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हम दीया क्यों जलाते हैं - महत्व और नियम
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हम दीया क्यों जलाते हैं - महत्व और नियम

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
SI

By Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

Reviewed by Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

उपासना के हृदय में ज्योति

कोई हिंदू प्रार्थना दीये के बिना पूर्ण नहीं लगती - वह छोटा मिट्टी या धातु का दीपक जिसकी स्थिर ज्योति हम देवता के सामने जलाते हैं। प्रातः पूजा से संध्या आरती तक, दीवाली से दैनिक उपासना तक, दीया भक्ति का निरंतर साथी है। इसकी कोमल, ऊपर उठती ज्योति हिंदू परंपरा के सबसे सुंदर व सार्थक प्रतीकों में से एक है, जो ज्ञान, पवित्रता और स्वयं दिव्य उपस्थिति का प्रतिनिधित्व करती है।

अंधकार और अज्ञान का नाश

दीया जलाने का गहनतम अर्थ ज्ञान और दिव्य की ज्योति से अंधकार और अज्ञान का नाश है। जैसे ज्योति भौतिक अंधकार को दूर करती है, वह अहंकार, भय व भ्रम के आंतरिक अंधकार को दूर करते ज्ञान का प्रतीक है। ज्योति सदा ऊपर की ओर उठती है, जो हमें अपने विचार उच्च सत्य व आकांक्षा की ओर उठाने का स्मरण कराती है। दीया जलाना सार रूप में एक प्रार्थना है: मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर ले चलो।

घी का दीया बनाम तेल का दीया

घी और तेल दोनों के दीपक प्रयोग होते हैं, सूक्ष्म अंतरों के साथ:

  • घी का दीया: सबसे शुद्ध व शुभ माना जाता है, घी का दीपक आमतौर पर देवता के सबसे निकट जलाया जाता है। इसका प्रकाश सकारात्मक, सात्विक ऊर्जा फैलाता कहा जाता है और मुख्य पूजा व विशेष अवसरों हेतु प्रिय है।
  • तेल का दीया: तिल, सरसों या अन्य तेल के दीपक दैनिक उपासना और विशिष्ट देवताओं हेतु व्यापक रूप से प्रयोग होते हैं - उदाहरणतः शनि व हनुमान के लिए सरसों या तिल का तेल।

घी का दीपक प्रायः देवता की दाहिनी ओर और तेल का दीपक बाईं ओर रखा जाता है।

दीया जलाने की सही दिशा

दीया जलाने की सही दिशा

दीये को रखने और मुख करने में दिशा मायने रखती है। दीपक ऐसे रखें कि इसका प्रकाश देवता की ओर पड़े, बत्ती उचित दिशा में हो। दीया आदर्श रूप से घर या पूजा कक्ष के पूर्व या उत्तर में जलाया जाता है, जो सकारात्मकता व समृद्धि से जुड़ी दिशाएँ हैं। बत्ती पूर्व की ओर रखना अच्छा स्वास्थ्य लाता और उत्तर की ओर धन आकर्षित करता कहा जाता है। दीया दक्षिण की ओर मुख किए रखने से बचें, जो सामान्य दैनिक उपासना हेतु प्रायः प्रिय नहीं है।

दीया जलाने के नियम

इन पारंपरिक नियमों का भक्ति से पालन करें: 1. दीया स्नान के बाद स्वच्छ हाथों से, स्वच्छ पूजा स्थान में जलाएँ। 2. दैनिक पूजा हेतु एक बत्ती प्रयोग करें; विशेष अवसरों पर विषम संख्या में बत्तियाँ। 3. पूजा दीपक को माचिस या किसी अन्य ज्योति से जलाएँ, पर परंपरा अनुसार एक दीया सीधे दूसरे दीये से न जलाएँ। 4. दीये को कभी अपनी साँस से न बुझाएँ - उसे जलकर समाप्त होने दें, या कोमलता से हवा दें। 5. दीये को स्वच्छ थाली या स्टैंड पर रखें, कभी सीधे नंगी अस्वच्छ सतह पर नहीं। 6. दैनिक उपासना हेतु इसे शुभ प्रातः व संध्या (संध्या) समय जलाएँ।

