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अजा एकादशी 2026: तिथि, व्रत विधि, कथा और महत्व
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अजा एकादशी 2026: तिथि, व्रत विधि, कथा और महत्व

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 17, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

अजा एकादशी क्या है?

अजा एकादशी हिंदू माह भाद्रपद के कृष्ण पक्ष (घटते चंद्रमा) की एकादशी (11वीं तिथि) है। यह व्रत पूर्ण रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है, और कुछ क्षेत्रों में इसे अन्नदा एकादशी भी कहा जाता है।

अजा शब्द का अर्थ है जो अजन्मा और शाश्वत है - परमात्मा का एक नाम। भक्तों का विश्वास है कि श्रद्धा से यह व्रत करने पर अनेक जन्मों के पाप मिट जाते हैं और सांसारिक सुख तथा मोक्ष दोनों प्राप्त होते हैं। यह व्रत राजा हरिश्चंद्र की अपनी शक्तिशाली कथा के लिए प्रसिद्ध है, वह राजा जिसने कभी झूठ नहीं बोला।

अजा एकादशी 2026 - तिथि और पारण समय

📅 तिथि: भाद्रपद, कृष्ण पक्ष एकादशी 🗓️ तारीख: सितंबर 2026 की शुरुआत (लगभग 7-8 सितंबर)

एकादशी तिथि दो दिनों में फैली होती है, इसलिए सटीक व्रत दिवस और पारण (व्रत तोड़ने) का समय शहर के अनुसार बदलता है। तिथि के आरंभ और समाप्ति को सदा अपने स्थानीय पंचांग में देखें।

सामान्य नियम:

  • व्रत एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक रखा जाता है।
  • पारण द्वादशी की सुबह सूर्योदय के बाद निर्धारित समय में किया जाता है - हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) में कभी नहीं।
  • व्रत देर से या एकादशी के दिन ही तोड़ना वर्जित है।

अजा एकादशी व्रत विधि (चरण दर चरण)

1. दशमी (एक दिन पहले): एक बार सादा सात्विक भोजन करें, रात में अन्न न लें और व्रत का संकल्प लें। 2. एकादशी की सुबह: जल्दी स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु के चित्र या मूर्ति के समक्ष व्रत का संकल्प लें। 3. पूजा: विष्णु जी को तुलसी पत्र, पीले पुष्प, फल, पंचामृत और घी का दीपक अर्पित करें। तुलसी अनिवार्य है - तुलसी के बिना विष्णु पूजा कभी न करें। 4. जप और पाठ: विष्णु सहस्रनाम या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करें, और अजा एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें। 5. व्रत: स्वास्थ्य अनुमति दे तो निर्जला रखें, अन्यथा फल, दूध और जल (फलाहार) लें। चावल और अन्न का पूर्णतः त्याग करें। 6. रात्रि: यथासंभव जागरण करें, भजन गाते हुए हरि का स्मरण करें। 7. द्वादशी: संक्षिप्त पूजा करें, ब्राह्मण या जरूरतमंद को अन्न या दान दें, फिर सही मुहूर्त में पारण करें।

राजा हरिश्चंद्र की कथा

राजा हरिश्चंद्र की कथा

ब्रह्मवैवर्त पुराण बताता है कि यह एकादशी इतनी शक्तिशाली क्यों है। सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने अपने वचन की रक्षा के लिए अपना पूरा राज्य दान कर दिया था, पत्नी और पुत्र को बेच दिया, और स्वयं श्मशान में एक चांडाल के सेवक बन गए।

सत्य के अपने व्रत में बँधे हुए उन्होंने भयंकर कष्ट सहे पर कभी झूठ नहीं बोला। एक दिन ऋषि गौतम ने उनकी पीड़ा देखकर उन्हें अजा एकादशी व्रत करने की सलाह दी। राजा ने पूर्ण श्रद्धा से व्रत किया और विष्णु की पूजा की।

इस एक व्रत के पुण्य से उनके पाप और दुःख मिट गए। उनका मृत पुत्र पुनर्जीवित हुआ, पत्नी और राज्य लौट आए, और अंत में वे अपनी प्रजा सहित स्वर्ग को प्राप्त हुए। कथा सिखाती है कि सत्य और सच्ची भक्ति मिलकर किसी भी भाग्य पर विजय पा सकती है।

महत्व और लाभ

  • पापों का नाश: शास्त्र कहते हैं कि इसका पुण्य गौदान या तीर्थ स्नान के समान है।
  • मन की शांति: अनुशासित व्रत और विष्णु स्मरण मन को शांत और भावनाओं को स्थिर करते हैं।
  • परिवार का कल्याण: बहुत से लोग इसे अपने घर के स्वास्थ्य और सुख के लिए रखते हैं।
  • मोक्ष का मार्ग: सभी एकादशियों की भाँति यह सांसारिक बंधन ढीला कर हृदय को मुक्ति की ओर मोड़ती है।

जो पूर्ण व्रत नहीं रख सकते वे भी केवल सात्विक फलाहार लेकर, विष्णु नाम जपकर और जरूरतमंद को अन्न दान कर पुण्य पा सकते हैं।

पाठकों के प्रश्न

2026 में अजा एकादशी कब है?+

अजा एकादशी 2026 भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी को, सितंबर की शुरुआत में (लगभग 7-8 सितंबर) पड़ती है। तिथि दो दिनों में फैली होने के कारण सटीक व्रत दिवस और पारण समय अपने स्थानीय पंचांग में देखें।

क्या अजा एकादशी व्रत में जल पी सकते हैं?+

हाँ। निर्जला व्रत सबसे कठोर रूप है, पर यह वैकल्पिक है। यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे तो जल, दूध और फल (फलाहार) ले सकते हैं। मुख्य नियम है सभी अन्न और चावल का त्याग।

अजा एकादशी पूजा में तुलसी क्यों महत्वपूर्ण है?+

कहा जाता है कि भगवान विष्णु तुलसी के बिना कोई भोग स्वीकार नहीं करते। प्रसाद पर और उनके चरणों में रखे कुछ तुलसी पत्र पूजा पूर्ण करने के लिए अनिवार्य माने जाते हैं। एकादशी के दिन तुलसी न तोड़ें - पत्ते एक दिन पहले तोड़ लें।

अजा एकादशी व्रत तोड़ने का सही समय क्या है?+

व्रत का पारण द्वादशी की सुबह सूर्योदय के बाद, पंचांग में दिए मुहूर्त के भीतर करें, और हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई) से बचें। विष्णु को भोग अर्पित करने के बाद सात्विक भोजन से पारण करें।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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