जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत क्या है
जीवित्पुत्रिका - लोकप्रिय रूप से जितिया या जिउतिया - एक व्रत है जो माताएँ अपने बच्चों की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य व समृद्धि के लिए रखती हैं। यह सबसे कठिन व्रतों में से एक है, कठोर निर्जला (बिना अन्न-जल के) व्रत रूप में रखा जाता है। यह व्रत विशेषकर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल में प्रिय है। इसके केंद्र में देवता जीमूतवाहन हैं, एक उदार राजकुमार जिनका निःस्वार्थ बलिदान इस पर्व को इसका नाम व भाव देता है।
जितिया व्रत 2026 की तिथि और समय
जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन कृष्ण अष्टमी को रखा जाता है - आश्विन मास के कृष्ण पक्ष का आठवाँ दिन। ग्रेगोरियन पंचांग में यह शरद ऋतु के सितंबर या अक्टूबर मास में पड़ता है, पितृ पक्ष आरंभ होने के कुछ बाद और शारदीय नवरात्रि से पहले। व्रत तीन दिनों तक चलता है: नहाय-खाय (स्नान व भोजन), अष्टमी को मुख्य निर्जला उपवास दिन, और अगली सुबह पारण (व्रत खोलना)। चूँकि तिथि समय हर वर्ष बदलते हैं, कृपया अपने शहर की सही तिथियाँ व पारण समय वंदना पंचांग पर सुनिश्चित करें।
महत्व - संतान हेतु माँ का व्रत
जितिया माँ के असीम प्रेम का व्रत है। माताएँ कठिन निर्जला उपवास रखती हैं, अपने पुत्र-पुत्रियों की दीर्घायु, सुरक्षा व कल्याण और वंश की निरंतरता की प्रार्थना करते हुए। यह व्रत जीमूतवाहन के निःस्वार्थ उदाहरण पर आधारित है, जिन्होंने दूसरे को बचाने हेतु अपना जीवन अर्पित किया, बलिदान व रक्षा के भाव को साकार करते हुए। इस व्रत द्वारा माताएँ प्रतीकात्मक रूप से कष्ट उठाती हैं ताकि उनके बच्चे दीर्घायु हों और फलें-फूलें।
जितिया के तीन दिन और व्रत नियम

जितिया व्रत तीन दिनों में चलता है: 1. नहाय-खाय (पहला दिन): माताएँ स्नान कर सात्विक भोजन करती हैं और व्रत हेतु तन-मन तैयार करती हैं; कुछ क्षेत्रों में सत्तू, मरुआ रोटी व मौसमी साग का विशेष भोजन लिया जाता है। 2. खुर जितिया / अष्टमी (दूसरा दिन): कठोर निर्जला व्रत - सूर्योदय से दिन-रात बिना अन्न और जल के, जीमूतवाहन की उपासना के साथ। 3. पारण (तीसरा दिन): अगली सुबह पूजा के बाद निर्धारित समय पर व्रत खोला जाता है, अक्सर पारंपरिक व्यंजनों से। निर्जला व्रत कठिन है, इसलिए गर्भवती या अस्वस्थ स्त्रियाँ बड़ों से सलाह लें और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए कोमल व्रत रखें।
जितिया पूजा विधि
अष्टमी को भक्ति से जीमूतवाहन की उपासना करें: 1. पूजा स्थल स्वच्छ करें और जीमूतवाहन की छोटी मूर्ति या चित्र तैयार करें, अक्सर कुश घास या मिट्टी से बनी। 2. इसे स्वच्छ आसन पर रखें, साथ ही चील और सियारिन के चित्र, जो कथा से जुड़े प्राणी हैं। 3. पुष्प, दूर्वा, चंदन, धूप, फल व मौसमी वस्तुएँ अर्पित करें, और घी का दीपक जलाएँ। 4. कुछ माताएँ क्षेत्रीय रीति के रूप में लाल धागा, चूड़ियाँ और सरसों का तेल अर्पित करती हैं। 5. जीवित्पुत्रिका व्रत कथा पूर्ण ध्यान से सुनें या पढ़ें। 6. बच्चों की दीर्घायु व कल्याण की प्रार्थना करें, फिर आरती करें। माताएँ अक्सर मिलकर व्रत रखती और समुदाय रूप में कथा साझा करती हैं।
जीमूतवाहन व्रत कथा
कथा जीमूतवाहन की है, गंधर्वों का एक दयालु व निःस्वार्थ राजकुमार। एक बार उन्होंने नागों की एक शोकमग्न माँ को पाया जिसका पुत्र शक्तिशाली चील गरुड़ को दैनिक आहार रूप में अर्पित होने वाला था। उसके दुःख से द्रवित होकर जीमूतवाहन ने पुत्र के स्थान पर अपना शरीर अर्पित कर दिया। ऐसे निःस्वार्थ साहस से प्रभावित गरुड़ ने अपनी हिंसा पर पश्चाताप किया और सभी लिए गए नागों को जीवन लौटा दिया। एक समानांतर कथा चील और सियारिन की है जिन्होंने यह व्रत रखा - श्रद्धालु चील के बच्चे फले-फूले, जबकि लापरवाह सियारिन के नहीं। कथा बलिदान, भक्ति और माँ के व्रत की रक्षक शक्ति का उत्सव मनाती है।
जितिया व्रत के लाभ