बचने योग्य सामान्य गलतियाँ

दीये को कभी मुँह से न बुझाएँ, क्योंकि साँस पवित्र ज्योति हेतु अशुद्ध मानी जाती है। दरार वाला या गंदा दीया जलाने, या बासी, अशुद्ध घी या तेल के उपयोग से बचें। यथासंभव पूजा के दौरान दीपक को अचानक बुझने न दें, और दैनिक उपासना हेतु दीया दक्षिण की ओर मुख किए कभी न रखें। दीये को अव्यवस्थित या अस्वच्छ स्थान पर छोड़ने से बचें, और इसे स्वच्छ शरीर, स्वच्छ स्थान व एकाग्र, भक्तिमय मन के बिना लापरवाही से न जलाएँ।

दीया जलाने के लाभ

दीया जलाने के लाभ

प्रतिदिन दीया जलाना घर को सकारात्मक ऊर्जा से भरने, नकारात्मकता दूर भगाने और दिव्य व देवी लक्ष्मी के आशीर्वाद को आमंत्रित करने वाला माना जाता है। कोमल, स्थिर ज्योति मन को शांत करती, ध्यान में सहायक होती और प्रार्थना हेतु शांत, पवित्र वातावरण रचती है। घी या तेल का दीपक आसपास की वायु को कोमलता से शुद्ध भी करता है। सबसे बढ़कर, दैनिक दीया जीवन के हर भाग में अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ने का सरल, शक्तिशाली संकल्प जीवित रखता है।

भक्तों के सामान्य प्रश्न

हम पूजा के दौरान दीया क्यों जलाते हैं?+

हम दीया ज्ञान और दिव्य की ज्योति से अंधकार व अज्ञान दूर करने हेतु जलाते हैं। इसकी ऊपर उठती ज्योति अहंकार, भय व भ्रम से ऊपर उठते ज्ञान का प्रतीक है।

हमें घी या तेल का दीया जलाना चाहिए?+

घी का दीया सबसे शुद्ध व शुभ है, प्रायः देवता के सबसे निकट जलाया जाता है। तिल या सरसों जैसे तेल के दीपक दैनिक उपासना और शनि व हनुमान जैसे विशिष्ट देवताओं हेतु प्रयोग होते हैं।

दीया किस दिशा में रखना चाहिए?+

दीया ऐसे रखें कि इसका प्रकाश देवता की ओर पड़े, आदर्श रूप से पूजा कक्ष के पूर्व या उत्तर में। पूर्व अच्छे स्वास्थ्य और उत्तर धन से जुड़ा है; इसे दक्षिण की ओर रखने से बचें।

हमें दीया कभी मुँह से क्यों नहीं बुझाना चाहिए?+

साँस पवित्र ज्योति हेतु अशुद्ध मानी जाती है। दीये को स्वयं जलकर समाप्त होने दें या कोमलता से हवा देकर बुझाएँ, पर कभी मुँह से न बुझाएँ।

दैनिक दीये में कितनी बत्तियाँ होनी चाहिए?+

दैनिक पूजा हेतु एक बत्ती प्रयोग होती है, जबकि विशेष अवसरों व त्योहारों पर विषम संख्या में बत्तियाँ जलाई जाती हैं। हर बार स्वच्छ घी या तेल और स्वच्छ दीया प्रयोग करें।

प्रतिदिन दीया जलाने के क्या लाभ हैं?+

यह घर को सकारात्मक ऊर्जा से भरने, नकारात्मकता दूर भगाने, लक्ष्मी के आशीर्वाद को आमंत्रित करने, मन को शांत करने, ध्यान में सहायक होने और शांत, पवित्र वातावरण रचने वाला माना जाता है।

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About the author

Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

Dr. Suresh has practiced traditional Vastu and basic Vedic Jyotish for over 18 years across South India. He contributes the Vastu, direction, and home-puja layout guides on Vandnaa.

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