← सभी ब्लॉगRead in English10 मिनट पढ़ें
गृह प्रवेश पूजा - विधि, मुहूर्त और नियम
Daily Rituals

गृह प्रवेश पूजा - विधि, मुहूर्त और नियम

10 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
SI

By Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

Reviewed by Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

गृह प्रवेश क्या है

गृह प्रवेश (गृह अर्थात् घर और प्रवेश अर्थात् प्रवेश) वह पवित्र गृहारंभ समारोह है जो किसी परिवार के पहली बार नए घर में रहने हेतु प्रवेश पर किया जाता है। बसने से पहले घर को शुद्ध किया जाता और भगवान गणेश, देवी लक्ष्मी तथा वास्तु पुरुष (निवास के देवता) का आशीर्वाद माँगा जाता है। यह घर को सकारात्मक ऊर्जा से भरने और वहाँ रहने वालों हेतु शांति, स्वास्थ्य व समृद्धि सुनिश्चित करने वाला माना जाता है।

गृह प्रवेश के प्रकार

परंपरा तीन प्रकार बताती है: 1. अपूर्व - नवनिर्मित घर में पहली बार प्रवेश, नई अधिगृहीत भूमि पर। 2. सपूर्व - यात्रा या लंबे समय दूर रहने के बाद घर में पुनः प्रवेश। 3. द्वंद्वः (या द्वंद्व) - क्षति के बाद मरम्मत, पुनर्निर्माण या जीर्णोद्धार किए घर में पुनः प्रवेश। वास्तु शांति सहित पूर्ण पूजा अपूर्व (बिल्कुल नए घर) हेतु सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, जबकि अन्य में संक्षिप्त शुद्धिकरण किया जा सकता है।

मुहूर्त चुनना

गृह प्रवेश हेतु शुभ मुहूर्त आवश्यक माना जाता है। मुहूर्त पंचांग अनुसार चुना जाता है, तिथि, नक्षत्र, दिन, लग्न व मास देखकर, और कुछ मास, ग्रहण व अशुभ तिथियों जैसे अशुभ कालों से बचते हुए। कुछ मास व नक्षत्र परंपरागत रूप से नए घर में प्रवेश हेतु विशेष शुभ माने जाते हैं। अपने घर हेतु सही तिथि व समय के लिए यादृच्छिक दिन तय करने के बजाय वंदना पंचांग देखें।

तैयार रखने योग्य सामग्री

तैयार रखने योग्य सामग्री

तैयार रखें: जल, आम-पत्र व ऊपर नारियल सहित कलश (ताँबे या पीतल का पात्र), गणेश व लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र, रोली, कुंकुम, हल्दी, चावल (अक्षत), पुष्प, धूप, घी का दीपक, पंचामृत, उबालने हेतु ताज़ा दूध, नवधान्य (नौ अनाज), पान व सुपारी, मिठाई, और हवन होने पर हवन सामग्री। साथ ही नई झाड़ू, और प्रवेशद्वार को शुभ आकृतियों से सजाने हेतु रंगोली के रंग रखें।

चरण-दर-चरण विधि

एक सरल पारंपरिक विधि: 1. घर साफ करें और प्रवेशद्वार को रंगोली, आम-पत्र व गेंदा के तोरण से सजाएँ। 2. दंपति या परिवार का मुखिया कलश लेकर दाहिना पैर पहले रखते हुए प्रवेश करता है, प्रायः घर की स्त्री आगे रहती है। 3. बाधाएँ दूर करने हेतु पहले गणेश पूजा, फिर समृद्धि हेतु लक्ष्मी पूजा करें। 4. घर को शुद्ध करने और वास्तु देवता को प्रसन्न करने हेतु वास्तु शांति पूजा और, जहाँ हो, हवन करें। 5. रसोई में नए पात्र में दूध उबालें जब तक वह उठकर उफन न जाए, जो समृद्धि का संकेत है, फिर एक सरल मीठा व्यंजन बनाएँ। 6. भोग अर्पित करें, आरती करें, और परिवार व अतिथियों के साथ प्रसाद व भोज बाँटें।

