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व्रत के नियम - सामान्य उपवास नियम, करें और न करें
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व्रत के नियम - सामान्य उपवास नियम, करें और न करें

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

Reviewed by Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

व्रत क्या है और नियम क्यों मायने रखते हैं

व्रत उपवास और अनुशासन का संकल्प है जो किसी देवता को प्रसन्न करने, आध्यात्मिक पुण्य पाने या मनोकामना पूर्ति हेतु रखा जाता है। यह केवल भोजन छोड़ने से कहीं अधिक है - यह शरीर को शुद्ध करने, मन को स्थिर करने और दिन को भक्ति की ओर मोड़ने का तरीका है। नियम व्रत को सात्विक और सच्चा बनाए रखते हैं, ताकि उपवास मात्र अनुष्ठान नहीं बल्कि सच्ची भेंट बन जाए।

व्रत से पहले - संकल्प और तैयारी

1. प्रातः जल्दी स्नान करें और स्वच्छ, यथासंभव ताज़े वस्त्र पहनें। 2. देवता के समक्ष संकल्प लें - व्रत का नाम और रखे जाने वाले उपवास के प्रकार का स्पष्ट निश्चय। 3. अपना व्रत प्रकार ईमानदारी से तय करें: निर्जला (बिना जल), फलाहार (केवल फल), या एक सात्विक भोजन। 4. पूजा स्थान स्वच्छ करें और फलाहार सामग्री पहले से तैयार रखें। 5. दीप जलाएँ और प्रार्थना से आरंभ करें। अपनी क्षमता के भीतर लिया स्पष्ट संकल्प सफल व्रत की नींव है।

क्या खा सकते हैं (फलाहार)

अधिकांश व्रतों में सामान्य फलाहार भोजन:

  • सभी फल, फलों के रस और सूखे मेवे
  • दूध, दही, पनीर, घी और लस्सी
  • साबूदाना, मखाना और समक चावल
  • कुट्टू आटा और सिंघाड़े के आटे के व्यंजन
  • आलू, शकरकंद और अन्य व्रत सब्ज़ियाँ
  • साधारण नमक के स्थान पर सेंधा नमक

ये सामग्रियाँ व्रत को पौष्टिक बनाए रखती हैं और साथ ही व्रत की सात्विक सीमा में रहती हैं।

व्रत के दौरान क्या न करें

व्रत के दौरान क्या न करें

किसी भी व्रत के दौरान इन्हें त्यागें:

  • सभी अनाज - चावल, गेहूँ, मैदा, बेसन और दालें
  • साधारण नमक, केवल सेंधा नमक का प्रयोग
  • प्याज़, लहसुन और तामसिक भोजन
  • मांसाहार, अंडे, मद्य और तंबाकू
  • क्रोध, झूठ, चुगली और कटु वचन
  • दिन भर सोना और आलस्य

व्रत जितना भोजन पर नियंत्रण का है, उतना ही मन और वाणी पर नियंत्रण का भी है।

व्रत के दौरान - उपासना और आचरण

दिन उपासना, जप और देवता की संबंधित व्रत कथा, आरती व चालीसा पढ़ने में बिताएँ। मन को शांत और सकारात्मक रखें, झगड़ों व स्क्रीन के व्यवधानों से बचें, और जहाँ संभव हो दूसरों की सेवा करें। यदि व्रत में जल की अनुमति हो तो हल्के जलयुक्त रहें, और आवश्यकता हो तो पूरा दिन सोए बिना थोड़ा विश्राम करें। व्रत का आंतरिक अनुशासन भोजन के बाहरी त्याग जितना ही महत्वपूर्ण है।

व्रत खोलना और स्वास्थ्य सावधानी

व्रत (पारण) पूजा पूर्ण करने के बाद, पर्व अनुसार निर्धारित समय पर खोलें। फल, जल या हल्के फलाहार से कोमलता से आरंभ करें, फिर सामान्य सात्विक भोजन की ओर बढ़ें - तुरंत भारी, तैलीय या तीखा भोजन न लें। मधुमेह वाले, निम्न रक्तचाप या अम्लता वाले, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली माताएँ, बच्चे और वृद्धजन हल्का फल-दूध व्रत रखें या कठोर व्रत से बचें, और पहले चिकित्सक से परामर्श लें। किसी भी समय चक्कर या अस्वस्थता महसूस हो तो व्रत खोलें और विश्राम करें।

पाठकों के प्रश्न

व्रत में संकल्प क्या है?+

संकल्प व्रत के आरंभ में देवता के समक्ष लिया गया स्पष्ट निश्चय है, जिसमें व्रत और रखे जाने वाले उपवास का प्रकार बताया जाता है। यह व्रत को एकाग्रता और सच्चाई देता है।

व्रत के भोजन में सेंधा नमक क्यों प्रयोग होता है?+

सेंधा नमक असंसाधित होता है और शुद्ध व सात्विक माना जाता है, साधारण नमक के विपरीत जो व्रत में त्यागा जाता है। यह अधिकांश व्रतों में अनुमत एकमात्र नमक है।

क्या व्रत में पानी पी सकते हैं?+

यह व्रत के प्रकार पर निर्भर करता है। निर्जला व्रत में जल नहीं चलता, जबकि फलाहार या सामान्य व्रत में जल, दूध और फलों के रस की अनुमति है। अपने स्वास्थ्य अनुसार चुनें।

व्रत में भोजन के अलावा किससे बचना चाहिए?+

क्रोध, झूठ, चुगली, कटु वचन, आलस्य और दिन भर सोने से बचें। व्रत भोजन पर नियंत्रण जितना ही मन और वाणी पर नियंत्रण का है।

व्रत सही ढंग से कैसे खोलें?+

व्रत पूजा के बाद निर्धारित पारण समय पर, सामान्य सात्विक भोजन से पहले फल, जल या हल्के फलाहार से कोमलता से खोलें। एकदम भारी, तैलीय भोजन से बचें।

किन्हें कठोर व्रत से बचना चाहिए?+

मधुमेह वाले, निम्न रक्तचाप या अम्लता वाले, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली माताएँ, बच्चे और वृद्धजन हल्का फल-दूध व्रत रखें और कठोर व्रत से पहले चिकित्सक से परामर्श लें।

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About the author

Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

Anjali is the managing editor for Vandnaa and oversees the festival and vrat coverage. She holds an M.A. in Religious Studies and reviews every published article for accuracy, accessibility, and tradition-fidelity.

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