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शरद पूर्णिमा 2026 (कोजागरी) - खीर, महत्व और पूजा विधि
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शरद पूर्णिमा 2026 (कोजागरी) - खीर, महत्व और पूजा विधि

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 10, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

शरद पूर्णिमा क्या है

शरद पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा है, जो वर्षा के बाद शरद ऋतु के आगमन का संकेत है। परंपरा मानती है कि इस एक रात्रि चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होकर चमकता है और उसकी किरणों में अमृत - आरोग्य और पोषण का रस - बरसता है। बंगाल, ओडिशा और महाराष्ट्र में यह रात्रिभर लक्ष्मी पूजन के साथ कोजागरी पूर्णिमा के रूप में, और ब्रज में रास पूर्णिमा के रूप में मनाई जाती है, जो वृंदावन की गोपियों संग श्रीकृष्ण की दिव्य महारास का स्मरण कराती है।

तिथि और 2026 में यह कब है

शरद पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा को आती है - शारदीय नवरात्रि व दशहरे के बाद और दिवाली से लगभग एक पखवाड़ा पहले। ग्रेगोरियन कैलेंडर पर यह सामान्यतः अक्टूबर में आती है। खीर की रीति और लक्ष्मी पूजा के लिए चंद्रोदय समय और पूर्णिमा तिथि की सही अवधि महत्वपूर्ण है, इसलिए अपने शहर की तिथि, चंद्रोदय और पूजा मुहूर्त वंदना पंचांग पर अवश्य देखें।

कोजागरी - जब लक्ष्मी पूछती हैं कौन जाग रहा है

कोजागरी नाम संस्कृत के 'को जागर्ति?' - 'कौन जाग रहा है?' - से आया है। परंपरा कहती है कि इस रात्रि माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर उतरकर विचरती हैं और हर द्वार पर यही प्रश्न पूछती हैं। जो भक्ति में जागते मिलते हैं - पूजा, भजन और जागरण करते - उन्हें पूरे वर्ष के लिए धन, समृद्धि और कृपा का आशीर्वाद मिलता है। इसीलिए भक्त पूर्ण चंद्र तले लक्ष्मी पूजा, आरती, कीर्तन और स्मरण के साथ रात्रिभर जागरण करते हैं।

खीर चाँदनी में क्यों रखी जाती है

खीर चाँदनी में क्यों रखी जाती है

शरद पूर्णिमा की सबसे प्रिय रीति है खीर - दूध में धीमे पके चावल, शक्कर, इलायची और मेवों संग - जिसे खुले आकाश में चाँदनी तले रखा जाता है, परंपरा से पतले मलमल के कपड़े या महीन जाली से ढककर। रात्रिभर चंद्रमा की अमृतमयी किरणें उस पर पड़ने से खीर में आरोग्यकारी और शीतल गुण समा जाते हैं, ऐसी मान्यता है। आयुर्वेद भी इस पूर्णिमा को वह मोड़ मानता है जब वर्ष की गर्मी के बाद शरीर को शीतल पोषण चाहिए। खीर अगली प्रातः पूरा परिवार प्रसाद रूप में ग्रहण करता है।

वृंदावन में कृष्ण की महारास

भागवत पुराण कहता है कि इसी पूर्णिमा की रात्रि श्रीकृष्ण ने यमुना तट पर गोपियों संग महारास रचाई। उनकी बाँसुरी सुनकर गोपियाँ सब छोड़कर चली आईं; कृष्ण ने स्वयं को अनेक रूपों में प्रकट किया ताकि हर गोपी को लगे कि प्रभु केवल उसी के साथ नृत्य कर रहे हैं। यह वह रात्रि है जिसे चंद्रमा ने भी सम्मान दिया - परंपरा कहती है कि रास की वह रात ब्रह्मा की एक रात्रि जितनी लंबी हुई। महारास आत्मा के ईश्वर के प्रति पूर्ण, अखंड प्रेम का प्रतीक है, इसीलिए शरद पूर्णिमा ब्रज के मंदिरों में भक्ति, संगीत और दिव्य स्मरण की रात्रि भी है।