माताएँ मानती हैं कि श्रद्धा से जितिया व्रत रखना उनके बच्चों को दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, हानि से सुरक्षा और समृद्ध भविष्य का आशीर्वाद देता है। यह व्रत माँ और संतान के बंधन को सुदृढ़ करता और पूरे परिवार की निरंतरता व कल्याण की रक्षा करता भी माना जाता है। अपने आशीर्वाद से परे, यह व्रत मातृ प्रेम, बलिदान और भक्ति की गहन अभिव्यक्ति है जिसे परिवार पीढ़ियों तक पवित्र मानते हैं।
त्वरित उत्तर
जितिया व्रत 2026 में कब है?+
जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत आश्विन कृष्ण अष्टमी को रखा जाता है, आश्विन के कृष्ण पक्ष का आठवाँ दिन, शरद के सितंबर या अक्टूबर मास में। सही तिथियाँ व पारण समय वंदना पंचांग पर सुनिश्चित करें।
जीवित्पुत्रिका व्रत कौन और क्यों रखता है?+
माताएँ यह व्रत अपने बच्चों की दीर्घायु, स्वास्थ्य व समृद्धि के लिए रखती हैं। यह मातृ प्रेम का व्रत है, जो राजकुमार जीमूतवाहन के निःस्वार्थ बलिदान पर आधारित है।
क्या जितिया व्रत सचमुच निर्जला है?+
हाँ। अष्टमी को मुख्य उपवास दिन निर्जला रखा जाता है, सूर्योदय से दिन-रात बिना अन्न या जल के। गर्भवती या अस्वस्थ स्त्रियाँ बड़ों से सलाह लें और स्वास्थ्य हेतु कोमल व्रत रखें।
जितिया व्रत के तीन दिन कौन से हैं?+
तीन दिन हैं नहाय-खाय (स्नान व भोजन), अष्टमी को मुख्य निर्जला उपवास दिन, और पारण (व्रत खोलना) अगली सुबह पूजा के बाद निर्धारित समय पर।
जीमूतवाहन कौन हैं?+
जीमूतवाहन एक उदार व निःस्वार्थ गंधर्व राजकुमार हैं जिन्होंने एक नाग युवक को गरुड़ का आहार बनने से बचाने हेतु अपना जीवन अर्पित किया। उनका बलिदान जीवित्पुत्रिका व्रत को इसका नाम व भाव देता है।
जितिया पूजा में क्या अर्पित किया जाता है?+
भक्त कुश घास या मिट्टी से बनी जीमूतवाहन की मूर्ति की पूजा करते हैं, चील व सियारिन के चित्रों के साथ, पुष्प, दूर्वा, फल व घी का दीपक अर्पित करते, और व्रत कथा सुनते हैं।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
Meet the Vandnaa editorial team →Explore on Vandnaa
संबंधित लेख

हरियाली तीज 2026 - व्रत, कथा, पूजा विधि और महत्व
9 मिनट पढ़ें

ऋषि पंचमी 2026 - व्रत, कथा और सप्त ऋषि पूजा विधि
8 मिनट पढ़ें

गोपाष्टमी 2026 - गौ पूजा, कृष्ण विधि और महत्व
8 मिनट पढ़ें

शारदीय नवरात्रि 2026: 9 दिन के रंग, पूजा विधि, व्रत नियम व कन्या पूजन गाइड
10 मिनट पढ़ें

संतोषी माता व्रत: 16 शुक्रवार उपवास - नियम, कथा, आरती और उद्यापन
9 मिनट पढ़ें

दुर्गा आरती – अम्बे तू है जगदम्बे काली लिरिक्स
8 मिनट पढ़ें