कलश, दूध उबालना और उनका अर्थ

जल से भरा, आम-पत्र व नारियल से सज्जित कलश दिव्य, समृद्धि व शुभ आरंभ का प्रतीक है; इसे भीतर ले जाना घर में लक्ष्मी का स्वागत करने का तरीका है। नई रसोई में दूध को उफनने तक उबालना एक अत्यंत प्रिय अनुष्ठान है जो समृद्धि, वृद्धि और ऐसे घर का प्रतीक है जिसमें पोषण की कभी कमी न होगी। पकाया गया पहला भोजन - प्रायः खीर जैसी मिठाई - परिवार के खाने से पहले देवताओं को अर्पित किया जाता है।

नियम और बचने योग्य बातें

नियम और बचने योग्य बातें

करें: गृह प्रवेश पंचांग-चुने मुहूर्त पर करें, दाहिना पैर पहले रखकर प्रवेश करें, ऐसा दीपक जलाएँ जो दिनभर जलता रहे, और घर में जीवन के पहले चिह्न रूप में रसोई व जल का प्रवाह बनाए रखें। न करें: पूजा से पहले घर में न रहने जाएँ, यदि परंपरा प्रतीक्षा की सलाह दे तो गर्भवती स्त्री के निषिद्ध मासों में न करें, पहली रात घर खाली व अंधकारमय न छोड़ें, या बिल्कुल नए घर हेतु वास्तु शांति न छोड़ें। पूजा के बाद कम से कम पहली रात घर में बिताएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गृह प्रवेश क्या है?+

गृह प्रवेश वह हिंदू गृहारंभ समारोह है जो परिवार के नए घर में रहने से पहले किया जाता है। यह घर को शुद्ध करता और शांति व समृद्धि हेतु गणेश, लक्ष्मी और वास्तु देवताओं का आशीर्वाद आमंत्रित करता है।

गृह प्रवेश के तीन प्रकार कौन से हैं?+

तीन प्रकार हैं अपूर्व (नवनिर्मित घर में पहली बार प्रवेश), सपूर्व (लंबे समय बाद पुनः प्रवेश) और द्वंद्वः (क्षति के बाद मरम्मत या पुनर्निर्मित घर में पुनः प्रवेश)।

गृह प्रवेश में दूध क्यों उबाला जाता है?+

नई रसोई में दूध को उफनने तक उबालना समृद्धि, वृद्धि और ऐसे घर का प्रतीक है जिसमें पोषण की कभी कमी न होगी। पकाया गया पहला व्यंजन, प्रायः खीर, पहले देवताओं को अर्पित किया जाता है।

गृह प्रवेश का मुहूर्त कैसे तय होता है?+

मुहूर्त पंचांग अनुसार चुना जाता है, तिथि, नक्षत्र, दिन, लग्न व मास देखकर, और अशुभ कालों से बचते हुए। सही तिथि व समय हेतु यादृच्छिक दिन तय करने के बजाय वंदना पंचांग देखें।

गृह प्रवेश में वास्तु शांति क्या है?+

वास्तु शांति एक पूजा है, प्रायः हवन सहित, जो नए घर को शुद्ध करती और निवास के देवता वास्तु पुरुष को प्रसन्न करती है। यह सामंजस्य व रक्षा हेतु बिल्कुल नए (अपूर्व) घर के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

क्या नए घर में पहली रात बितानी चाहिए?+

हाँ। पूजा के बाद परिवार को कम से कम पहली रात घर में बितानी चाहिए और इसे खाली व अंधकारमय छोड़ने से बचना चाहिए। दीपक जलता रखा जाता और रसोई व जल जीवन के पहले चिह्न रूप में सक्रिय रखे जाते हैं।

SI

About the author

Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

Dr. Suresh has practiced traditional Vastu and basic Vedic Jyotish for over 18 years across South India. He contributes the Vastu, direction, and home-puja layout guides on Vandnaa.

Meet the Vandnaa editorial team →

Listen all aartis, mantras & bhajans in one place.

Download Vandnaa App.

Download Now

Explore on Vandnaa

संबंधित लेख