वह एकादशी जो शापों से मुक्त करती है
हिंदू वर्ष की 24 एकादशियों में योगिनी एकादशी की विशिष्ट पहचान - यही व्रत पैतृक शाप, बार-बार आते चर्म रोग, और पूर्व जन्म कर्म रुकावटें तोड़ता है।
ब्रह्म वैवर्त पुराण कहता है - योगिनी एकादशी व्रत 1000 वर्ष तक 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने का पुण्य देता है - समस्त शास्त्रों में सर्वोच्च पुण्य समानताओं में से एक।
योगिनी एकादशी 2026 रविवार, 21 जून 2026 - आषाढ़ कृष्ण एकादशी को है। यह निर्जला एकादशी (सर्वाधिक कठोर) व देवशयनी एकादशी (जब विष्णु 4 माह सोते हैं) के बीच आती है। इसकी स्थिति संयोग नहीं - यह विष्णु की ब्रह्मांडीय निद्रा से पहले अंतिम एकादशी है, अतः चातुर्मास आरंभ से पूर्व बड़े कर्म साफ करने का अंतिम अवसर।
व्रत का नाम योगिनियों पर - 64 रहस्यमयी स्त्री रूप जो देवी दुर्गा की सेवा में हैं और कर्म धागों को बाँधने या मुक्त करने की शक्ति रखती हैं। आज वे अदृश्य धरती पर विचरण करती हैं, व्रत करने वालों को अगले कर्म चक्र में मुक्ति हेतु चिह्नित करती हैं।
🙏 यदि वर्षों से 'अटका हुआ' अनुभव कर रहे हैं - वही समस्या बार-बार, स्वास्थ्य दोहराव, धन कभी न टिकना - योगिनी एकादशी वही व्रत है जो शास्त्र निर्धारित करते हैं। वंदना ऐप के योगिनी एकादशी रिमाइंडर व हेम माली कथा ऑडियो से आरंभ करें।
योगिनी एकादशी 2026 - तिथि, मुहूर्त व पारण समय
📅 व्रत तिथि: रविवार, 21 जून 2026 🕒 एकादशी तिथि प्रारंभ: 20 जून 2026, सायं 8:14 🕒 एकादशी तिथि समाप्त: 21 जून 2026, सायं 6:42
संकल्प समय (प्रातः): 21 जून, सुबह 5:24 – 7:00 श्रेष्ठ पूजा मुहूर्त: 21 जून, सुबह 7:00 – 11:30 अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:58 – दोपहर 12:54
🍎 पारण (व्रत खोलना): सोमवार 22 जून 2026, सुबह 5:24 – 8:13 द्वादशी तिथि समाप्त: 22 जून, सायं 4:38 (पारण इससे काफी पहले अनिवार्य)
विशेष 2026 योग - दक्षिणायन आरंभ: योगिनी एकादशी 2026 दक्षिणायन-उत्तरायण संक्रमण दिवस (वर्ष का सबसे लंबा दिन) पर आती है। आज से सूर्य दक्षिण बढ़ना आरंभ करता है (दक्षिणायन) - कर्म शुद्धि का ब्रह्मांडीय काल। यह 2026 की योगिनी एकादशी को पूरे दशक की सबसे शक्तिशाली बनाता है।
बचें: रविवार राहु काल (सायं 5:00 – 6:42) - इसमें कोई नई पूजा न आरंभ करें। एकादशी तिथि भी सायं 6:42 पर समाप्त, अतः सारी पूजा सायं 5 बजे से पहले पूर्ण करें।
हेम माली कथा - एक व्रत ने एक शाप कैसे तोड़ा

अलकापुरी नगरी में महान यक्षराज कुबेर का राज्य - ब्रह्मांड के सबसे धनी प्राणी, सम्पूर्ण पृथ्वी के कोषागार के स्वामी। कुबेर भगवान शिव के भक्त थे, मानसरोवर के ताज़े पुष्पों से दैनिक पूजा करते थे।
उनका राजकीय माली था हेम माली। हर प्रातः सूर्योदय से पूर्व हेम माली मानसरोवर जाकर ताज़ा कमल व श्वेत पुष्प चुनकर 11 बजे की दैनिक पूजा से पहले कुबेर को पहुँचा देता। कुबेर का पूर्ण विश्वास।
