नामकरण संस्कार क्या है
नामकरण (नाम अर्थात् नाम और करण अर्थात् बनाना से) नवजात शिशु का हिंदू नामकरण समारोह है। यह सोलह संस्कारों (षोडश संस्कार) में से एक है - वे पवित्र संस्कार जो गर्भाधान से मृत्यु तक जीवन के पड़ावों को अंकित करते हैं। नामकरण के माध्यम से शिशु को औपचारिक रूप से नाम दिया जाता, बड़ों व देवताओं द्वारा आशीर्वाद मिलता, और उसे परिवार व व्यापक समाज के सदस्य रूप में स्वीकारा जाता है।
नामकरण समारोह का महत्व
नाम व्यक्ति की पहचान को आकार देता और यहाँ तक कि उसके स्वभाव व भाग्य को सूक्ष्म रूप से प्रभावित करता माना जाता है, इसलिए इसे बड़ी सावधानी से चुना जाता है। यह समारोह शिशु की दीर्घायु, स्वास्थ्य व सद्चरित्र हेतु देवताओं व पूर्वजों का आशीर्वाद आमंत्रित करता है। यह परिवार के बंधन को भी सुदृढ़ करता है, क्योंकि स्वजन नवजात को आशीर्वाद देने एकत्र होते हैं। सार में, नामकरण शिशु को पहचान और स्नेह व रक्षा का एक वलय दोनों देता है।
नामकरण कब होता है और मुहूर्त
परंपरागत रूप से नामकरण जन्म के ग्यारहवें या बारहवें दिन किया जाता है, जब सूतक (प्रसव के बाद का अशुद्धि-काल) समाप्त होता है। कुछ परिवार इसे दसवें दिन, सौवें दिन या पहले जन्मदिन पर करते हैं, प्रथा व सुविधा अनुसार। सटीक मुहूर्त पंचांग अनुसार चुना जाता है - तिथि, नक्षत्र, दिन व लग्न - अशुभ कालों से बचते हुए। अपने परिवार हेतु सही तिथि व समय के लिए, यादृच्छिक रूप से दिन तय करने के बजाय वंदना पंचांग देखें।
नक्षत्र से नाम चुनना

हिंदू नामकरण की एक विशेषता नक्षत्र-आधारित अक्षर है। 27 नक्षत्रों में से प्रत्येक चार पादों (चरणों) में बँटा है, और प्रत्येक पाद एक विशिष्ट अक्षर (अक्षर) से जुड़ा है। जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति के आधार पर, परिवार के पुरोहित नाम अक्षर देते हैं - वह पहली ध्वनि जिससे नाम आरंभ होना चाहिए। अनेक परिवार यह नक्षत्र नाम और एक अलग व्यवहारिक नाम चुनते हैं। यह शिशु के नाम को उनके जन्म नक्षत्र से जोड़कर सामंजस्य व सौभाग्य लाता माना जाता है।
चरण-दर-चरण विधि
एक सरल पारंपरिक विधि: 1. घर स्वच्छ करें और माता व शिशु को स्नान कराएँ; शिशु को नए वस्त्र पहनाएँ। 2. गणेश पूजा और कलश स्थापना करें, फिर कुलदेवता व पूर्वजों का आह्वान करें। 3. पुरोहित शिशु के कल्याण हेतु छोटा हवन कर वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हैं। 4. पिता (या चुना गया बुजुर्ग) चुना नाम शिशु के दाहिने कान में फुसफुसाते हैं, प्रायः चार बार। 5. नाम एकत्र परिवार के समक्ष ऊँचे स्वर में घोषित किया जाता है। 6. बड़े सिर पर चावल, कुंकुम या कोमल स्पर्श रखकर शिशु को आशीर्वाद देते हैं, फिर मिठाई व भोज होता है।
सामग्री और एक आशीर्वाद मंत्र
सामान्य सामग्री में कलश, आम-पत्र, नारियल, रोली, चावल (अक्षत), पुष्प, शिशु के नए वस्त्र, मिठाई, घी और हवन होने पर हवन सामग्री शामिल हैं। एक व्यापक रूप से प्रिय आशीर्वाद गायत्री मंत्र है, जो शिशु की बुद्धि व रक्षा हेतु जपा जाता है:
ॐ भूर्भुवः स्वः, तत्सवितुर्वरेण्यं, भर्गो देवस्य धीमहि, धियो यो नः प्रचोदयात्।
समारोह को स्नेहपूर्ण व शांत रखें, क्योंकि शिशु का पहला संस्कार शांति से भरा होना चाहिए।
करें और न करें

करें: सूतक काल समाप्त होने तक प्रतीक्षा करें, नाम व मुहूर्त पंचांग अनुसार चुनें, शिशु को सहज रखें, और आशीर्वाद हेतु बड़ों को सम्मिलित करें। न करें: अशुभ दिन पर समारोह में जल्दबाज़ी न करें, नवजात को भीड़ या तेज़ शोर में न रखें, या केवल फैशन हेतु अर्थ की उपेक्षा करते हुए नाम न चुनें। भव्यता से अधिक कोमल, भक्तिमय वातावरण मायने रखता है।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
नामकरण संस्कार क्या है?+
नामकरण हिंदू नामकरण समारोह है, सोलह संस्कारों में से एक। नवजात को औपचारिक रूप से नाम दिया जाता, बड़ों व देवताओं द्वारा आशीर्वाद मिलता, और परिवार व समाज में स्वागत होता है।
नामकरण आमतौर पर किस दिन होता है?+
यह परंपरागत रूप से जन्म के ग्यारहवें या बारहवें दिन होता है, जब सूतक काल समाप्त होता है। कुछ परिवार दसवाँ दिन, सौवाँ दिन या पहला जन्मदिन चुनते हैं, मुहूर्त पंचांग से तय होता है।
नाम का पहला अक्षर कैसे चुना जाता है?+
पहला अक्षर प्रायः शिशु के जन्म नक्षत्र पर आधारित होता है। प्रत्येक नक्षत्र के चार पाद हैं, प्रत्येक एक अक्षर से जुड़ा, और पुरोहित जन्म के समय चंद्र स्थिति से नाम अक्षर देते हैं।
नामकरण का मुहूर्त कैसे तय होता है?+
मुहूर्त पंचांग अनुसार चुना जाता है - तिथि, नक्षत्र, दिन व लग्न - अशुभ कालों से बचते हुए। सही तिथि व समय हेतु यादृच्छिक दिन तय करने के बजाय वंदना पंचांग देखें।
नामकरण के लिए कौन सी सामग्री चाहिए?+
सामान्य सामग्री में कलश, आम-पत्र, नारियल, रोली, चावल, पुष्प, शिशु के नए वस्त्र, मिठाई, घी और पुरोहित द्वारा हवन किए जाने पर हवन सामग्री शामिल हैं।
क्या नक्षत्र नाम और सामान्य नाम दोनों रखे जा सकते हैं?+
हाँ। अनेक परिवार अनुष्ठानों हेतु जन्म नक्षत्र से जुड़ा नक्षत्र नाम रखते हैं, साथ ही दैनिक जीवन में प्रयुक्त एक अलग व्यवहारिक नाम। दोनों सामान्य व स्वीकृत हैं।
About the author
Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies
Anjali is the managing editor for Vandnaa and oversees the festival and vrat coverage. She holds an M.A. in Religious Studies and reviews every published article for accuracy, accessibility, and tradition-fidelity.
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