वह दिन जब विष्णु निद्रा में जाते हैं
सभी 24 एकादशियों में देवशयनी एकादशी का अनोखा महत्व - यह वह दिन है जब भगवान विष्णु योग निद्रा में प्रवेश करते हैं - ब्रह्मांडीय निद्रा - पूरे 4 माह हेतु। वे क्षीर सागर (दूध के ब्रह्मांडीय सागर) में शेषनाग की कुंडलियों पर लेटते हैं, और इस दिन से देवुठनी एकादशी (जब वे जागते हैं) तक ब्रह्मांड चातुर्मास - 'चार माह का विराम' - में प्रवेश करता है।
देवशयनी एकादशी 2026 गुरुवार, 16 जुलाई 2026 - आषाढ़ शुक्ल एकादशी को है। आषाढ़ी एकादशी, पद्म एकादशी, हरि शयनी एकादशी, और (महाराष्ट्र में) प्रसिद्ध पंढरपुर आषाढ़ी वारी तीर्थयात्रा का दिन।
4 माह तक - देवुठनी एकादशी मंगलवार, 12 नवंबर 2026 तक - सनातन धर्म चातुर्मास मनाता है -
- कोई विवाह, कोई सगाई नहीं
- कोई गृह प्रवेश समारोह नहीं
- कोई नए व्यवसाय या बड़े निवेश आरंभ नहीं
- कोई वाहन, स्वर्ण या संपत्ति खरीद नहीं
- बच्चों का पहला मुंडन या पहला अन्नप्राशन नहीं
- अनेक भक्त व्रत लेते हैं - विशेष भोजन निषेध, बाल नहीं कटाना, आदि
क्यों? क्योंकि सभी शुभ गतिविधियाँ भगवान विष्णु के सक्रिय आशीर्वाद की अपेक्षा रखती हैं। जब वे सोते हैं, ब्रह्मांडीय विवाह-साक्षी, अनुबंध-आशीर्वाद कार्य रुक जाते हैं। चातुर्मास में बड़े शुभ कार्य करना दिव्य साक्षी के बिना आरंभ करना माना जाता है।
पर चातुर्मास 'मृत समय' नहीं। यह वर्ष का सर्वाधिक आध्यात्मिक रूप से सक्रिय काल है। विवाहों व पर्वों की बाह्य विकर्षणों के बिना, मन अंतर्मुखी होता है। साधु परंपरागत रूप से चातुर्मास में यात्रा नहीं करते - एक स्थान पर रहकर तीव्र साधना करते हैं। गृहस्थ छोटे व्रत लेते हैं। भागवत पुराण (विशेषतः 11वाँ स्कंध) पाठ अनुशंसित।
🙏 वंदना ऐप का चातुर्मास 2026 ट्रैकर पूरे 4-माह कैलेंडर के साथ दैनिक मंत्र, व्रत व प्रत्येक दिन क्या टालें दिखाता है।
देवशयनी एकादशी 2026 - तिथि, मुहूर्त व पारण समय
📅 व्रत तिथि: गुरुवार, 16 जुलाई 2026 🕒 एकादशी तिथि प्रारंभ: 15 जुलाई 2026, सायं 9:14 🕒 एकादशी तिथि समाप्त: 16 जुलाई 2026, सायं 7:42
संकल्प समय (प्रातः): 16 जुलाई, सुबह 5:33 – 7:00 श्रेष्ठ पूजा मुहूर्त: 16 जुलाई, सुबह 7:00 – 11:30 विष्णु शयन मुहूर्त (विशेष - विष्णु लेटने का समय): 16 जुलाई, सायं 6:00 – 7:42 अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 – दोपहर 12:55
🍎 पारण (व्रत खोलना): शुक्रवार 17 जुलाई 2026, सुबह 5:34 – 8:18 द्वादशी तिथि समाप्त: 17 जुलाई, सायं 5:30 (पारण इससे काफी पहले अनिवार्य)
🌟 विशेष 2026 योग - पुष्य नक्षत्र: देवशयनी एकादशी 2026 गुरुवार + प्रातः पुष्य नक्षत्र पर आती है। यह संयोग गुरु-पुष्य योग कहलाता है - अत्यंत दुर्लभ व किसी भी एकादशी के सर्वाधिक शुभ योगों में। आज आरंभ किया कुछ भी (आध्यात्मिक साधना में, भौतिक व्यवसायों में नहीं) 1000 गुना फल देता है।