हेम माली की सुंदर पत्नी विशालाक्षी थी। वह पत्नी से अत्यधिक - बहुत अधिक - आसक्त था।
एक दिन हेम माली मानसरोवर गया, फूल एकत्र किए, पर सीधे महल लौटने के बजाय पहले घर गया। प्रातः के क्षण पत्नी संग एकांत में बिताए। समय बीता। कुबेर पूजा वेदी पर शिवलिंग के बिना अभिषेक प्रतीक्षा करते रहे - वर्षों में पहली बार दैनिक पूजा समय पर न हुई।
कुबेर क्रोधित - कि एक व्यक्ति की वासना के कारण उनका शिव-भक्ति बंधन टूटा। दूत भेजा। दूत सत्य लाया - 'महाराज, हेम माली अपनी पत्नी संग शयन कक्ष में है।'
कुबेर भड़क उठे। हेम माली को बुलाया, जीवन का सबसे भयानक शाप दिया -
'तुमने अपनी देह सुख हेतु मेरी शिव-पूजा भंग कराई। इस क्षण से तुम अलकापुरी से निष्कासित, प्रिय पत्नी से वियोग, और श्वेत कुष्ठ से ग्रस्त - तुम्हारी त्वचा सड़कर गिरेगी। मरने तक अछूत बनकर पृथ्वी पर भटकोगे।'
हेम माली रोते हुए गिर पड़ा। शाप तत्काल प्रभावी। त्वचा छिलने लगी। पत्नी से बलपूर्वक वियोग। अलकापुरी से निष्कासित।
वर्षों हेम माली पृथ्वी पर भटकता - कुष्ठी, भूखा, प्यासा, अस्वीकृत, पीड़ा में। मृत्यु चाहता पर मृत्यु न आती।
एक दिन वह हिमालय में मार्कण्डेय मुनि के आश्रम पहुँचा। मुनि सहस्राब्दियों से जीवित, अपनी दिव्य दृष्टि से हेम माली की कथा जानते थे। कुष्ठी को करुणा से देखा।
'हाँ पुत्र,' मार्कण्डेय बोले। 'तेरा पाप बड़ा, पर उपचार है। पूर्ण विधि से योगिनी एकादशी व्रत कर - एक बार। बस एक बार। आषाढ़ कृष्ण एकादशी पर कुछ न खा, विष्णु पूजा कर, उनका नाम जप, जरूरतमंद को दान कर। शाप टूट जाएगा।'
हेम माली ने पूरी शक्ति से योगिनी एकादशी को निर्देशानुसार किया। निर्जला उपवास, दिन भर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' जप, मंदिर प्रांगण में सोया।
अगले प्रातः पारण पर हाथ देखे। त्वचा भर रही थी। अलकापुरी लौटते-लौटते पूर्ण शरीर ठीक। कुबेर ने स्वस्थ देखकर पूछा कैसे। हेम माली ने योगिनी एकादशी कथा सुनाई, कुबेर स्वयं भक्त बने व ब्रह्मांड भर में इसकी घोषणा की।
उस दिन से योगिनी एकादशी वह व्रत है जो - एक उपवास से - सबसे गहरा शाप तोड़ता व सबसे गहरा रोग ठीक करता है।
योगिनी एकादशी व्रत - चरणबद्ध विधि

एक दिन पहले (दशमी - 20 जून): सूर्यास्त से पहले एक सात्विक भोजन। सूर्यास्त के बाद अन्न नहीं। स्नान, पूजा कक्ष की सफाई, ताज़े फूल व नया दीया। सोने से पहले स्वयं को संकल्प कहें - मन तैयार होता है।
चरण 1 - स्नान व संकल्प (सुबह 5:00, 21 जून): सूर्योदय से पहले स्नान। संभव हो तो कुछ बूँद गंगाजल। स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र। पूजा कक्ष में पूर्व मुख बैठें। दाहिने हाथ में जल + अक्षत + तुलसी पत्र लेकर कहें -