चरण-दर-चरण पूजा विधि

शरद पूर्णिमा इस विधि से मनाएँ: 1. प्रातः स्नान करें; अनेक भक्त दिनभर का व्रत रखते हैं जो संध्या के चंद्र पूजन के बाद पूर्ण होता है। 2. संध्या को पूजा स्थल स्वच्छ कर माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु को स्थापित करें; ब्रज परंपरा में राधा-कृष्ण की भी पूजा करें। 3. कमल या अन्य पुष्प, अक्षत, कुमकुम, धूप और घी का दीपक अर्पित करें; श्वेत मिठाई और नैवेद्य चढ़ाएँ। 4. भक्ति से खीर बनाएँ और पहले देवताओं को अर्पित करें। 5. चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें, उसकी चाँदनी को शांत भाव से निहारें, और खीर पतले कपड़े से ढककर खुले आकाश में रखें। 6. यथाशक्ति देर तक लक्ष्मी आरती, कीर्तन और मंत्र जप के साथ जागरण करें। 7. अगली प्रातः चाँदनी में रखी खीर परिवार में प्रसाद रूप में बाँटें।

मंत्र और लाभ

मंत्र और लाभ

इस रात्रि जप करें:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः - लक्ष्मी बीज मंत्र, यथासंभव 108 बार।

ॐ सों सोमाय नमः - पूर्ण चंद्र को अर्घ्य देते समय।

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः - महारास की रात्रि कृष्ण भक्ति के लिए।

लाभ: भक्त मानते हैं कि कोजागरी जागरण माँ लक्ष्मी का वर्षभर का धन-समृद्धि आशीर्वाद दिलाता है, चाँदनी में रखी खीर स्वास्थ्य व शीतल बल देती है, पूर्ण चंद्र का दर्शन मन और नेत्रों को शांत करता है, और महारास का स्मरण ईश्वर के प्रति शुद्ध प्रेम को गहरा करता है।

त्वरित उत्तर

शरद पूर्णिमा कब मनाई जाती है?+

शरद पूर्णिमा आश्विन मास की पूर्णिमा को, नवरात्रि व दशहरे के बाद, सामान्यतः अक्टूबर में आती है। सही तिथि, चंद्रोदय और मुहूर्त वंदना पंचांग पर देखें।

शरद पूर्णिमा पर खीर चाँदनी में क्यों रखी जाती है?+

इस रात्रि चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होकर अपनी किरणों से अमृत बरसाता माना जाता है। खुले आकाश में रखी खीर ये आरोग्यकारी, शीतल गुण सोख लेती है और अगली प्रातः प्रसाद रूप में खाई जाती है।

कोजागरी का अर्थ क्या है?+

कोजागरी 'को जागर्ति?' - 'कौन जाग रहा है?' - से बना है। मान्यता है कि माँ लक्ष्मी इस रात्रि पृथ्वी पर विचरते हुए यही प्रश्न पूछती हैं, और जो भक्ति में जागते मिलते हैं उन्हें धन व कृपा का आशीर्वाद देती हैं।

शरद पूर्णिमा को वृंदावन में क्या हुआ था?+

भागवत पुराण के अनुसार, इसी पूर्णिमा की रात्रि श्रीकृष्ण ने यमुना तट पर गोपियों संग महारास रचाई, स्वयं को अनेक रूपों में प्रकट करते हुए ताकि हर गोपी को लगे कि प्रभु केवल उसी के साथ नृत्य कर रहे हैं।

क्या शरद पूर्णिमा पर व्रत रखा जाता है?+

अनेक भक्त दिनभर का व्रत रखते हैं जो संध्या के चंद्र पूजन के बाद पूर्ण होता है, फिर कोजागरी लक्ष्मी पूजा हेतु रात्रिभर जागरण करते हैं। व्रत वैकल्पिक है; रात्रि जागरण और खीर की रीति पर्व का हृदय हैं।

खीर चाँदनी में कैसे रखनी चाहिए?+

देवताओं और चंद्रमा को अर्पित करने के बाद खीर को खुले आकाश तले स्वच्छ स्थान पर रखें, पतले मलमल के कपड़े या महीन जाली से ढककर ताकि चाँदनी उस तक पहुँचे और वह सुरक्षित भी रहे। अगली प्रातः उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करें।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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