बचें: गुरुवार राहु काल (दोपहर 1:55 – 3:35) - इसमें कोई नई पूजा न आरंभ करें। सायं 6 बजे का विष्णु शयन अनुष्ठान सुरक्षित (राहु काल के बाद)।
विष्णु 4 माह क्यों सोते हैं - राजा मांधाता की कथा

भविष्य पुराण से एक सुंदर कथा बताती है कि विष्णु विशेष रूप से इन 4 माह क्यों सोते हैं - और चातुर्मास इतना पवित्र क्यों।
बहुत पहले, अयोध्या राज्य (हाँ, वही अयोध्या) में महान राजा मांधाता का राज्य - भगवान राम के पूर्वज। वे विष्णु भक्त, न्यायी, उदार व शक्तिशाली थे। उनका राज्य इतना समृद्ध कि भूमि बिना बीज फसल देती, नदियों में दूध बहता, कोई भूखा नहीं रहता।
फिर एक आषाढ़ (जून-जुलाई) माह में 3-वर्षीय अकाल पड़ा। आकाश ने वर्षा रोकी। फसल नष्ट। पशु मरे। लोग भूखे मरने लगे।
मांधाता ने सभी विद्वान व ज्योतिषी बुलाए। उन्होंने ग्रह अध्ययन व शास्त्र परामर्श किए। बोले - 'हे राजन्, यह सामान्य अकाल नहीं। आपका राज्य परीक्षा में है। उपचार आपके हाथ में। आपके राज्य में एक ब्राह्मण है जो गलत अनुष्ठान कर रहा है - गलत अग्नि मंत्र, गलत यज्ञ। उसके कारण समस्त ब्रह्मांडीय संतुलन भंग। उसे ढूँढें, सुधारें, वर्षा आएगी।'
मांधाता ने खोजा पर वह एक ब्राह्मण नहीं मिला। अकाल बढ़ा।
अंततः राजा अंगिरस मुनि के पास गए - सात परम मुनियों में से एक - और उनके चरणों में गिरे। 'महर्षि, अपनी प्रजा बचाने हेतु कुछ भी करूँगा। क्या करूँ?'
अंगिरस गहरे विचार में डूबे। फिर बोले - 'राजन्, इसे केवल एक ही ठीक कर सकते हैं - स्वयं भगवान विष्णु। पर वे गलत अनुष्ठानों से परेशान होकर योग निद्रा में चले गए हैं। उन्हें जगाया नहीं जा सकता। एकमात्र मार्ग - आप, आपकी रानी व आपका सम्पूर्ण राज्य व्रत लें - देवशयनी एकादशी पर उपवास, चातुर्मास कठोर नियमों से, 4 माह निरंतर प्रार्थना। जब विष्णु देवुठनी एकादशी पर स्वाभाविक रूप से जागें, आपकी भक्ति देखकर तत्काल सब लौटा देंगे।'
मांधाता अयोध्या लौटे। आषाढ़ शुक्ल एकादशी को घोषणा - 'आज से मेरे राज्य का हर घर देवशयनी एकादशी रखेगा। आज से कोई विवाह, उत्सव, बड़ी घटना नहीं। हम सब 4 माह तपस्या करेंगे। विष्णु को हमारी भक्ति देखने जागना होगा।'
और वही हुआ। अयोध्या का सम्पूर्ण राज्य - राजा से सबसे गरीब किसान तक - किसी भी युग में दर्ज सबसे कठोर 4-माह व्रत किया। केवल दिन में एक भोजन। विष्णु मंत्र जप। जो कुछ था सब दान। उत्सव की अग्नियाँ नहीं जलाईं।
4थे माह में, देवुठनी एकादशी पर, विष्णु ने आँखें खोलीं। अयोध्या को नीचे देखा, अभिभूत हुए। 'किसी युग के किसी राज्य से ऐसी सामूहिक भक्ति नहीं देखी। मांधाता, कोई वरदान माँगो।'
मांधाता ने हाथ जोड़े। 'केवल एक वरदान, प्रभु - वर्षा लौटे।'