'मैं [नाम], इस आषाढ़ कृष्ण एकादशी पर इस व पूर्व जन्मों के सभी शाप, रोग व कर्म रुकावटें मिटाने हेतु योगिनी एकादशी व्रत धारण करता/करती हूँ। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।'
जल मंदिर के फर्श पर अर्पण।
चरण 2 - विष्णु पूजा: विष्णु मूर्ति/चित्र पर दूध + गंगाजल अभिषेक। पीला चंदन तिलक। पीले फूल, तुलसी, फल, पंचामृत। घी दीया। आज विशेष - विष्णु के सामने थाली में 64 छोटे अक्षत ढेर (या 8x8 जाल) रखें - 64 योगिनियों को प्रतीकात्मक अर्पण।
चरण 3 - हेम माली कथा: ऊपर की हेम माली कथा पढ़ें या सुनें। यह अनिवार्य - कथा बिना योगिनी एकादशी व्रत अधूरा। परिवार को सुनाएँ।
चरण 4 - मंत्र जप: तुलसी माला पर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' न्यूनतम 108 जप। शाप-नाश हेतु योगिनी मंत्र का 108 जप - 'ॐ ह्रीं योगिन्यै नमः' - 11 माला (1188) आदर्श।
चरण 5 - फलाहार/निर्जल (दिन भर): अन्न, नमक (केवल सेंधा), प्याज, लहसुन, मसूर वर्जित। अनुमत - जल, दूध, फल, साबूदाना, मखाना। जागृत रहें। वाद-विवाद, कठोर वचन से बचें।
चरण 6 - दोपहर 'शुद्धि' अनुष्ठान: ताम्र या स्टील थाली। थोड़ा स्वच्छ जल + 1 चम्मच गंगाजल + 7 तुलसी पत्र + चुटकी हल्दी। दाहिनी तर्जनी से 'ॐ ह्रीं योगिन्यै नमः' 21 बार जपते हुए मिलाएँ। फिर यह जल स्वयं पर छिड़कें (सिर + कंधे + हृदय)। यह 'सूक्ष्म-स्नान' सक्रिय रूप से नकारात्मक कर्म धागे मुक्त करता है। अनेक भक्त इस एक अनुष्ठान के बाद पुराने चर्म रोगों में स्पष्ट राहत बताते हैं।
चरण 7 - संध्या आरती व भजन: सूर्यास्त पर (सायं 6:42 एकादशी समाप्ति से पहले) पंच-बत्ती घी दीया। विष्णु आरती। संभव हो तो मध्यरात्रि तक हरि कीर्तन।
चरण 8 - पारण (सोमवार प्रातः, 22 जून): सूर्योदय स्नान। विष्णु पूजा। पहले भोग (पीला चावल + खीर + तुलसी)। स्वयं खाने से पहले ब्राह्मण/जरूरतमंद को भोजन/वस्त्र/मुद्रा। पारण समय - सुबह 5:24 – 8:13।
दान (अत्यंत अनुशंसित): चर्म रोग वाले व्यक्ति को वस्त्र, कुष्ठ बस्ती को भोजन, औषधि, या किसी पुराने रोगी का उपचार प्रायोजन। योगिनी एकादशी पर रोगियों को दान पैतृक रोगों के कर्म नष्ट करता है।
शाप निवारण हेतु योगिनी एकादशी पर जप के 5 मंत्र
1. विष्णु मूल मंत्र (प्रातः 108, सायं 108) ॐ नमो भगवते वासुदेवाय → 12-अक्षरी मंत्र। 7 जन्मों के कर्म मिटाता है।
2. योगिनी बीज मंत्र (आज विशेष - संभव हो तो 1188 जप) ॐ ह्रीं योगिन्यै नमः → 64 योगिनियों को आमंत्रण कर्म धागे मुक्त करने हेतु। पैतृक शाप, बार-बार पैटर्न, अवरुद्ध संबंध तोड़ने हेतु श्रेष्ठ।
3. विष्णु सहस्रनाम प्रारंभ (किसी पुराने रोग हेतु) शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्। प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये॥ → रोग सहित सभी विघ्न दूर। 21 बार जप।
