नरक चतुर्दशी क्या है
नरक चतुर्दशी, जिसे आमतौर पर छोटी दिवाली और कुछ क्षेत्रों में रूप चौदस या काली चौदस कहा जाता है, पाँच दिवसीय दिवाली पर्व का दूसरा दिन है। यह भगवान कृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर के वध और सोलह हज़ार बंदियों की मुक्ति का उत्सव है। यह दिन अशुद्धि, भय और नकारात्मकता धोने को समर्पित है, जो अगली संध्या की मुख्य लक्ष्मी पूजा हेतु शरीर व घर को तैयार करता है।
तिथि और 2026 में यह कब है
नरक चतुर्दशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (चौदहवीं तिथि) को आती है, दिवाली अमावस्या से एक दिन पूर्व। ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह सामान्यतः अक्टूबर या नवंबर में पड़ती है। अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पूर्व विशिष्ट मुहूर्त में किया जाता है, और संध्या को यम दीपक जलाया जाता है। अपने शहर के लिए सटीक तिथि और अभ्यंग स्नान मुहूर्त वंदना पंचांग पर देखें।
नरकासुर की कथा
पृथ्वी का पुत्र राक्षस नरकासुर इतना शक्तिशाली हो गया कि उसने देवताओं को पीड़ित किया और सोलह हज़ार स्त्रियों को बंदी बनाया। यह वरदान पाकर कि उसका वध केवल उसकी अपनी माता द्वारा हो सकता है, वह इसी चतुर्दशी को भगवान कृष्ण और उनकी पत्नी सत्यभामा (पृथ्वी देवी का अवतार) द्वारा मारा गया। मृत्यु से पूर्व नरकासुर ने पश्चाताप कर माँगा कि उसकी मृत्यु प्रकाश व आनंद से स्मरण की जाए - इसीलिए लोग इस दिन दीप जलाकर उत्सव मनाते हैं।
अभ्यंग स्नान विधि

अभ्यंग स्नान (तेल स्नान) इस दिन का केंद्रीय अनुष्ठान है, जो पापों को धोने और 'रूप चौदस' से प्रतीकित सौंदर्य व कांति प्रदान करने वाला माना जाता है। 1. शुभ मुहूर्त में सूर्योदय से पूर्व उठें। 2. शरीर पर गर्म तिल या सरसों का तेल और उबटन (बेसन, हल्दी व जड़ी-बूटी) का लेप लगाएँ। 3. परंपरा अनुसार सिर पर कुछ अपामार्ग (चिरचिटा) पत्ते रखें। 4. स्वच्छ जल से भली-भाँति स्नान करें, मन से अशुद्धि व नकारात्मकता त्यागते हुए। 5. ताज़े, स्वच्छ वस्त्र पहनें और शांत, नवीन मन से दिन की उपासना आरंभ करें।
यम दीपदान और संध्या विधि
संध्या को भक्त अकाल मृत्यु से रक्षा और धर्म के स्वामी यम के सम्मान हेतु यम दीपदान करते हैं। 1. चार मुख वाला या एकमुखी घी/तेल का दीपक लें। 2. सूर्यास्त के बाद उसे जलाकर मुख्य द्वार या घर के जल-निकास के पास, दक्षिण (यम की दिशा) की ओर रखें। 3. सभी परिवारजनों की दीर्घायु व रक्षा हेतु यम से संक्षिप्त प्रार्थना करें। 4. दिवाली की प्रस्तावना रूप में घर के चारों ओर अतिरिक्त दीप जलाएँ। कुछ परिवार इस रात्रि माँ काली की भी पूजा करते हैं (काली चौदस)।
नरक चतुर्दशी के मंत्र
यम दीपक जलाते समय रक्षा हेतु यह प्रार्थना जपें:
ॐ यमाय नमः
मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह, त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम।
कृष्ण की कृपा व भीतरी शुद्धि हेतु ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जपें। कृष्ण आरती का पाठ दिन की उपासना को सुंदर रूप से पूर्ण करता है।
महत्व और लाभ

नरक चतुर्दशी शरीर, मन व घर को संचित नकारात्मकता से शुद्ध करती, अभ्यंग स्नान से सौंदर्य, स्वास्थ्य व कांति प्रदान करती, और यम दीपदान से परिवार को अकाल मृत्यु व भय से रक्षा करती मानी जाती है। सबसे बढ़कर, यह भक्तों को स्मरण कराती है कि कृष्ण की नरकासुर पर विजय की भाँति, भीतर का गहनतम अंधकार भी प्रकाश, अनुशासन व भक्ति से जीता जा सकता है।
त्वरित उत्तर
नरक चतुर्दशी को और किन नामों से जाना जाता है?+
इसे आमतौर पर छोटी दिवाली, और कुछ क्षेत्रों में रूप चौदस या काली चौदस कहा जाता है। यह दिवाली के पाँच दिनों में दूसरा है, जो मुख्य लक्ष्मी पूजा से एक दिन पूर्व आता है।
अभ्यंग स्नान क्या है?+
अभ्यंग स्नान नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पूर्व किया जाने वाला अनुष्ठानिक तेल स्नान है। स्नान से पूर्व गर्म तेल व उबटन लगाया जाता है, जो अशुद्धि धोकर सौंदर्य, स्वास्थ्य व कांति देने वाला माना जाता है।
इस दिन यम दीपक क्यों जलाया जाता है?+
यम दीपक सूर्यास्त के बाद दक्षिण की ओर मुख कर धर्म के स्वामी यम के सम्मान और घर के सभी सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा हेतु जलाया जाता है।
नरक चतुर्दशी के पीछे कौन सी कथा है?+
यह भगवान कृष्ण द्वारा सत्यभामा सहित राक्षस नरकासुर के वध और सोलह हज़ार बंदियों की मुक्ति का प्रतीक है। नरकासुर ने माँगा कि उसकी मृत्यु प्रकाश से स्मरण हो, इसलिए लोग इस दिन दीप जलाते हैं।
क्या नरक चतुर्दशी मुख्य दिवाली के समान है?+
नहीं। नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) कार्तिक चतुर्दशी को आती है, कार्तिक अमावस्या की मुख्य दिवाली लक्ष्मी पूजा से एक दिन पूर्व। यह एक तैयारी का, शुद्धिकारी दिवस है।
छोटी दिवाली पर क्या करना चाहिए?+
सूर्योदय से पूर्व अभ्यंग स्नान करें, घर स्वच्छ कर सजाएँ, संध्या को यम दीपक जलाएँ, कृष्ण व यम मंत्र जपें, और मुख्य दिवाली रात्रि की प्रस्तावना रूप में दीप जलाएँ।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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