मासिक दुर्गाष्टमी क्या है
मासिक दुर्गाष्टमी माँ दुर्गा को समर्पित अष्टमी का मासिक व्रत है, वह दिव्य माता जो बुराई का नाश करती और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। यद्यपि सबसे प्रसिद्ध दुर्गाष्टमी शारदीय नवरात्रि में पड़ती है, जो भक्त प्रतिमाह देवी का सम्मान करना चाहते हैं वे यह व्रत प्रत्येक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को रखते हैं। यह वर्ष भर माँ की शक्ति व कृपा से जुड़े रहने का कोमल किंतु शक्तिशाली तरीका है।
तिथि और कब पड़ती है
मासिक दुर्गाष्टमी प्रत्येक चंद्र मास के शुक्ल पक्ष की आठवीं तिथि (अष्टमी) को रखी जाती है, अतः यह माह में एक बार, वर्ष में बारह बार आती है। चंद्र पंचांग ग्रेगोरियन से खिसकता रहता है, इसलिए इसकी तिथि प्रत्येक माह बदलती है। इनमें सबसे पूजनीय आश्विन में शारदीय नवरात्रि की महा अष्टमी है। किसी भी माह की सटीक तिथि व अष्टमी समय जानने हेतु सदैव विश्वसनीय क्षेत्रीय पंचांग देखें।
व्रत का महत्व
अष्टमी दुर्गा को पवित्र है क्योंकि यह राक्षस महिषासुर पर उनकी विजय से जुड़ी है, जब देवी धर्म की पुनर्स्थापना हेतु शक्ति रूप में प्रकट हुईं। प्रतिमाह दुर्गाष्टमी रखना साहस, शत्रुओं व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा, बाधाओं का निवारण और आंतरिक बल देता माना जाता है। जो भक्त नवरात्रि की प्रतीक्षा नहीं कर सकते, उनके लिए मासिक व्रत घर में माँ की रक्षक ऊर्जा को जीवंत रखता और हर पक्ष उनसे उनका बंधन नवीनीकृत करता है।
मासिक पूजा विधि

1. प्रातः जल्दी उठें, स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, आदर्श रूप से लाल, जो दुर्गा को प्रिय रंग है। 2. घर के मंदिर को स्वच्छ करें और माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र पूर्व या उत्तर की ओर रखें। 3. व्रत रखने का संकल्प लें, फिर घी या तिल के तेल का दीपक जलाएँ। 4. लाल पुष्प (विशेषकर गुड़हल), कुमकुम, अक्षत, धूप व फल अर्पित करें, और हलवा या खीर जैसा सात्विक भोग बनाएँ। 5. दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती के श्लोक या अर्गला स्तोत्र पढ़ें, फिर दुर्गा मंत्र का जप करें। 6. आरती करें, किसी त्रुटि हेतु क्षमा माँगें, और परिवार को प्रसाद वितरित करें।
व्रत के नियम
भक्त या तो पूर्ण उपवास (केवल जल या फल) रखते हैं या आंशिक उपवास जिसमें फल, दूध और कुट्टू, समक चावल या आलू जैसे व्रत-अनुकूल भोजन का एक सात्विक आहार लेते हैं। दिन भर अनाज, प्याज, लहसुन, मद्य और मांसाहार से बचें। स्वच्छता रखें, कोमलता से बोलें और मन देवी पर रखें। व्रत परंपरागत रूप से संध्या आरती के बाद, या पारिवारिक रीति अनुसार अगले दिन नवमी तिथि को खोला जाता है।
जप करने के मंत्र
दुर्गाष्टमी के सबसे प्रिय मंत्र हैं:
ॐ दुं दुर्गायै नमः
सर्व मंगल मांगल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरी, नारायणी नमोऽस्तुते।
ॐ दुं दुर्गायै नमः का रुद्राक्ष या लाल मनकों की माला पर 108 बार जप करें, और रक्षा तथा हर शुभ कामना की पूर्ति हेतु नारायणी नमोऽस्तुते श्लोक पढ़ें।
मासिक उपासना के लाभ

प्रतिमाह दुर्गाष्टमी रखना स्थिर रक्षा, साहस और भय व बाधाओं का निवारण लाता और नवरात्रि की प्रतीक्षा बिना दैनिक जीवन में माँ की कृपा को आमंत्रित करता माना जाता है। उपवास व प्रार्थना का नियमित अनुशासन मन को शांत करता, इच्छाशक्ति को सुदृढ़ करता और माँ दुर्गा से बंधन को गहरा करता है, जिससे उनकी ऊर्जा घर में निरंतर उपस्थिति बन जाती है।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
मासिक दुर्गाष्टमी क्या है?+
यह माँ दुर्गा की मासिक उपासना है, जो प्रत्येक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को रखी जाती है और वर्ष में बारह बार आती है। यह भक्तों को केवल नवरात्रि में नहीं, प्रतिमाह देवी का सम्मान करने देती है।
मासिक दुर्गाष्टमी किस तिथि को रखी जाती है?+
यह प्रत्येक चंद्र मास के शुक्ल पक्ष की आठवीं तिथि (अष्टमी) को पड़ती है। चंद्र पंचांग खिसकने के कारण इसकी ग्रेगोरियन तिथि प्रतिमाह बदलती है, अतः सटीक दिन व समय हेतु सदैव क्षेत्रीय पंचांग देखें।
यह नवरात्रि की दुर्गाष्टमी से कैसे भिन्न है?+
दोनों शुक्ल अष्टमी को पड़ती हैं, पर आश्विन की नवरात्रि की महा अष्टमी सबसे भव्य है, जो कन्या पूजन व विस्तृत अनुष्ठानों से मनाई जाती है। मासिक दुर्गाष्टमी प्रत्येक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को रखा जाने वाला सरल मासिक रूप है।
इस दिन माँ दुर्गा को क्या अर्पित करना चाहिए?+
लाल पुष्प, विशेषकर गुड़हल, के साथ कुमकुम, अक्षत, धूप, फल और हलवा या खीर जैसा सात्विक भोग अर्पित करें। लाल देवी को प्रिय रंग है, और स्वच्छ, सच्ची उपासना सबसे अधिक मायने रखती है।
मासिक दुर्गाष्टमी के लिए कौन सा मंत्र सर्वोत्तम है?+
'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का रुद्राक्ष या लाल मनकों की माला पर 108 बार जप करें, और रक्षा तथा शुभ कामनाओं की पूर्ति हेतु 'सर्व मंगल मांगल्ये' (नारायणी नमोऽस्तुते) श्लोक पढ़ें।
क्या मासिक दुर्गाष्टमी पर उपवास अनिवार्य है?+
यह अनिवार्य नहीं पर पारंपरिक है। भक्त या तो पूर्ण उपवास रखते हैं या व्रत-अनुकूल सात्विक भोजन के साथ आंशिक, अनाज, प्याज, लहसुन व मांसाहार से बचते हुए। उपवास की कठोरता से अधिक सच्ची उपासना मायने रखती है।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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