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हम पंच आरती (पाँच दीप) क्यों करते हैं - अर्थ और महत्व
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हम पंच आरती (पाँच दीप) क्यों करते हैं - अर्थ और महत्व

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

पंच आरती क्या है

पंच आरती एक विशेष दीप जिसे पंच-मुखी दीया या पंचारती कहते हैं, से प्रकाश का अर्पण है, जिसमें पाँच बत्तियाँ साथ जलती हैं। यह पूजा के अंत में की जाती है, जब आरती गीत गाते हुए दीप को देवता के समक्ष दक्षिणावर्त घुमाया जाता है। शब्द आरती आरात्रिक से आया है, जो अंधकार दूर करने का कर्म है, और पंच का अर्थ पाँच है।

पाँच ज्योतियों का आध्यात्मिक अर्थ

पाँच ज्योतियाँ पंच तत्व (पाँच तत्वों) का प्रतिनिधित्व करती हैं - पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश - जिनसे हमारे अपने शरीर सहित समस्त सृष्टि बनी है। पाँचों को देवता के समक्ष घुमाकर हम सम्पूर्ण ब्रह्मांड और अपने अस्तित्व को पुनः परमात्मा को अर्पित करते हैं। प्रकाश का यह एकल कर्म अहंकार को शुद्ध चेतना की ज्योति में विलीन करने का प्रतीक है।

शास्त्रीय और सांस्कृतिक कारण

आगम और पूजा परंपराएँ आरती को देवता को अर्पित अंतिम उपचार (सेवा) के रूप में निर्धारित करती हैं, जो जल, पुष्प व धूप के बाद प्रकाश से पूजा को पूर्ण करती है। संख्या पाँच हिंदू चिंतन में बार-बार आती है - पाँच तत्व, पाँच प्राण, पंचोपचार पूजा - इसलिए पंच आरती इन पाँच-गुना शक्तियों को ज्योति के एकल अर्पण में समेटती है। साथ मिलकर आरती गाना परिवार व समुदाय को साझा भक्ति में भी बाँधता है।

विज्ञान और व्यावहारिक पक्ष

विज्ञान और व्यावहारिक पक्ष

दीप पारंपरिक रूप से घी या कपूर से जलाए जाते थे, जिनका दहन वायु को शुद्ध करता और बंद मंदिर स्थान में कीटाणु कम करता माना जाता था। पाँच ज्योतियों का गर्म, टिमटिमाता प्रकाश पूजा के अंत में आँखों व मन को एकाग्र व स्थिर करने में सहायक है। दीप घुमाना उसकी गर्मी व सुगंध को समान रूप से फैलाता है, और घंटी व आरती की उठती ध्वनि शांतिदायक स्पंदन उत्पन्न करती है जो तनाव कम करते हैं।

पंच आरती सही ढंग से कैसे करें

1. पाँच-बत्ती दीप को घी से भरें और ताजी रुई की बत्तियाँ रखें; पाँचों ज्योतियाँ जलाएँ। 2. दीप को दाएँ हाथ में लें और बाएँ हाथ से घंटी बजाएँ। 3. देवता के समक्ष दीप को दक्षिणावर्त घुमाएँ - परंपरा अनुसार पहले चरणों पर (चार वृत्त), फिर नाभि पर (दो), फिर मुख व सम्पूर्ण रूप पर। 4. घुमाते समय भक्ति से आरती गाएँ। 5. आरती के बाद अपनी हथेलियाँ ज्योति पर फेरें और आशीर्वाद ग्रहण करने हेतु आँखों व मस्तक से स्पर्श करें। दीप को स्थिर रखें और ज्योति को कभी फूँक से न बुझाएँ; उसे स्वयं शांत होने दें या बत्ती का प्रयोग करें।

पंच आरती के लाभ

पंच आरती करना पूजा को पूर्ण करता, नकारात्मकता दूर करता और घर को शुभ, शुद्ध ऊर्जा से भरता माना जाता है। गर्म प्रकाश और लयबद्ध गायन मन को शांत करते व भाव उठाते हैं, पूजा को आनंद व कृतज्ञता के स्वर में समाप्त करते हैं। प्रतिदिन करने पर यह घर में व्यवस्था व भक्ति का भाव लाता और पूरे परिवार को कोमलता से मंदिर पर एकत्र करता है।

भक्तों के सामान्य प्रश्न

पंच आरती की पाँच ज्योतियाँ क्या दर्शाती हैं?+

पाँच ज्योतियाँ पंच तत्व (पाँच तत्वों) - पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश - का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिनसे समस्त सृष्टि व हमारा शरीर बना है। उन्हें घुमाना सम्पूर्ण ब्रह्मांड को परमात्मा को अर्पित करता है।

आरती दक्षिणावर्त क्यों घुमाई जाती है?+

दीप को दक्षिणावर्त घुमाना शुभ प्रदक्षिणा दिशा का पालन करता है, जिसमें देवता दाईं ओर रहते हैं। यह दिव्य रूप के चारों ओर सम्मान से प्रकाश घुमाने की पारंपरिक विधि है।

पंच आरती के दीप में कौन सा ईंधन प्रयोग करें?+

घी पसंदीदा ईंधन है, क्योंकि उसका दहन वायु के लिए शुद्ध व पवित्रकारी माना जाता है। कपूर भी प्रयोग होता है। प्रत्येक आरती हेतु रुई की बत्तियाँ ताजी व स्वच्छ होनी चाहिए।

हम आरती की ज्योति पर हाथ क्यों फेरते हैं?+

ज्योति पर हथेलियाँ फेरना और आँखों व मस्तक से स्पर्श करना देवता के प्रकाश व आशीर्वाद को ग्रहण करने का तरीका है। यह परमात्मा की गर्मी व कृपा को स्वयं में लेने का प्रतीक है।

क्या आरती की ज्योति फूँक से बुझानी चाहिए?+

नहीं। ज्योति को कभी मुँह से फूँक कर नहीं बुझाना चाहिए, क्योंकि इसके लिए श्वास अशुद्ध मानी जाती है। उसे स्वयं शांत होने दें या बत्ती अथवा हाथ के पंखे से कोमलता से बुझाएँ।

पूजा में पंच आरती कब की जाती है?+

पंच आरती पूजा का अंतिम चरण है, जो जल, पुष्प, धूप और भोग अर्पित करने के बाद की जाती है। यह प्रकाश से पूजा को पूर्ण करती है और इसके बाद आशीर्वाद व प्रसाद ग्रहण किया जाता है।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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