ओर मुख करके 108 बार जपा जाता है ताकि इसकी ऊर्जा सक्रिय रहे।

श्री यंत्र कहाँ रखना चाहिए?+

इसे घर के मंदिर के ईशान कोण या उत्तर में, पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके, स्वच्छ वस्त्र पर फर्श से ऊपर रखें। स्नानघर, पलंग के पास शयनकक्ष या भूमि से बचें।

क्या श्री यंत्र को ऊर्जित करना आवश्यक है?+

हाँ। नियमित पूजा से पहले यंत्र को स्वच्छ कर प्राण प्रतिष्ठा मंत्रों से ऊर्जित करना चाहिए। इसके बाद दीपक व जप के साथ दैनिक पूजा इसकी ऊर्जा बनाए रखती है।

क्या श्री यंत्र दुकान या कार्यालय में रखा जा सकता है?+

हाँ। नकदी पेटी के पास या स्वामी के आसन की ओर श्री यंत्र व्यापार वृद्धि, आर्थिक बाधाएँ दूर करने और स्थिर आय आकर्षित करने हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है।

श्री यंत्र की कौन सी सामग्री सर्वोत्तम है?+

ताँबे, पीतल, चाँदी और स्फटिक (क्रिस्टल) के श्री यंत्र सभी मूल्यवान हैं। सबसे महत्वपूर्ण है सटीक, सममित ज्यामिति, क्योंकि दोषपूर्ण या असममित यंत्र से बचना उत्तम है।

MT

About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

Meet the Vandnaa editorial team →

Listen all aartis, mantras & bhajans in one place.

Download Vandnaa App.

Download Now

Explore on Vandnaa

संबंधित लेख