विष्णु मुस्कुराए। बादल जुटे। घंटों में अयोध्या ने सबसे प्रबल, सबसे आशीर्वादित वर्षा देखी जो कभी देखी थी। दिनों में खेत हरे। पशु पुनर्जीवित। लोग आनंद से रोए।
और स्वयं विष्णु ने घोषणा की - 'इस दिन से, हर वर्ष, देवशयनी एकादशी से देवुठनी एकादशी तक 4 माह उन लोगों के लिए पवित्र होंगे जो अंतर्मुख होंगे। जो भी सच्चाई से चातुर्मास रखेगा, उसे 1,00,000 ब्राह्मण भोजन का पुण्य मिलेगा। और जिस दिन मैं जागूँगा, मैं हर भक्त को व्यक्तिगत रूप से आशीर्वाद दूँगा।'
यही कारण कि आज भी चातुर्मास हर हिंदू घर में रखा जाता है - विष्णु के 'अनुपस्थित' होने के कारण नहीं, बल्कि उस 4-माह तपस्या का सम्मान करने हेतु जिसने एक बार अयोध्या को बचाया था।
देवशयनी एकादशी व्रत विधि व विष्णु शयन अनुष्ठान

एक दिन पहले (दशमी - 15 जुलाई): सूर्यास्त से पहले एक सात्विक भोजन। पूजा कक्ष स्वच्छ। विष्णु हेतु विशेष छोटी शय्या तैयार - पीले रेशमी वस्त्र से ढकी मुलायम श्वेत गद्दी या रुई पैडिंग वाली छोटी लकड़ी की चौकी। यह 'विष्णु शय्या' आज अनोखी।
चरण 1 - प्रातः स्नान व संकल्प (सुबह 5:30, 16 जुलाई): सूर्योदय से पहले स्नान। स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र। मंदिर के सामने पूर्व मुख बैठें। दाहिने हाथ में जल + अक्षत + तुलसी -
'मैं [नाम], इस देवशयनी एकादशी पर सभी पापों के नाश हेतु यह व्रत धारण करता/करती हूँ, और अगले 4 माह चातुर्मास भगवान विष्णु की अंतर्मुखी भक्ति को समर्पित करता/करती हूँ। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। ॐ हरि शयनं नमाम्यहम्।'
जल फर्श पर अर्पण।
चरण 2 - विष्णु पूजा: विष्णु मूर्ति पंचामृत + गंगाजल अभिषेक। पीला चंदन तिलक। पीले फूल, तुलसी, फल, पंचामृत। पंच-बत्ती घी दीया। विष्णु मूर्ति के पास शेषनाग (या 7-शीर्ष नाग) की छोटी छवि - विष्णु ब्रह्मांडीय शय्या का प्रतीक।
चरण 3 - मांधाता कथा: ऊपर की मांधाता-चातुर्मास कथा पढ़ें या सुनें। परिवार को सुनाएँ। यह अनिवार्य।
चरण 4 - मंत्र जप (प्रातः): तुलसी माला पर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' न्यूनतम 108 जप। आज विशेष - विष्णु शयन मंत्र भी जप - 'ॐ हरि शयनं नमाम्यहम्, सुख सुप्तये तव क्षीर सागरे' (हरि को नमन जो सोते हैं, क्षीर सागर पर उनकी निद्रा सुखद हो)।
चरण 5 - फलाहार/निर्जल (दिन भर): अन्न, नमक (केवल सेंधा), प्याज, लहसुन, मसूर वर्जित। अनुमत - जल, दूध, फल, साबूदाना, मखाना। जागें। वाद-विवाद, झूठ, क्रोध से बचें।
चरण 6 - चातुर्मास संकल्प (दोपहर): यह आज अनोखा। दोपहर (अभिजीत मुहूर्त 11:59 AM – 12:55 PM) में औपचारिक चातुर्मास व्रत संकल्प लें। इनमें से एक चुनें (अधिक भी कर सकें तो) -
- 4 माह विशेष भोजन निषेध (जैसे श्रावण में पत्तेदार सब्जी नहीं, भाद्रपद में दही नहीं, आश्विन में दूध नहीं, कार्तिक में उड़द दाल नहीं - ये 4 पारंपरिक 4-माह भोजन निषेध, चातुर्मासिक व्रत)