4. मार्कण्डेय महामृत्युंजय (शाप-नाश हेतु) ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ → स्वयं मार्कण्डेय मुनि द्वारा दिया महामृत्युंजय मंत्र - वही ऋषि जिन्होंने हेम माली का मार्गदर्शन किया। शाप-नाश व जीवन-रक्षा हेतु शक्तिशाली। विष्णु मंत्र के बाद 108 जप।
5. लक्ष्मी-नारायण कर्म-नाशन मंत्र ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री लक्ष्मीनारायणाय कर्म-दोष-निवारणाय फट् स्वाहा → कर्म-दोष विशेष नाशक। 'जो भी प्रयास करूँ कुछ रोक रहा है' - ऐसा अनुभव करने वालों हेतु अत्यंत अनुशंसित।
🎧 पाँचों मंत्र शुद्ध संस्कृत उच्चारण, पूर्ण हेम माली कथा (हिंदी/अंग्रेजी ऑडियो), व 1188-जप मार्गदर्शित सत्र वंदना ऐप पर। ऐप में योगिनी एकादशी अलार्म से समय पर पारण।
ब्रह्म वैवर्त पुराण में दर्ज 7 विशिष्ट लाभ
1. 1000 वर्ष तक 88,000 ब्राह्मण भोजन के बराबर। ब्रह्म वैवर्त पुराण का सटीक वाक्य - '88,000 ब्राह्मण भोजन का पुण्य, एक योगिनी एकादशी व्रत से प्राप्य।'
2. पैतृक शाप से मुक्ति। हेम माली को कुबेर का शाप - शास्त्रों का सबसे प्रबल। योगिनी एकादशी ने तोड़ा। तार्किक विस्तार से कोई भी पैतृक शाप पैटर्न (सात पीढ़ी अविवाहित कन्याएँ, पीढ़ियों में दोहराई आर्थिक हानि, परिवार में दोहराई दुखद मृत्यु) शुद्ध हो सकता है।
3. पुराने चर्म रोगों का उपचार। हेम माली को श्वेत कुष्ठ था। व्रत ने पूर्ण ठीक किया। एक्जिमा, सोरायसिस, श्वित्र, बार-बार मुँहासे, रहस्यमय चकत्ते वाले अनेक भक्त 3-7 लगातार योगिनी एकादशी व्रत के बाद उल्लेखनीय राहत बताते हैं।
4. पूर्व जन्म कर्म नाश। आषाढ़ कृष्ण पक्ष - पितृ पक्ष का निकटतम ब्रह्मांडीय मास - में आने से, योगिनी एकादशी पूर्व जन्मों से लाए कर्म पर अनोखी शक्ति रखती है।
5. 'अटके' पैटर्न हटाना। जो लोग सब सही कर रहे हैं पर कुछ नहीं बढ़ रहा - करियर रुका, संबंध आगे न बढ़े, उपचार के बाद भी स्वास्थ्य न सुधरे - योगिनी एकादशी के बाद अचानक प्रगति।
6. विष्णु निद्रा से पहले अंतिम अवसर। अगली एकादशी (देवशयनी, 16 जुलाई) विष्णु की 4-माह निद्रा का प्रारंभ। उसके बाद विष्णु सांसारिक प्रार्थनाओं पर कम प्रतिक्रियाशील। योगिनी एकादशी इस ब्रह्मांडीय विराम से पहले बड़े कर्म साफ करने की अंतिम 'खिड़की'।
7. योगिनी आशीर्वाद सक्रियण। 64 योगिनियाँ सामान्य भक्तों के लिए अप्राप्य। केवल योगिनी एकादशी पर वे सक्रिय व श्रवणशील। आज की गई सच्ची प्रार्थना उनके ब्रह्मांडीय खाते में दर्ज।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सक्रिय चर्म रोग वाले लोग योगिनी एकादशी निर्जला व्रत कर सकते हैं?+
हाँ - पर शरीर सुनें। चर्म रोग बढ़े जल सेवन (जो विषहरण में सहायक) से लाभान्वित - अतः पर्याप्त जल (खीरा, तरबूज, नारियल पानी) सहित फलाहार वास्तव में निर्जला से अधिक प्रभावी। दोपहर शुद्धि अनुष्ठान न छोड़ें (जल + गंगाजल + तुलसी + हल्दी छिड़काव)। व्रत के साथ प्रभावित स्थानों पर तिल तेल + कुछ तुलसी पत्र मिश्रण से दिन में दो बार मालिश। अनेक भक्त बताते हैं - सर्वाधिक उपचार इसी संयुक्त उपागम से, अति उपवास से नहीं।
