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वट पूर्णिमा व्रत 2026 - विवाहित स्त्रियों के लिए कथा और पूजा विधि
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वट पूर्णिमा व्रत 2026 - विवाहित स्त्रियों के लिए कथा और पूजा विधि

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

वट पूर्णिमा व्रत क्या है

वट पूर्णिमा विवाहित स्त्रियों (सुहागिनों) द्वारा अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य व समृद्धि के लिए रखा जाने वाला व्रत है। स्त्रियाँ वट (बरगद) वृक्ष के चारों ओर पवित्र सूत्र बाँधती हैं, जो दीर्घायु, आश्रय और विवाह के अटूट बंधन का प्रतीक है। यह व्रत सावित्री की पौराणिक भक्ति से प्रेरित है, जो अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस ले आईं। अनेक क्षेत्रों में इसे वट सावित्री व्रत भी कहा जाता है।

वट पूर्णिमा 2026 की तिथि और दिनांक

वट पूर्णिमा ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र) को मनाई जाती है, जो प्रायः ग्रेगोरियन माह मई या जून में पड़ती है। उत्तर भारत में अनेक स्त्रियाँ संबंधित वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को रखती हैं, जबकि महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण भारत में पूर्णिमा का पालन होता है - पूजा व कथा समान रहती है। चूँकि तिथि हर वर्ष बदलती है और समय क्षेत्रानुसार भिन्न होते हैं, वट पूर्णिमा 2026 की सटीक तिथि व मुहूर्त वंदना पंचांग पर देखें।

सावित्री-सत्यवान कथा

कथा सावित्री की है, एक पतिव्रता स्त्री जिसने यह जानते हुए भी सत्यवान से विवाह किया कि वे एक वर्ष में मृत्यु को प्राप्त होंगे। नियत दिन जब यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए, सावित्री अटल भक्ति व बुद्धि के साथ उनके पीछे चलीं। उनकी दृढ़ता से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें कई वरदान दिए। चतुराई से उन्होंने पुत्रों का वरदान माँगा - जो पति के बिना पूर्ण नहीं हो सकता था - और इस प्रकार यमराज ने सत्यवान का जीवन लौटा दिया। सावित्री पत्नी के प्रेम व विश्वास की शाश्वत प्रतीक बन गईं, और उनका व्रत उसी वट वृक्ष के नीचे रखा जाता है जहाँ सत्यवान पुनर्जीवित हुए।

वट पूर्णिमा पूजा विधि

वट पूर्णिमा पूजा विधि

पूजा प्रातःकाल वट वृक्ष के पास करें: 1. प्रातः उठकर स्नान करें और सुहागिन के रूप में सुंदर वस्त्र, चूड़ियाँ, बिंदी व सिंदूर धारण करें। 2. पूजा की थाली में जल, रोली-कुमकुम, अक्षत (चावल), पुष्प, फल, मिठाई व कच्चा सूती धागा रखें। 3. वट वृक्ष की जड़ों में जल चढ़ाएँ और तने पर कुमकुम व अक्षत लगाएँ। 4. पुष्प, फल व भोग अर्पित करें, और उसके सामने दीप व धूप जलाएँ। 5. पति की दीर्घायु की प्रार्थना करते हुए कच्चा धागा तने के चारों ओर सात बार लपेटें। 6. सावित्री-सत्यवान कथा सुनें या पढ़ें, फिर परिक्रमा करें और बड़ों से आशीर्वाद लें।

विवाहित स्त्रियों के लिए व्रत नियम

विवाहित स्त्रियाँ दिनभर निर्जला (बिना जल) व्रत रखती हैं, या यदि स्वास्थ्य कठोर व्रत की अनुमति न दे तो फल व दूध सहित फलाहारी व्रत रखती हैं। वे शुभ सुहागिन वेश धारण करती हैं और कटु वचन व क्रोध से बचती हैं। व्रत पूजा व कथा के बाद खोला जाता है, अक्सर किसी ब्राह्मण या बुजुर्ग को भोजन कराकर व उनका आशीर्वाद लेकर। गर्भवती स्त्रियाँ, अस्वस्थ व वृद्धजन अपनी क्षमता अनुसार सरल व्रत रखें।

मंत्र और लाभ

वृक्ष की परिक्रमा करते और जल अर्पित करते समय स्त्रियाँ इन मंत्रों से प्रार्थना करती हैं:

ॐ वट सावित्र्यै नमः

नमः सावित्र्यै वट वृक्ष रूपिण्यै

यह व्रत पति को दीर्घ, स्वस्थ जीवन देने, विवाह की रक्षा करने, घर में सामंजस्य व समृद्धि लाने, और परिवार को संतान व कल्याण का आशीर्वाद देने वाला माना जाता है। वरदानों से परे, यह सावित्री द्वारा साकार प्रेम, विश्वास व भक्ति के गहन आदर्श का उत्सव है।

पाठकों के प्रश्न

वट पूर्णिमा व्रत 2026 कब है?+

वट पूर्णिमा ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को आती है, प्रायः मई या जून में। उत्तर भारत अक्सर संबंधित व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को रखता है। 2026 की सटीक तिथि वंदना पंचांग पर देखें।

वट पूर्णिमा व्रत कौन रखता है?+

विवाहित स्त्रियाँ (सुहागिनें) यह व्रत अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य व समृद्धि के लिए रखती हैं, वट वृक्ष की पूजा कर सावित्री की भक्ति का अनुसरण करती हैं।

वट पूर्णिमा पर बरगद वृक्ष की पूजा क्यों होती है?+

वट (बरगद) वृक्ष दीर्घायु, आश्रय और विवाह के अटूट बंधन का प्रतीक है। सावित्री ने बरगद के नीचे सत्यवान को पुनर्जीवित किया, इसलिए स्त्रियाँ पति की दीर्घायु की प्रार्थना करते हुए उसके चारों ओर धागा बाँधती हैं।

सावित्री-सत्यवान कथा क्या सिखाती है?+

यह पतिव्रता स्त्री के प्रेम, विश्वास व बुद्धि की शक्ति सिखाती है। सावित्री की अटल भक्ति ने यमराज को उनके पति सत्यवान का जीवन लौटाने पर विवश किया, जिससे वे दांपत्य भक्ति की शाश्वत आदर्श बनीं।

क्या वट पूर्णिमा व्रत निर्जला होता है?+

अनेक स्त्रियाँ दिनभर निर्जला (बिना जल) व्रत रखती हैं। जिनका स्वास्थ्य इसकी अनुमति न दे, वे फल व दूध सहित फलाहारी व्रत रख सकती हैं, जिसे पूजा व कथा के बाद खोला जाता है।

वट वृक्ष के चारों ओर धागा कितनी बार लपेटा जाता है?+

वृक्ष को जल, कुमकुम, अक्षत व पुष्प अर्पित करने के बाद पति की दीर्घायु की प्रार्थना करते हुए कच्चा सूती धागा तने के चारों ओर सात बार लपेटा जाता है।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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