- जमीन पर सोएँ (बिस्तर त्यागें) - अंतर्मुखी विनम्रता हेतु
- दिन में एक भोजन (एकभक्त व्रत)
- भागवत पुराण 11वाँ स्कंध 4 माह में पूर्ण पाठ
- दैनिक विष्णु सहस्रनाम पाठ
- 4 माह बाल, दाढ़ी नहीं काटना (अति - गंभीर भक्तों हेतु ही)
- 4 माह नए वस्त्र नहीं (तपस्या)
अपना संकल्प कागज पर लिखें। विष्णु के सामने रखें। ज़ोर से पढ़ें। फिर 4 माह तक स्मरण हेतु पूजा कक्ष में रखें।
चरण 7 - विष्णु शयन अनुष्ठान (सायं 6:00 – 7:42, 16 जुलाई) - आज विशेष:
यह सबसे सुंदर अंश। सूर्यास्त पर -
- तैयार छोटी श्वेत-कपास शय्या (विष्णु शय्या) निकालें।
- छोटी विष्णु मूर्ति को गुलाब जल से स्नान।
- मूर्ति पर हल्का चंदन लेप - शांत मलहम जैसे।
- तुलसी जल अर्पण (आज तुलसी न खाएँ)।
- कोमल विष्णु लोरी गाएँ (विष्णु लोरियाँ वंदना ऐप पर उपलब्ध - पारंपरिक दक्षिण भारतीय रचनाएँ हरि वासुदेव भजन)।
- विष्णु मूर्ति को कोमलता से शय्या पर योग-निद्रा मुद्रा में (दाहिनी करवट) लिटाएँ।
- पतले पीले वस्त्र से ढकें।
- शय्या के पास पंच-बत्ती दीया (यह दीया कल प्रातः तक जलता रहना चाहिए)।
- शय्या के पास न्यूनतम 30 मिनट मौन ध्यान। ब्रह्मांडीय सागर पर शांति से सोते विष्णु की कल्पना। आपकी प्रार्थनाएँ उनकी निद्रा रक्षक।
- धीरे फुसफुसाएँ - 'सोएँ प्रभु। हम 4 माह आपके जागने तक ब्रह्मांड पर पहरा रखेंगे।'
यह अनुष्ठान देवशयनी एकादशी को नाम देता है - देवशयनी का शाब्दिक अर्थ - 'सोने वाले देव'।
चरण 8 - पारण (शुक्रवार प्रातः, 17 जुलाई): सूर्योदय स्नान। विष्णु पूजा (शय्या पर ही - वे सोते रहते हैं)। पहले भोग (पीला चावल + खीर + तुलसी)। खाने से पहले दान। पारण समय - सुबह 5:34 – 8:18।
पूर्ण चातुर्मास नियम - 4 माह क्या करें, क्या टालें (16 जुलाई – 12 नवंबर 2026)
🌙 चातुर्मास 2026 के 4 माह:
- श्रावण (16 जुलाई – 14 अगस्त) - शिव पूजा माह, सोमवार पवित्र
- भाद्रपद (15 अगस्त – 13 सितंबर) - गणेश चतुर्थी, पितृ पक्ष आरंभ
- आश्विन (14 सितंबर – 13 अक्टूबर) - शारद नवरात्रि माह
- कार्तिक (14 अक्टूबर – 12 नवंबर) - करवा चौथ, दिवाली, देवुठनी एकादशी
❌ चातुर्मास (4 माह) में न करें:
विवाह व शुभ कार्य:
- कोई नए विवाह नहीं (मौजूदा विवाह जारी रह सकते हैं)
- कोई सगाई समारोह नहीं
- कोई रिश्ता तय नहीं
- कोई पहली विवाह वर्षगाँठ उत्सव नहीं
- कोई विवाह-पूर्वक अनुष्ठान नहीं
समारोह:
- कोई गृह प्रवेश नहीं
- बच्चों का पहला मुंडन नहीं
- शिशुओं का अन्नप्राशन नहीं
- जनेऊ समारोह नहीं
- सीमंतोनयन (बेबी शॉवर) नहीं
भौतिक अधिग्रहण (बड़े टालें):
- नए वाहन नहीं
- नया घर/संपत्ति नहीं
- बड़ा स्वर्ण या आभूषण नहीं (छोटी खरीद ठीक)
- नए व्यवसाय आरंभ नहीं (चालू व्यवसाय जारी)
