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सकट चौथ (तिल कुटा चौथ) - व्रत कथा और पूजा विधि
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सकट चौथ (तिल कुटा चौथ) - व्रत कथा और पूजा विधि

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

सकट चौथ क्या है

सकट चौथ, जिसे तिल कुटा चौथ, संकष्टी चतुर्थी और माघी चौथ भी कहते हैं, विघ्नहर्ता (संकट हरने वाले) भगवान गणेश को समर्पित व्रत है। माताएँ यह व्रत अपनी संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य व सफलता हेतु रखती हैं। इस दिन के अर्पण का केंद्र तिल और गुड़ हैं, जिनसे मिठाई और विशेष भोग बनता है। व्रत रात्रि को चंद्रमा की उपासना के बाद खोला जाता है।

तिथि, समय और मास

सकट चौथ माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है, सामान्यतः जनवरी या फरवरी में। यह गणेश भक्तों हेतु वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण संकष्टी चतुर्थी है। व्रत दिनभर रखा जाता और रात्रि को चंद्रमा के दर्शन व अर्घ्य के बाद ही खोला जाता है। इस दिन चंद्रोदय प्रायः देर से होता है, अतः भक्त धैर्य से प्रतीक्षा करते हैं। सही तिथि और चंद्रोदय समय अपने स्थानीय पंचांग से उस वर्ष हेतु अवश्य पुष्टि करें।

सकट चौथ व्रत कथा

एक प्रसिद्ध कथा एक निर्धन वृद्ध कुम्हारिन की है जिसके बर्तन भट्ठी में ठीक से नहीं पकते थे; वे टूटते रहते थे। किसी ने सलाह दी कि यदि वह किसी बालक की बलि दे तो बर्तन पक जाएँगे, और हताशा में उसने मन ही मन ऐसा चाह लिया। जब राजा के बर्तन पके, तो उनमें एक बालक जीवित मिला, जिसे उसकी माँ के सकट माता और भगवान गणेश की उपासना के व्रत ने सुरक्षित रखा था। कृतज्ञ माँ ने पूर्ण भक्ति से सकट चौथ व्रत रखा था, और गणेश ने उसके बालक को संकट से बचाया। यह कथा फैली, और स्त्रियाँ प्रतिवर्ष सकट चौथ व्रत रखने लगीं, विघ्नहर्ता गणेश से अपनी संतान के जीवन से सभी संकट दूर करने की प्रार्थना करते हुए। कथा पुष्टि करती है कि गणेश की सच्ची भक्ति संतान को हर संकट से बचाती है।

सकट चौथ पूजा विधि

सकट चौथ पूजा विधि

1. सूर्योदय से पूर्व उठें, स्नान करें और अपनी संतान हेतु व्रत का संकल्प लें। 2. भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें; स्थान स्वच्छ कर दीया और धूप जलाएँ। 3. गणेश को दूर्वा, पुष्प, रोली, अक्षत (चावल) और मोदक या लड्डू अर्पित करें। 4. विशेष तिल-गुड़ भोग बनाएँ - तिल और गुड़ की मिठाई व तिल के लड्डू; कुछ लोग छोटा तिल कुटा पर्वत बनाते हैं। 5. संध्या को हाथ जोड़कर सकट चौथ की कथा सुनें या पढ़ें। 6. रात्रि को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल और तिल से अर्घ्य दें, फिर गणेश को, और व्रत खोलें। अनेक स्त्रियाँ पूर्ण भोजन से पहले तिल और गुड़ प्रसाद रूप में ग्रहण करती हैं।

यह व्रत कौन और क्यों रखता है

सकट चौथ मुख्यतः माताओं द्वारा अपनी संतान के कल्याण, दीर्घायु व सफलता हेतु, तथा परिवार के मार्ग से बाधाएँ दूर करने हेतु रखी जाती है। भगवान गणेश के भक्त भी इसे वर्ष की सबसे शक्तिशाली संकष्टी चतुर्थी मानकर रखते हैं। गणेश विघ्नहर्ता हैं, इसलिए कठिनाइयों का सामना करने वाले, नए आरंभ चाहने वाले या घर में स्थिर रक्षा व सामंजस्य की कामना करने वाले इस व्रत को रखते हैं।

महत्व और लाभ

सकट चौथ संतान के जीवन से बाधाएँ व संकट दूर करती, उन्हें स्वास्थ्य, बुद्धि व दीर्घायु का आशीर्वाद देती और घर में शांति व समृद्धि लाती मानी जाती है। अर्पित तिल और गुड़ शीतल माघ ऋतु में ऊष्मा, मधुरता व रक्षा के प्रतीक हैं। सबसे बढ़कर, यह व्रत गणेश में उस प्रेममय रक्षक के रूप में श्रद्धा दृढ़ करता है जो सच्चे भक्तों के हर संकट को हर लेते हैं।

भक्तों के सामान्य प्रश्न

सकट चौथ कब मनाई जाती है?+

सकट चौथ माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है, सामान्यतः जनवरी या फरवरी में। यह वर्ष की प्रमुख संकष्टी चतुर्थी है। तिथि अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

इसे तिल कुटा चौथ क्यों कहते हैं?+

इसका नाम व्रत के केंद्र तिल और गुड़ के अर्पण से पड़ा है। तिल और गुड़ से मिठाई व लड्डू बनते हैं, और कुछ लोग गणेश के भोग हेतु छोटा तिल कुटा ढेर बनाते हैं।

सकट चौथ व्रत कैसे खोला जाता है?+

व्रत रात्रि को चंद्रोदय के बाद खोला जाता है। भक्त चंद्रमा और गणेश को जल व तिल से अर्घ्य देते हैं, तिल और गुड़ प्रसाद रूप में खाते हैं, फिर भोजन करते हैं।

सकट चौथ पर किस देवता की उपासना होती है?+

विघ्नहर्ता भगवान गणेश मुख्य देवता हैं। व्रत खोलने से पहले रात्रि को चंद्रमा की भी अर्घ्य सहित उपासना की जाती है।

सकट चौथ कथा क्या सिखाती है?+

कथा सिखाती है कि गणेश की सच्ची भक्ति संतान को हर संकट से बचाती है। यह बताती है कि कैसे माँ के श्रद्धामय व्रत ने उसके बालक को बचाया, गणेश को हर संकट हरने वाले रक्षक के रूप में दर्शाते हुए।

क्या सकट चौथ व्रत निर्जल रखा जा सकता है?+

अनेक माताएँ इसे निर्जला रखती हैं, जबकि कुछ दिन में फल, दूध या तिल-गुड़ लेती हैं। अपने स्वास्थ्य और सामर्थ्य अनुसार, भक्ति को केंद्र में रखकर व्रत रखें।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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