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सुखकर्ता दुखहर्ता - गणेश आरती (मराठी) बोल
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सुखकर्ता दुखहर्ता - गणेश आरती (मराठी) बोल

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

यह आरती किसके लिए है

सुखकर्ता दुखहर्ता भगवान गणेश को समर्पित सबसे प्रसिद्ध मराठी आरती है, जो महाराष्ट्र और उससे कहीं आगे, विशेषकर गणेश चतुर्थी में गाई जाती है। इसकी रचना 17वीं सदी के संत समर्थ रामदास ने की, जो पीढ़ियों के भक्तों के प्रेरणास्रोत गुरु रहे। चाहे घर के मंदिर में हो, सामुदायिक गणपति पंडाल में या दैनिक संध्या आरती में, यह गीत करोड़ों के लिए गणेश उपासना का हृदय है, जो बाप्पा को सुख देने वाले और दुख हरने वाले रूप में पुकारता है।

उद्गम और समर्थ रामदास की भक्ति

महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन के महान संत समर्थ रामदास ने यह आरती सहज मराठी में रची ताकि हर भक्त इसे सहजता और भाव से गा सके। आरती गणेश के सुंदर रूप का प्रेमपूर्ण विस्तार से वर्णन करती है और इस अंत के साथ समाप्त होती है कि रामदास स्वयं को प्रभु के चरणों में रखते हैं। इसकी लय इतनी स्वाभाविक है कि यह जहाँ भी गणपति की उपासना होती है वहाँ मानक समापन आरती बन गई है, जो परिवारों और पूरे मोहल्लों को गीत में जोड़ती है।

प्रतिनिधि प्रारंभिक छंद

आरती गणेश की कृपा का वर्णन करती अपनी सुप्रसिद्ध पंक्तियों से आरंभ होती है:

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची। नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची। सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची। कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची।

इसके बाद की टेक सबको प्रिय है:

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती। दर्शनमात्रे मन कामना पूर्ती, जय देव जय देव।

आरती का अर्थ

आरती का अर्थ

सुखकर्ता दुखहर्ता का अर्थ है सुख देने वाले और दुख हरने वाले - वे जो विघ्नों की सब वार्ता समाप्त कर देते हैं। छंद गणेश को हर अंग में सुंदर बताते हैं, उनका शरीर शेंदुर (सिंदूर) से अनुलिप्त, मोतियों की माला और रत्न आभूषण धारण किए। टेक जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती उन्हें मंगलमय रूप वाले प्रभु के रूप में नमन करती है जिनका मात्र दर्शन हृदय की कामनाएँ पूरी कर देता है, इसलिए भक्त उन्हें देखते ही उनका आशीर्वाद अनुभव करते हैं।

इसे कब और कैसे गाएँ

यह आरती गणेश की प्रातः व संध्या पूजा में और विशेषकर गणेश चतुर्थी के दिनों में गाई जाती है। 1. दीपक जलाएँ और मूर्ति के सामने दूर्वा, लाल पुष्प और मोदक अर्पित करें। 2. सुखकर्ता दुखहर्ता से आरंभ करें और टेक जय देव जय देव में शामिल हों। 3. सब तालियाँ बजाते व गाते हुए दीपक को गणेश के सामने दक्षिणावर्त घुमाएँ। 4. दीपक की ऊष्मा लेकर और विघ्नों के नाश हेतु प्रणाम कर समापन करें। परंपरागत रूप से इसके बाद अन्य देवताओं की आरतियाँ, फिर अनेक मराठी घरों में घालीन लोटांगण गाया जाता है।

लाभ और महत्व

सुखकर्ता दुखहर्ता को भक्ति से गाना गणेश के सुख, विघ्न-नाश और हर कार्य के शुभ आरंभ के आशीर्वाद को आमंत्रित करता माना जाता है। विघ्नहर्ता के रूप में किसी भी उपासना में गणेश को पहले पूजा जाता है, इसलिए यह आरती पूरी पूजा के लिए आनंदमय, आशामय भाव बनाती है और परिवार व समुदाय को एक साझा, अत्यंत प्रिय धुन में बाँधती है।

लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं

सुखकर्ता दुखहर्ता की रचना किसने की?+

इसकी रचना महाराष्ट्र के महान 17वीं सदी के संत समर्थ रामदास ने सहज मराठी में की, ताकि हर भक्त गणेश की आरती सहजता और भाव से गा सके।

सुखकर्ता दुखहर्ता का अर्थ क्या है?+

इसका अर्थ है 'सुख देने वाले और दुख हरने वाले'। आरती गणेश के सिंदूर-अनुलिप्त सुंदर रूप और सब विघ्नों को समाप्त करने की शक्ति की स्तुति करती है।

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती का अर्थ क्या है?+

यह गणेश को मंगलमूर्ती, मंगलमय रूप वाले प्रभु के रूप में नमन करती है, जिनका मात्र दर्शन हृदय की कामनाएँ पूरी कर देता है। यह आरती के छंदों के बीच गाई जाने वाली टेक है।

यह आरती कब गाई जाती है?+

इसे गणेश की प्रातः व संध्या पूजा में और विशेषकर गणेश चतुर्थी के दिनों में, मूर्ति के सामने जलते दीपक को दक्षिणावर्त घुमाते हुए गाया जाता है।

इस आरती के दौरान गणेश को क्या अर्पित किया जाता है?+

भक्त दूर्वा, लाल पुष्प और मोदक, साथ में जलता दीपक और धूप अर्पित करते हैं। मोदक गणेश का सबसे प्रिय मिष्ठान्न भोग माना जाता है।

क्या मराठी न जानने वाले यह आरती गा सकते हैं?+

हाँ। भारत भर के भक्त इसे मराठी में लिप्यंतरण की सहायता से गाते हैं, भले ही भाषा न बोलते हों। सच्ची भक्ति पूर्ण उच्चारण से अधिक मायने रखती है।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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