- बड़े निवेश या शेयर प्रवेश नहीं
यात्रा व गतिविधियाँ:
- चरम मानसून (श्रावण-भाद्रपद) में लंबी तीर्थयात्रा टालें
- आपातकाल छोड़ बड़ी सर्जरी टालें
- बड़ी राशि उधार लेने/देने से बचें
✅ चातुर्मास (4 माह) में अधिक करें:
आध्यात्मिक साधना:
- दैनिक विष्णु मंत्र जप (न्यूनतम 108)
- प्रति सप्ताह भागवत पुराण का एक स्कंध पाठ
- प्रत्येक एकादशी किसी विष्णु मंदिर दर्शन
- प्रत्येक शुक्रवार (विष्णु दिवस) व प्रत्येक एकादशी दान
भोजन अनुशासन (एक या अधिक चुनें):
- श्रावण में पत्तेदार सब्जी न खाएँ
- भाद्रपद में दही न खाएँ
- आश्विन में दूध न लें
- कार्तिक में उड़द दाल न खाएँ
- या - सम्पूर्ण 4 माह दिन में एक भोजन (एकभक्त)
- या - सम्पूर्ण 4 माह सात्विक भोजन (प्याज/लहसुन नहीं)
व्यवहार व अनुशासन:
- जमीन पर सोना (अधः-शयन व्रत)
- सम्पूर्ण 4 माह बाल नहीं काटना (लोकप्रिय व्रत)
- दैनिक ब्रह्म मुहूर्त जागरण
- न्यूनतम 1 घंटा दैनिक मौन
- साप्ताहिक भोजन/वस्त्र/जल दान
- केवल सत्य बोलना, सभी चुगली से बचना
चातुर्मास में मनाए जाने वाले पर्व:
- सभी पर्व सामान्य रूप से जारी - जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, भैया दूज, गोवर्धन पूजा
- ये 'शुभ आरंभ' नहीं - स्मरण/भक्ति पर्व - अतः प्रोत्साहित
- चातुर्मास में दिवाली लक्ष्मी पूजा विशेष शक्तिशाली क्योंकि लक्ष्मी पूजा उनके माध्यम से विष्णु तक पहुँचती है
4-माह परिवर्तन: सच्चाई से चातुर्मास रखने वाले भक्त नाटकीय आंतरिक परिवर्तन बताते हैं - पुरानी आदतें स्वाभाविक रूप से छूटती, मन स्पष्ट, संबंध गहरे, आर्थिक अनुशासन सुधार, गहरी नींद, कम चिंता। विष्णु की बाह्य गतिविधि का ब्रह्मांडीय हटाव साधक के आंतरिक परिवर्तन को आमंत्रित करता है।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
यदि चातुर्मास में आपातकालीन विवाह या व्यवसाय आरंभ करना पड़े तो?+
आपातकाल सनातन धर्म में अपवाद हैं। यदि विवाह स्थगित न हो सके (विदेशी वीज़ा समाप्ति, सैन्य तैनाती, परिवार में जानलेवा रोग), घटना से पहले विशेष संकल्प पूजा करें - भगवान विष्णु का आह्वान, 24-घंटे घी दीया, 11 ब्राह्मणों को दान, 11 जरूरतमंदों को भोजन। यह 'विष्णु को संक्षेप में जगाता है' घटना के आशीर्वाद हेतु। व्यवसाय आरंभ हेतु भी - चातुर्मास में आरंभ अनिवार्य हो तो आरंभ से पहले 11-दिवसीय विष्णु सहस्रनाम पाठ। शास्त्र व्यावहारिक हैं - वास्तविक आपातकाल स्वीकार करते हैं, टाली जा सकने वाली सुविधाएँ नहीं।
क्या मैं माँग वाली नौकरी या पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद चातुर्मास रख सकता/सकती हूँ?+
