दिवाली - प्रकाश का पाँच दिवसीय पर्व
दिवाली या दीपावली प्रकाश का पर्व है जो अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का उत्सव है। यह केवल एक रात्रि नहीं बल्कि पाँच दिवसीय उत्सव है जो धनतेरस से आरंभ होकर भाई दूज पर समाप्त होता है। हर दिन एक भिन्न देव व परंपरा का सम्मान करता है - धन, शुद्धि, महान लक्ष्मी पूजा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और भाई-बहन का बंधन। मिलकर ये समृद्धि, पवित्रता और पारिवारिक प्रेम की पूर्ण यात्रा बनाते हैं।
पाँच दिन कब आते हैं
पाँच दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तक फैले हैं, जिसमें लक्ष्मी पूजा अमावस्या (नई चंद्र) को होती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह सामान्यतः अक्टूबर या नवंबर में पड़ती है। मुख्य लक्ष्मी पूजा संध्या को विशिष्ट प्रदोष व स्थिर लग्न मुहूर्त में की जाती है। अपने शहर के लिए सटीक तिथियाँ और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त वंदना पंचांग पर अवश्य देखें।
दिन 1 - धनतेरस (धनत्रयोदशी)
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को आने वाला धनतेरस भगवान धन्वंतरि - अमृत के साथ प्रकट हुए दिव्य वैद्य - और माँ लक्ष्मी का सम्मान करता है। 1. घर व प्रवेशद्वार स्वच्छ करें और रंगोली बनाएँ। 2. सोना, चाँदी, बर्तन या नई वस्तुएँ खरीदें, जो इस दिन शुभ मानी जाती हैं। 3. संध्या को दीप जलाकर लक्ष्मी, कुबेर व धन्वंतरि की पूजा करें। 4. घर की रक्षा हेतु देहली पर यम दीपक जलाएँ।
दिन 2 - नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को, जिसे छोटी दिवाली भी कहते हैं, भक्त भगवान कृष्ण की राक्षस नरकासुर पर विजय का स्मरण करते हैं, जिसमें सोलह हज़ार बंदियों को मुक्त किया गया। 1. सूर्योदय से पूर्व उठकर अभ्यंग स्नान करें - तेल व उबटन से किया जाने वाला अनुष्ठान स्नान जो अशुद्धि धो देता है। 2. अकाल मृत्यु से रक्षा हेतु संध्या को यम दीपक जलाएँ। 3. मुख्य दिवाली रात्रि की प्रस्तावना के रूप में कुछ दीप जलाएँ और घर सजाएँ।
दिन 3 - लक्ष्मी पूजा (दिवाली, अमावस्या)
मुख्य दिवाली रात्रि कार्तिक अमावस्या को आती है, जब माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की धन, बुद्धि व कल्याण हेतु पूजा होती है। यह रावण को पराजित कर भगवान राम के अयोध्या लौटने का भी उत्सव है। 1. घर भली-भाँति स्वच्छ करें और रंगोली बनाएँ; दीपों की पंक्तियाँ जलाएँ। 2. लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियों, कलश, सिक्कों व बही-खातों के साथ पूजा सजाएँ। 3. संध्या मुहूर्त में कमल, खील-बताशे, मिठाई और घी का दीपक अर्पित करें। 4. लक्ष्मी आरती और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें, फिर देवी का उज्ज्वल, खुले घर में स्वागत करें।
दिन 4 - गोवर्धन पूजा और दिन 5 - भाई दूज
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) स्मरण कराती है कि कैसे भगवान कृष्ण ने वृंदावनवासियों की रक्षा हेतु गोवर्धन पर्वत उठाया, जो प्रकृति के प्रति कृतज्ञता सिखाता है। भक्त गोबर या भोजन का छोटा पर्वत बनाकर कृष्ण को अन्नकूट - विविध व्यंजनों का पर्वत - अर्पित करते हैं। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज भाई-बहन के बंधन का उत्सव है। बहनें तिलक कर अपने भाइयों की दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं, और भाई उपहार व रक्षा का वचन देते हैं।
महत्व और लाभ

दिवाली के पाँच दिन मिलकर घर व हृदय को शुद्ध करते हैं, लक्ष्मी के माध्यम से समृद्धि आमंत्रित करते हैं, यम दीपक से घर की रक्षा करते हैं, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, और पारिवारिक बंधनों को सुदृढ़ करते हैं। दीप जलाना भीतरी व बाहरी अंधकार को दूर करता है, जबकि गणेश सहित लक्ष्मी की सच्ची उपासना ऐसा धन लाती मानी जाती है जो भरपूर भी हो और सही उपयोग वाला भी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिवाली पाँच दिन क्यों मनाई जाती है?+
पाँच में से हर दिन एक भिन्न देव व परंपरा का सम्मान करता है - धनतेरस, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा और भाई दूज - मिलकर ये समृद्धि, पवित्रता और पारिवारिक प्रेम का पूर्ण उत्सव बनाते हैं।
मुख्य लक्ष्मी पूजा किस दिन होती है?+
मुख्य लक्ष्मी पूजा कार्तिक अमावस्या को होती है, जो दिवाली का तीसरा व केंद्रीय दिन है। यह संध्या को विशिष्ट मुहूर्त में की जाती है। समय वंदना पंचांग पर देखें।
धनतेरस पर क्या खरीदा जाता है?+
धनतेरस पर सोना, चाँदी, नए बर्तन या अन्य मूल्यवान वस्तुएँ खरीदना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह लक्ष्मी व धन्वंतरि का सम्मान करता और वर्षभर समृद्धि आमंत्रित करता माना जाता है।
गोवर्धन पूजा या अन्नकूट क्या है?+
गोवर्धन पूजा कृष्ण द्वारा वृंदावन की रक्षा हेतु गोवर्धन पर्वत उठाने का स्मरण कराती है। भक्त प्रकृति के प्रति कृतज्ञता रूप में कृष्ण को अन्नकूट, विविध व्यंजनों का पर्वत, अर्पित करते हैं।
भाई दूज का क्या महत्व है?+
भाई दूज भाई-बहन के बंधन का उत्सव है। बहनें तिलक कर अपने भाइयों की दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं, जबकि भाई उपहार व आजीवन रक्षा का वचन देते हैं।
दिवाली पर दीप क्यों जलाए जाते हैं?+
दीप प्रकाश की अंधकार पर और ज्ञान की अज्ञान पर विजय के प्रतीक हैं। वे माँ लक्ष्मी का उज्ज्वल घर में स्वागत करते और दीपों की पंक्तियों से प्रकाशित भगवान राम के अयोध्या लौटने का स्मरण कराते हैं।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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