क्या केवल एक इच्छा (जैसे शाप-नाश) हेतु योगिनी एकादशी ठीक है, या निरंतर अभ्यास चाहिए?+
हेम माली एक योगिनी एकादशी व्रत से ठीक हुआ। शास्त्र स्पष्ट - पूर्ण विधि व सच्चे भाव से किया एक व्रत शाप-नाश हेतु पर्याप्त। फिर भी पुरानी स्थितियों (दीर्घकालिक रोग, पीढ़ीगत पैटर्न) हेतु 7 लगातार योगिनी एकादशियाँ (7 वर्षों में) निर्धारित चक्र। उसके बाद वार्षिक रखरखाव। एक को कम न समझें - हेम माली का जीवन बदल गया। सात को अधिक न समझें - आपके लिए स्थायी हो।
योगिनी एकादशी व देवशयनी एकादशी में क्या अंतर है?+
योगिनी एकादशी (कृष्ण पक्ष - 21 जून) सक्रिय कर्म शुद्धि हेतु - पूर्व पाप नाश, शाप तोड़ना, विघ्न हटाना। देवशयनी एकादशी (शुक्ल पक्ष - 16 जुलाई) निष्क्रिय भक्ति हेतु - चातुर्मास का आरंभ जहाँ विष्णु सोते हैं और भक्त सांसारिक कार्य से ज्यादा आंतरिक साधना पर ध्यान देते हैं। योगिनी = पूर्व रुकावटें हटाना। देवशयनी = आंतरिक यात्रा आरंभ। अधिकांश भक्त दोनों रखते हैं - योगिनी शुद्धि हेतु, देवशयनी गहराई हेतु। वे एक 25-दिवसीय ब्रह्मांडीय परिवर्तन काल के दो छोर हैं।
क्या मुझे विशेष रूप से 64 योगिनियों की प्रार्थना करनी होगी, या सामान्य विष्णु पूजा पर्याप्त?+
विष्णु पूजा प्राथमिक आवश्यकता - योगिनी एकादशी मूलतः विष्णु व्रत है। 64 योगिनियाँ पूजा थाली पर अक्षत-जाल (8x8) अर्पण द्वारा प्रतीकात्मक सम्मान। सभी 64 नाम जपने की आवश्यकता नहीं। एक योगिनी बीज मंत्र 'ॐ ह्रीं योगिन्यै नमः' का 108 जप सामूहिक रूप से उन्हें संबोधित करता है। गहराई से चाहें तो खजुराहो, हीरापुर (ओडिशा), मितावली (MP), रानीपुर झरिआल (ओडिशा) के 64 योगिनी मंदिर एकमात्र भौतिक स्थान जहाँ प्रत्यक्ष उपासना हो सकती है - योगिनी एकादशी पर दर्शन परम व्रत।
यदि चिकित्सकीय कारणों से व्रत नहीं रख सकता/सकती, तो भी योगिनी एकादशी लाभ मिलेगा?+
हाँ - बिल्कुल। पद्म पुराण कहता है कि चिकित्सकीय रूप से व्रत असमर्थ लोग पुण्य पा सकते हैं - (1) दिन में तीन बार हेम माली कथा पढ़ें या सुनें, (2) ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का 1008 जप (लगभग 90 मिनट), (3) न्यूनतम 7 जरूरतमंदों को एक पूर्ण भोजन, (4) दिन भर केवल सात्विक भोजन (प्याज/लहसुन/अन्न नहीं), (5) ब्राह्मणों को पीले वस्त्र व जल दान। पाँचों विकल्प मिलकर समान पुण्य। ईश्वर भाव मापते हैं, तकनीक नहीं। गर्भवती, मधुमेह रोगी, वृद्धजन, रोगी निर्जला न करें - यह 5-कार्य विकल्प करें।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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