हाँ - और चातुर्मास वास्तव में गृहस्थों हेतु बना है, केवल साधुओं हेतु नहीं। पूर्ण 'जमीन पर सोना + केवल एक भोजन + बाल नहीं काटना' संस्करण भिक्षुओं हेतु। कामकाजी गृहस्थों हेतु शास्त्र मध्यम संस्करण अनुशंसा करते हैं - (1) कोई एक छोटा व्रत (जैसे श्रावण में पत्तेदार सब्जी नहीं), (2) दैनिक 108 विष्णु मंत्र जप (15 मिनट), (3) प्रत्येक शुक्रवार कुछ दान, (4) साप्ताहिक भागवत पुराण का 1 पृष्ठ पाठ। यह 'सूक्ष्म-चातुर्मास' दैनिक 30 मिनट लेता है पर पूर्ण व्रत पुण्य का 70% कमाता है। तीव्रता से निरंतरता बेहतर। ऐसा प्रण न लें जो रख न सकें।
बहुत लोग चातुर्मास हेतु विशेष रूप से 'बाल न काटना' व्रत क्यों लेते हैं?+
यह कई कारणों से सबसे लोकप्रिय चातुर्मास व्रतों में है। पहला, यह निरंतर स्मरण - दर्पण में हर बार देखते समय व्रत याद। दूसरा, आयुर्वेद में बाल जीवनी ऊर्जा से जुड़े - ब्रह्मांडीय 'सुप्त' चरण में संरक्षण आंतरिक शक्ति बनाता है। तीसरा, देवुठनी एकादशी (12 नवंबर) तक रूप में दृश्य परिवर्तन समापन उत्सव - व्रत तोड़ने के अंग रूप में देवुठनी पर बाल कटाना प्रतीकात्मक रूप से पवित्र। चौथा, चातुर्मास में शरीर 'पुनर्स्थापन' मोड में - बाल अधिक स्वस्थ बढ़ते, अधिक चमक। अनेक भक्त इस व्रत के बाद बाल गुणवत्ता में दृश्य सुधार बताते हैं।
क्या यह सच है कि चातुर्मास में कोई महत्वपूर्ण हिंदू पर्व नहीं आता?+
वास्तव में विपरीत सच है - कुछ सबसे बड़े हिंदू पर्व चातुर्मास में आते हैं - गुरु पूर्णिमा (आरंभ), हरियाली तीज, नाग पंचमी, रक्षा बंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, पितृ पक्ष, शारद नवरात्रि, विजयदशमी, करवा चौथ, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, देवुठनी एकादशी (अंत)। अंतर - ये भक्ति/स्मरण पर्व हैं (परंपरा द्वारा स्थापित अनुष्ठान), नए आरंभ नहीं (विवाह, व्यवसाय आरंभ, गृह प्रवेश)। चातुर्मास नए शुभ आरंभ रोकता है, मौजूदा भक्ति कैलेंडर नहीं। वास्तव में, चातुर्मास वर्ष के सबसे पर्व-समृद्ध काल में - बस बाह्य के बजाय अंतर्मुखी दिशा।
विष्णु अंततः कब जागते हैं और वह दिन कैसे मनाया जाता है?+
भगवान विष्णु देवुठनी एकादशी पर जागते हैं, जिसे प्रबोधिनी एकादशी - 'जागृत करने वाली एकादशी' भी कहते हैं। 2026 में यह मंगलवार, 12 नवंबर 2026 (कार्तिक शुक्ल एकादशी) को है। दिन बड़े आनंद से मनाया जाता है - विष्णु को घंटियों, मंत्रों, व 'उठो देवो हरि, जागिए गोविंदा' गायन से कोमलता से जगाया जाता है। तुलसी-विवाह समारोह (तुलसी पौधे का शालिग्राम-विष्णु से प्रतीकात्मक विवाह) इसी या अगले दिन - चातुर्मास के आधिकारिक समापन का चिह्न। इस दिन से सभी शुभ गतिविधियाँ पुनः आरंभ - विवाह ऋतु खुलती है, व्यवसाय आरंभ, गृह प्रवेश। 4-माह विराम सबसे ऊँचे संभव आध्यात्मिक उत्सव से समाप्त।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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