हल षष्ठी क्या है और बलराम कौन हैं
हल षष्ठी भगवान बलराम के जन्मोत्सव का पर्व है - श्रीकृष्ण के बड़े भाई और शेषनाग के अवतार। बलराम का शस्त्र और प्रतीक हल है, जिससे इस पर्व का नाम पड़ा और जो उन्हें सदा के लिए किसानों, खेतों और धरती की शक्ति से जोड़ता है। उत्तर प्रदेश में ललही छठ, अनेक क्षेत्रों में हल छठ और गुजरात में रांधण छठ कहलाने वाला यह दिन महाबली बलराम और उनकी जोती धरती दोनों का सम्मान करता है।
तिथि और 2026 में यह कब है
हल षष्ठी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी को मनाई जाती है - कृष्ण जन्माष्टमी से ठीक दो दिन पहले, जो उचित ही है, क्योंकि बड़े भाई का जन्मोत्सव पहले मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर पर यह सामान्यतः अगस्त में आती है। व्रत रखने से पहले अपने शहर की सही तिथि और पूजा मुहूर्त वंदना पंचांग पर अवश्य देखें।
महत्व और कथा
बलराम शक्ति, सरलता और कृषि की गरिमा के प्रतीक हैं। माताएँ यह व्रत रखकर प्रार्थना करती हैं कि उनके पुत्रों को बलराम का दीर्घायु, स्वास्थ्य और रक्षा का आशीर्वाद मिले। एक लोककथा इसके अनुशासन की चेतावनी देती है: एक ग्वालिन ने हल षष्ठी के दिन गाय और भैंस का मिला दूध बेचकर नियम तोड़ा, और उसकी संतान कष्ट में पड़ी, जब तक उसने सच स्वीकार कर सच्चे मन से व्रत न किया; तब इस दिन की देवी ने उसकी संतान को स्वस्थ किया। कथा सिखाती है कि व्रत के सरल, कठोर नियम ईमानदारी से निभाने चाहिए।
कौन और क्यों रखता है यह व्रत

यह व्रत मुख्यतः पुत्रवती माताएँ रखती हैं, अपनी संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करते हुए, जैसे वर्ष में आगे अहोई अष्टमी रखी जाती है। अनेक स्त्रियाँ इसे अपनी सभी संतानों के कल्याण के लिए भी रखती हैं। किसान इस दिन अपने हल, बैलों और खेतों का सम्मान करते हैं - औज़ारों को विश्राम और पूजा देते हुए। निःसंतान दंपति बलराम से बलवान, स्वस्थ संतान का आशीर्वाद माँगते हुए यह व्रत रखते हैं।
व्रत नियम - हल से उपजा अन्न वर्जित
हल षष्ठी का मुख्य नियम है कि बलराम के हल के सम्मान में धरती जोतकर उपजाई कोई वस्तु नहीं खाई जाती। अनुमत आहार हैं: 1. तिन्नी या पसई चावल - बिना जुताई स्वयं उगने वाला जंगली चावल। 2. भैंस का दूध, दही और घी - इस दिन गाय का दूध परंपरा से वर्जित है। 3. बिना जुताई उगने वाले फल-सब्जियाँ, जैसे अनजुती भूमि या तालाबों की उपज। अनाज, गेहूँ, सामान्य चावल, दालें और जुताई से उगी सब्जियाँ सभी वर्जित हैं, और अनेक स्त्रियाँ संध्या पूजा तक उपवास रखती हैं।
चरण-दर-चरण व्रत और पूजा विधि
यह पारंपरिक विधि अपनाएँ: 1. प्रातः स्नान कर संतान की दीर्घायु के लिए व्रत का संकल्प लें। 2. आँगन या पूजा स्थल पर गोबर से लिपा छोटा चौक बनाएँ; उसमें पवित्र वन के प्रतीक रूप में झरबेरी, पलाश और गूलर की डालियाँ रोपें, और हल का चित्र बनाएँ या रखें। 3. पास में छोटा प्रतीकात्मक तालाब बनाकर स्वच्छ जल भरें। 4. बलराम और हल षष्ठी देवी की रोली, अक्षत, मेहंदी, चूड़ियों और पुष्पों से पूजा करें। 5. तिन्नी चावल, भैंस का दही और भुना चना मौसमी फलों सहित अर्पित करें। 6. हल षष्ठी कथा सुनें या पढ़ें, फिर आरती करें। 7. संध्या को केवल अनुमत आहार से व्रत खोलें - भैंस के दूध में पका तिन्नी चावल पारंपरिक भोजन है।
मंत्र और लाभ

पूजा के समय इन मंत्रों का जप करें:
ॐ बलभद्राय नमः - महाबली बलराम को नमन।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय - कृष्ण और बलराम की संयुक्त कृपा के लिए।
ॐ संकर्षणाय नमः - लोकों के आधार संकर्षण रूप में बलराम का आह्वान।
लाभ: यह व्रत संतान को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और संकटों से रक्षा देता, निःसंतान दंपतियों को संतान का आशीर्वाद देता, धरती व कृषि का सम्मान करता, और पूरे परिवार को बलराम की शक्ति व धैर्य का वरदान देता माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हल षष्ठी कब मनाई जाती है?+
हल षष्ठी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी को, जन्माष्टमी से दो दिन पहले, सामान्यतः अगस्त में आती है। सही तिथि और मुहूर्त वंदना पंचांग पर देखें।
भगवान बलराम कौन हैं?+
बलराम श्रीकृष्ण के बड़े भाई और शेषनाग के अवतार हैं। उनका शस्त्र हल है, जो उन्हें किसानों का संरक्षक और शक्ति, सरलता व श्रम की गरिमा का प्रतीक बनाता है।
हल षष्ठी पर हल से उपजा अन्न क्यों वर्जित है?+
बलराम के हल के सम्मान में धरती जोतकर उपजाई कोई वस्तु नहीं खाई जाती। केवल तिन्नी (जंगली) चावल और बिना जुताई की उपज जैसे प्राकृतिक आहार लिए जाते हैं, जिससे धरती और हल को एक दिन का विश्राम मिलता है।
गाय के बजाय भैंस का दूध क्यों प्रयोग होता है?+
परंपरा है कि हल षष्ठी पर गाय का दूध-दही वर्जित रहता है और केवल भैंस के दूध से बनी वस्तुएँ प्रयोग होती हैं। यही नियम उस ग्वालिन की व्रत कथा में है जिसने दोनों मिलाए और सच्चे मन से नियम निभाने तक कष्ट पाया।
हल षष्ठी का व्रत कौन रखता है?+
माताएँ अपने पुत्रों व संतानों की दीर्घायु और स्वास्थ्य के लिए, निःसंतान दंपति संतान-प्राप्ति के लिए यह व्रत रखते हैं, और किसान इस दिन अपने हल, बैलों और खेतों की पूजा करते हैं।
हल षष्ठी का व्रत किस आहार से खोला जाता है?+
व्रत संध्या पूजा के बाद भैंस के दूध में पके तिन्नी या पसई चावल, भैंस के दही और बिना जुताई उगे फलों से खोला जाता है। सामान्य अनाज और जुताई की उपज पूरे दिन वर्जित रहती है।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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